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वेतन कटने के बाद 31 अक्तूबर तक कुंटिया की हड़ताल पर चला कोर्ट के स्टे आर्डर का डंडा 22-11-23
Updated Sat, 08 Sep 2018 01:06 AM IST
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कुंटिया को दोहरा झटका, वेतन कटने के बाद अब 31 अक्तूबर तक हड़ताल पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर
- लगातार दूसरे मोर्चे पर कुंटिया की हार,भारी पड़ गया केयू प्रशासन का दूसरा वार
- अक्तूबर के कुंटिया चुनावों में गुर्जर गुट पर पड़ सकते हैं इसके साइड इफेक्ट
- स्टे ऑर्डर 31 तक और अक्तूबर में खत्म हो रहा है कुंटिया की कार्यकारिणी का कार्यकाल
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। वेतन कटने के बाद अब कोर्ट ने कुंटिया की 31 अक्तूबर तक हड़ताल पर स्टे ऑर्डर देकर दोहरा झटका दिया है। केयू प्रशासन के हाथों इस दोहरी हार के साइड इफेक्ट अक्तूबर में होने वाले कुंटिया के चुनाव में सीधे तौर रामकुमार गुर्जर गुट को झेलने पड़ सकते हैं।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले वर्षो में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गैर शिक्षक कर्मचारी संघ की संगठन शक्ति की धाक पूरे हरियाणा में रही है। इसी के दम पर कुंटिया कई सशक्त आंदोलन खड़े कर कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ने में सफल रही। मगर इस बार पासा उल्टा पड़ गया। लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण केयू प्रशासन को सख्त एक्शन मोड पर आने के लिये विवश होना पड़ा। लिहाजा नो वर्क नो पे जैसे आदेश निकाले गये,लेकिन कुंटिया की ताकत के कारण इसे मार्च में हुई हड़ताल के बावजूद ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। दोबारा अगस्त 2018 में अनिश्चितकालीन हड़ताल और दफ्तरों पर तालाबंदी से हड़बड़ाए केयू प्रशासन ने इसके खिलाफ कार्रवाई का मना लिया था। नतीजतन सबसे पहले नो वर्क नो पे के आदेश को अमलीजामा पहनाते हुए 1350 कर्मचारियों की सैलरी में से 4, 5, 7 और 9 हजार रुपये काटे गए। इसके बाद कुंटिया के प्रधान और महासचिव सहित 17 कर्मचारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट में अपील दायर की गई। इस अपील पर आज कोर्ट ने सख्त दिखाते हुए कुंटिया की हड़ताल पर 31 अक्तूबर तक रोक लगा दी है। न्यायाधीश चितेश गुप्ता ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की मर्यादा को बनाये रखने के लिये परिसर में कुंटिया आंदोलन के दौरान असंवैधानिक भाषा, स्लोगन, कार्य समय के दौरान दफ्तरों पर तालाबंदी सहित कर्मचारियों को बलपूर्वक धरने, प्रदर्शन और हड़ताल में शामिल करने पर रोक लगा दी है। केयू प्रवक्ता के मुताबिक कोर्ट कार्रवाई जारी रहेगी और उपरोक्त मामले में स्टे ऑर्डर 31 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगा। हालांकि कुंटिया को धरना प्रदर्शन करना है तो वह केयू की सीमा से 50 मीटर की दूरी पर ही करना होगा। वहीं खास बात यह है कि अक्तूबर में कुंटिया अध्यक्ष और पूरी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में पहले सभी कर्मचारियों की सैलरी कटना और अब 31 तक केयू परिसर में हड़ताल पर रोक लगने से मौजूदा अध्यक्ष रामकुमार गुर्जर गुट को काफी परेशानी का सामना अगले चुनाव में करना पड़ सकता है।
...तो मानी जाएगी कोर्ट की अवमानना
केयू प्रशासन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद जो अपील की थी उस पर कोर्ट के स्टे के बाद बावजूद अगर बंद करने, जुलूस निकालने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के साथ यूनिवर्सिटी के कामकाज को अगर प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया गया तो ऐसा करने वालों पर कोर्ट की कार्रवाई का डंडा चल सकता है। 7 सितंबर 2018 से ऐसा करने पर कोर्ट की अवमानना के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
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केयू प्रशासन, एसपी और एसएचओ को भेजी स्टे ऑर्डर की कॉपी
8 सितंबर से केयू परिसर में शांति का माहौल बनने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि रात को जारी हुई इस स्टे ऑर्डर की कापी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के अलावा पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना के एसएचओ को भी भेजी गई, ताकि केयू की व्यवस्था बनाने में पुलिस बल का भी सहयोग मिल सके।
स्टे ऑर्डर पर न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी
सरकारी कर्मचारी मांगों को लेकर हड़ताल, धरना प्रदर्शन करना उनका अधिकारी है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है। ऐसा करने से कई बार सरकारी संस्थानों का कामकाज प्रभावित होता है। बता दें केयू प्रशासन ने कोर्ट अपील में आरोप लगाया है कुंटिया के कुछ नेता नियमों को दरकिनार कर प्रमोशन चाहते हैं। इधर केयू अधिवक्ता एएन मनोचा ने बताया कि केयू प्रशासन की ओर से सिविल कोर्ट में कुंटिया की हड़ताल पर रोक लगाने की अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने कुंटिया की हड़ताल पर 31 अक्तूबर तक रोक लगा दी है।
केयू प्रशासन चाहे जितनी दमनकारी नीतियां अपना ले, कुंटिया लड़ेगी लड़ाई : गुर्जर
शुक्रवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ता सिविल कोर्ट में पेश हुए थे। कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि कुलपति कुंटिया के अस्तित्व को मानने से इंकार कर रहे हैं। अब केयू प्रशासन ने 17 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ केस दायर किया है। कोर्ट ने मामले पर स्टे लगाते हुए 31 अक्तूबर की तारीख रख दी है। प्रशासन चाहे जितनी दमनकारी नीतियां अपना ले, लेकिन कुंटिया इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ती रहेगी।
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कुंटिया को दोहरा झटका, वेतन कटने के बाद अब 31 अक्तूबर तक हड़ताल पर कोर्ट का स्टे ऑर्डर
- लगातार दूसरे मोर्चे पर कुंटिया की हार,भारी पड़ गया केयू प्रशासन का दूसरा वार
- अक्तूबर के कुंटिया चुनावों में गुर्जर गुट पर पड़ सकते हैं इसके साइड इफेक्ट
- स्टे ऑर्डर 31 तक और अक्तूबर में खत्म हो रहा है कुंटिया की कार्यकारिणी का कार्यकाल
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। वेतन कटने के बाद अब कोर्ट ने कुंटिया की 31 अक्तूबर तक हड़ताल पर स्टे ऑर्डर देकर दोहरा झटका दिया है। केयू प्रशासन के हाथों इस दोहरी हार के साइड इफेक्ट अक्तूबर में होने वाले कुंटिया के चुनाव में सीधे तौर रामकुमार गुर्जर गुट को झेलने पड़ सकते हैं।
इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि पिछले वर्षो में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी गैर शिक्षक कर्मचारी संघ की संगठन शक्ति की धाक पूरे हरियाणा में रही है। इसी के दम पर कुंटिया कई सशक्त आंदोलन खड़े कर कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ने में सफल रही। मगर इस बार पासा उल्टा पड़ गया। लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण केयू प्रशासन को सख्त एक्शन मोड पर आने के लिये विवश होना पड़ा। लिहाजा नो वर्क नो पे जैसे आदेश निकाले गये,लेकिन कुंटिया की ताकत के कारण इसे मार्च में हुई हड़ताल के बावजूद ठंडे बस्ते में डालना पड़ा। दोबारा अगस्त 2018 में अनिश्चितकालीन हड़ताल और दफ्तरों पर तालाबंदी से हड़बड़ाए केयू प्रशासन ने इसके खिलाफ कार्रवाई का मना लिया था। नतीजतन सबसे पहले नो वर्क नो पे के आदेश को अमलीजामा पहनाते हुए 1350 कर्मचारियों की सैलरी में से 4, 5, 7 और 9 हजार रुपये काटे गए। इसके बाद कुंटिया के प्रधान और महासचिव सहित 17 कर्मचारियों के खिलाफ सिविल कोर्ट में अपील दायर की गई। इस अपील पर आज कोर्ट ने सख्त दिखाते हुए कुंटिया की हड़ताल पर 31 अक्तूबर तक रोक लगा दी है। न्यायाधीश चितेश गुप्ता ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान की मर्यादा को बनाये रखने के लिये परिसर में कुंटिया आंदोलन के दौरान असंवैधानिक भाषा, स्लोगन, कार्य समय के दौरान दफ्तरों पर तालाबंदी सहित कर्मचारियों को बलपूर्वक धरने, प्रदर्शन और हड़ताल में शामिल करने पर रोक लगा दी है। केयू प्रवक्ता के मुताबिक कोर्ट कार्रवाई जारी रहेगी और उपरोक्त मामले में स्टे ऑर्डर 31 अक्तूबर तक प्रभावी रहेगा। हालांकि कुंटिया को धरना प्रदर्शन करना है तो वह केयू की सीमा से 50 मीटर की दूरी पर ही करना होगा। वहीं खास बात यह है कि अक्तूबर में कुंटिया अध्यक्ष और पूरी कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में पहले सभी कर्मचारियों की सैलरी कटना और अब 31 तक केयू परिसर में हड़ताल पर रोक लगने से मौजूदा अध्यक्ष रामकुमार गुर्जर गुट को काफी परेशानी का सामना अगले चुनाव में करना पड़ सकता है।
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केयू प्रशासन ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के बाद जो अपील की थी उस पर कोर्ट के स्टे के बाद बावजूद अगर बंद करने, जुलूस निकालने और अभद्र भाषा का प्रयोग करने के साथ यूनिवर्सिटी के कामकाज को अगर प्रभावित करने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया गया तो ऐसा करने वालों पर कोर्ट की कार्रवाई का डंडा चल सकता है। 7 सितंबर 2018 से ऐसा करने पर कोर्ट की अवमानना के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।
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केयू प्रशासन, एसपी और एसएचओ को भेजी स्टे ऑर्डर की कॉपी
8 सितंबर से केयू परिसर में शांति का माहौल बनने की उम्मीद जताई जा रही है। बता दें कि रात को जारी हुई इस स्टे ऑर्डर की कापी कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के अलावा पुलिस अधीक्षक और संबंधित थाना के एसएचओ को भी भेजी गई, ताकि केयू की व्यवस्था बनाने में पुलिस बल का भी सहयोग मिल सके।
स्टे ऑर्डर पर न्यायाधीश की सख्त टिप्पणी
सरकारी कर्मचारी मांगों को लेकर हड़ताल, धरना प्रदर्शन करना उनका अधिकारी है, लेकिन इसका दुरुपयोग हो रहा है। ऐसा करने से कई बार सरकारी संस्थानों का कामकाज प्रभावित होता है। बता दें केयू प्रशासन ने कोर्ट अपील में आरोप लगाया है कुंटिया के कुछ नेता नियमों को दरकिनार कर प्रमोशन चाहते हैं। इधर केयू अधिवक्ता एएन मनोचा ने बताया कि केयू प्रशासन की ओर से सिविल कोर्ट में कुंटिया की हड़ताल पर रोक लगाने की अपील की थी, जिस पर कोर्ट ने कुंटिया की हड़ताल पर 31 अक्तूबर तक रोक लगा दी है।
केयू प्रशासन चाहे जितनी दमनकारी नीतियां अपना ले, कुंटिया लड़ेगी लड़ाई : गुर्जर
शुक्रवार को दोनों पक्षों के अधिवक्ता सिविल कोर्ट में पेश हुए थे। कुंटिया प्रधान रामकुमार गुर्जर ने कहा कि कुलपति कुंटिया के अस्तित्व को मानने से इंकार कर रहे हैं। अब केयू प्रशासन ने 17 कर्मचारी नेताओं के खिलाफ केस दायर किया है। कोर्ट ने मामले पर स्टे लगाते हुए 31 अक्तूबर की तारीख रख दी है। प्रशासन चाहे जितनी दमनकारी नीतियां अपना ले, लेकिन कुंटिया इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ती रहेगी।