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सांझी बनाने वाली महिलाओं को सम्मानित करेगा कला संगम एवं विरासत
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हरियाणवी लोककला सांझी को प्रोत्साहित करने के लिए कला संगम एवं विरासत 11 हजार से अधिक के पुरस्कार कुरुक्षेत्र में सबसे सुंदर सांझी बनाने वाली महिलाओं को वितरित करेगा। यह जानकारी विरासत और कला संगम के संरक्षक डॉ. महासिंह पूनिया एवं डॉ. पंकज शर्मा ने दी। उन्होंने बताया कि प्रथम पुरस्कार 5100, द्वितीय 3100, तृतीय 2100, सांत्वना 1100 रुपये का वितरित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि कला संगम की टीम कुरुक्षेत्र जिला के घरों में जाकर सांझियों का अवलोकन करेगी, जिनकी सांझी सबसे सुंदर होगी उनको कला संगम की ओर से एक प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार राशि वितरित की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सांझी नवरात्रों में सभी घरों में लगती है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण अंचल में सांझी कला को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी बताया कि कला संगम की टीम के रूप में अमित गुलाटी, कुलदीप चोपड़ा, डॉ. नीरज मित्तल, रंजन शर्मा, छवि अग्रवाल, विनय, रिंकू छाबड़ा सहित सभी सदस्यों की टीमें घर-घर जाकर सांझियों का अवलोकन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान दौर में सांझी कला का वजूद भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। इसीलिए कला संगम गु्रप ने ‘प्रकृति एवं संस्कृति संरक्षण’ अभियान के तहत सांझी कला को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतियोगिता में केवल उन्हीं सांझियों को शामिल किया जाएगा जो परिवार सांझी लगाने की सूचना मो. नंबर 9896567170, 9466194004, 9215720864 तथा ई-मेल kalasangamkkr@gmail.com, virasatheritagevillage@gmail.com पर इसकी सूचना देंगे।
उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में जिला कुरुक्षेत्र के तहत आने वाले गांवों में लगने वाली सांझी का अवलोकन किया जाएगा। सांझी कला नवरात्रों में दुर्गापूजा के रूप में हरियाणवी संस्कृति की लोक पारंपरिक कला है। दीवार पर गाय के गोबर के साथ मिट्टी के बने हुए सितारों एवं सांझी के विभिन्न अंगों को दीवार पर लगाया जाता है। यह पारंपरिक कला सदियों पुरानी है जो अब समाज में लुप्त होने के कगार पर है। उल्लेखनीय है कि नवरात्रों में गांवों में महिलाएं सांझी लगाती हैं। इस वर्ष नवरात्रों की शुरूआत 17 अक्टूबर से हो रही है। इसीलिए कला संगम एवं विरासत ने सांझी लोककला को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है।
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उन्होंने यह भी बताया कि सांझी नवरात्रों में सभी घरों में लगती है। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य ग्रामीण अंचल में सांझी कला को बढ़ावा देना है। उन्होंने यह भी बताया कि कला संगम की टीम के रूप में अमित गुलाटी, कुलदीप चोपड़ा, डॉ. नीरज मित्तल, रंजन शर्मा, छवि अग्रवाल, विनय, रिंकू छाबड़ा सहित सभी सदस्यों की टीमें घर-घर जाकर सांझियों का अवलोकन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान दौर में सांझी कला का वजूद भी धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। इसीलिए कला संगम गु्रप ने ‘प्रकृति एवं संस्कृति संरक्षण’ अभियान के तहत सांझी कला को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रतियोगिता में केवल उन्हीं सांझियों को शामिल किया जाएगा जो परिवार सांझी लगाने की सूचना मो. नंबर 9896567170, 9466194004, 9215720864 तथा ई-मेल kalasangamkkr@gmail.com, virasatheritagevillage@gmail.com पर इसकी सूचना देंगे।
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उल्लेखनीय है कि इस प्रतियोगिता में जिला कुरुक्षेत्र के तहत आने वाले गांवों में लगने वाली सांझी का अवलोकन किया जाएगा। सांझी कला नवरात्रों में दुर्गापूजा के रूप में हरियाणवी संस्कृति की लोक पारंपरिक कला है। दीवार पर गाय के गोबर के साथ मिट्टी के बने हुए सितारों एवं सांझी के विभिन्न अंगों को दीवार पर लगाया जाता है। यह पारंपरिक कला सदियों पुरानी है जो अब समाज में लुप्त होने के कगार पर है। उल्लेखनीय है कि नवरात्रों में गांवों में महिलाएं सांझी लगाती हैं। इस वर्ष नवरात्रों की शुरूआत 17 अक्टूबर से हो रही है। इसीलिए कला संगम एवं विरासत ने सांझी लोककला को संरक्षित करने का बीड़ा उठाया है।
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