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चालकों की कमी के चलते नहीं बढ़ पा रहा रोडवेज का बेड़ा
Updated Sun, 18 Mar 2018 12:13 AM IST
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चालकों की कमी से नई बसें लेने से अधिकारियों ने किया इनकार
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार भले ही लोगों को अधिक से अधिक परिवहन सुविधाएं देने के लिए रोडवेज डिपो में बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन चालकों की कमी के चलते अधिकारी ये बसें लेने से हाथ खड़े कर रहे हैं । हालांकि बसें डिपो के बेड़े में शामिल होने का इंतजार कर रही हैं, पर अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक चालकों की पर्याप्त संख्या नहीं हो जाती तब तक नई बसें नहीं ली जाएंगी। यही वजह है कि कुरुक्षेत्र डिपो में भी शामिल होने वाली पांच बसें अटक गई हैं।
विभाग में चालकों की चल रही भर्ती प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही डिपो में नए चालक आ जाने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन तब तक नई बसों को इंतजार ही करना होगा। यहां तक कि बस चालकों की पहले से ही भारी कमी के चलते पिछले एक वर्ष से कुरुक्षेत्र डिपो में ही 8 लो फ्लोर बसें खड़ी है, जो जंग का शिकार हो रही है। बता दें कि कुरुक्षेत्र डिपो की ओर से प्रदेश सरकार को 10 नई बसें दिए जाने का प्रपोजल भेजा था, जिसके अनुसार यह बसें भी तैयार हो गई और करीब एक सप्ताह पहले डिपो में पांच नई बसें पहुंच भी गई, जिन्हें सड़कों पर उतार दिया गया है, लेकिन बाकी पांच बसें लेने से फिलहाल अधिकारियों ने इंकार कर दिया है। इसके साथ ही उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है कि जब तक डिपो में चालकों की कमी पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई बसें भी नहीं चाहिए।
आज भी 36 चालकों की कमी
अकेले कुरुक्षेत्र में ही लंबे समय से 36 चालकों के पद खाली पड़े हुए है, जिसके चलते जहां 8 लो फ्लोर बसों के पहिए करीब एक साल से थमे हुए है, वहीं दर्जनभर बसें पर्याप्त फेरे अपने रूटों पर नहीं लगा पा रही हैं। इसके साथ ही चालकों की लगातार हो रही सेवानिवृत्ति ने भी अधिकारियों के पसीने छुड़ाए हुए हैैं।
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सड़कों पर दौड़ रहीं 175 बसें
कुरुक्षेत्र मेन व पिहोवा सब डिपो के तहत वर्तमान में कुल 185 बसों में से 175 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें से एक-दो बसें हर रोज तकनीकी कारणों से सड़कों के किनारे खड़ी मिलती हैं तो करीब एक वर्ष से खड़ी लो फ्लोर बसें की एसेसरी भी विभाग के पास पर्याप्त नहीं है।
परिचालकों से लिया जा रहा क्लेरिकल काम
डिपो में क्लेरिकल स्टाफ का भी टोटा है, जिसके चलते करीब दर्जनभर से अधिक परिचालकों को बसों से उतार कर क्लेरिकल कार्यों में लगा दिया गया है। हाल ही में क्लेरिकल स्टाफ के लिए एचएसएससी की ओर से जारी की गई नए उम्मीदवारों की फाइनल सूची से अधिकारियों को आस जगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक माह तक डिपो में नए क्लेरिकल कर्मी पहुंचेंगे, जिसके बाद चालकों को फिर से बसों पर तैनात कर दिया जाएगा।
चालक हैं नहीं, कौन चलाएगा नई बसें : गोयल
डिपो महाप्रबंधक आरके गोयल का कहना है कि चालक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में पांच और नई बसें डिपो में खड़ी कर दी गईं तो उन्हें चलाएगा कौन? अगर किसी चालक को इन बसों को लगाया गया तो दूसरी पुरानी बसें खड़ी करनी पड़ेंगी। ऐसे में फिलहाल नई बसें लेने से इनकार करना पड़ा है। उम्मीद है अगले कुछ ही दिनों के दौरान नए चालक डिपो में शामिल हो जाएंगे, जिसके बाद ये बसें अवश्य ही डिपो में शामिल की जाएंगी। नई बसों को विभिन्न राज्यों से जुड़े रूटों पर उतार दिया गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र। प्रदेश सरकार भले ही लोगों को अधिक से अधिक परिवहन सुविधाएं देने के लिए रोडवेज डिपो में बसों का बेड़ा बढ़ाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन चालकों की कमी के चलते अधिकारी ये बसें लेने से हाथ खड़े कर रहे हैं । हालांकि बसें डिपो के बेड़े में शामिल होने का इंतजार कर रही हैं, पर अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक चालकों की पर्याप्त संख्या नहीं हो जाती तब तक नई बसें नहीं ली जाएंगी। यही वजह है कि कुरुक्षेत्र डिपो में भी शामिल होने वाली पांच बसें अटक गई हैं।
विभाग में चालकों की चल रही भर्ती प्रक्रिया के अनुसार जल्द ही डिपो में नए चालक आ जाने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन तब तक नई बसों को इंतजार ही करना होगा। यहां तक कि बस चालकों की पहले से ही भारी कमी के चलते पिछले एक वर्ष से कुरुक्षेत्र डिपो में ही 8 लो फ्लोर बसें खड़ी है, जो जंग का शिकार हो रही है। बता दें कि कुरुक्षेत्र डिपो की ओर से प्रदेश सरकार को 10 नई बसें दिए जाने का प्रपोजल भेजा था, जिसके अनुसार यह बसें भी तैयार हो गई और करीब एक सप्ताह पहले डिपो में पांच नई बसें पहुंच भी गई, जिन्हें सड़कों पर उतार दिया गया है, लेकिन बाकी पांच बसें लेने से फिलहाल अधिकारियों ने इंकार कर दिया है। इसके साथ ही उच्चाधिकारियों को भी अवगत करवा दिया गया है कि जब तक डिपो में चालकों की कमी पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई बसें भी नहीं चाहिए।
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आज भी 36 चालकों की कमी
अकेले कुरुक्षेत्र में ही लंबे समय से 36 चालकों के पद खाली पड़े हुए है, जिसके चलते जहां 8 लो फ्लोर बसों के पहिए करीब एक साल से थमे हुए है, वहीं दर्जनभर बसें पर्याप्त फेरे अपने रूटों पर नहीं लगा पा रही हैं। इसके साथ ही चालकों की लगातार हो रही सेवानिवृत्ति ने भी अधिकारियों के पसीने छुड़ाए हुए हैैं।
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सड़कों पर दौड़ रहीं 175 बसें
कुरुक्षेत्र मेन व पिहोवा सब डिपो के तहत वर्तमान में कुल 185 बसों में से 175 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें से एक-दो बसें हर रोज तकनीकी कारणों से सड़कों के किनारे खड़ी मिलती हैं तो करीब एक वर्ष से खड़ी लो फ्लोर बसें की एसेसरी भी विभाग के पास पर्याप्त नहीं है।
परिचालकों से लिया जा रहा क्लेरिकल काम
डिपो में क्लेरिकल स्टाफ का भी टोटा है, जिसके चलते करीब दर्जनभर से अधिक परिचालकों को बसों से उतार कर क्लेरिकल कार्यों में लगा दिया गया है। हाल ही में क्लेरिकल स्टाफ के लिए एचएसएससी की ओर से जारी की गई नए उम्मीदवारों की फाइनल सूची से अधिकारियों को आस जगी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक माह तक डिपो में नए क्लेरिकल कर्मी पहुंचेंगे, जिसके बाद चालकों को फिर से बसों पर तैनात कर दिया जाएगा।
चालक हैं नहीं, कौन चलाएगा नई बसें : गोयल
डिपो महाप्रबंधक आरके गोयल का कहना है कि चालक पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में पांच और नई बसें डिपो में खड़ी कर दी गईं तो उन्हें चलाएगा कौन? अगर किसी चालक को इन बसों को लगाया गया तो दूसरी पुरानी बसें खड़ी करनी पड़ेंगी। ऐसे में फिलहाल नई बसें लेने से इनकार करना पड़ा है। उम्मीद है अगले कुछ ही दिनों के दौरान नए चालक डिपो में शामिल हो जाएंगे, जिसके बाद ये बसें अवश्य ही डिपो में शामिल की जाएंगी। नई बसों को विभिन्न राज्यों से जुड़े रूटों पर उतार दिया गया है।