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टेंडर खुलने के बाद इंटरनेशनल गीता जयंती के तीन ठेकों पर ब्रेक,अब होंगे री-टेंडर
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:11 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
ये हैं टेंडर का खेल। जिस टेंडर को खुलने के बाद ठेका देने में एक माह का वक्त लगा, उसे इंटरनेशनल गीता जयंती फेस्टिवल से चंद दिन पहले रद कर री-टेंडर किया जाएगा। अब आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया गीता जयंती से चंद दिन पहले अपनाई जाएगी। यह प्रक्रिया दो महीने से क्यों नहीं की गई। यह सवाल टेंडर भरने वाली एजेंसी कर रही हैं।
बता दें कि अमर उजाला ने दो नवंबर 2017 को गीता जयंती के टेंडर में गड़बड़झाला, भेदभाव और सिफारिश का आरोप और 24 लाख की जगह 37 लाख वाले को दिया गया बिजली का ठेका... शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले को उजागर करने के साथ उस आरोप को भी प्रकाश में लाया गया था। इसमें कुरुक्षेत्र की एक फर्म का आरोप आरोप था कि विजय इलेक्ट्रिकल को यह ठेका 13 लाख रुपये ज्यादा में दिया गया था। माई सिटी में इस मामले के उजागर होने के बाद इस ठेके के री-टेंडर की प्रक्रिया उच्च अधिकारियों ने शुरू कर दी। इसकी पुष्टि इंटरनेशनल गीता जयंती के आयोजक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर पूजा चांवरिया ने की है। प्रबंधन में लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ठीक 12 दिन बाद इंटरनेशनल गीता जयंती महोत्सव शुरू होने जा रहा है। अब 13 दिन पहले टेंडर रद हो रहे हैं। अभी टेंडर करने में ही कम से कम पांच-छह दिन लगे जाएंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। पता यह भी चला है कि इसके अलावा और फ्लावर डेकोरेशन और अन्य एक टेंडर सहित कुल तीन री टेंडर किये जा रहे हैं।
टेंपरेरी इलेक्टीफिकेशन के लिए इन्होंने भरा टेंडर
यादव इलेक्ट्रिकल वर्कर्स (24 लाख 79 हजार 600)
नरेंद्रा इलेक्ट्रिक वर्कर्स (26 लाख 500)
विजय इलेक्ट्रिक वर्कर्स (37 लाख 38 हजार 812)
एसपी कंस्ट्रक्शन (46 लाख लाख 37 हजार 610)
ठेका दिया 13 लाख ज्यादा बोली लगाने वाली एजेंसी को
ठेका दिए जाने के बाद सामने आया कि कहीं न कहीं ठेका देने में अनियमितता बरती गई है। क्योंकि, इलेक्ट्रिकल का ठेके के लिए चार निजी एजेंसियों ने ई-टेंडर भरा था। इनमें से सबसे कम खर्च में गीता जयंती का टेंपरेरी इलेक्ट्रिकल वर्क करने वाली एजेंसी को दरकिनार कर करनाल की ऐसी निजी एजेंसी को ठेका दिया गया, जिसने उसी कार्य के लिए 13 लाख रुपये अधिक का कुटेशन दिया था।
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अमर उजाला की खबर का है असर : यादव
हेमंत इलेक्ट्रिकल वर्क्स के मालिक हेमंत यादव ने अमर उजाला का आभार प्रकट करते हुए कहा कि गीता जयंती में इलेक्ट्रिकल वर्क का टेंडर तीन अक्तूबर 2017 को खोला गया था। उनके सहित इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए कुल चार फर्मों ने टेंडर भरा था। यादव का यह भी आरोप था कि इनमें से एक फर्म फर्जी थी। क्योंकि, तीन एजेंसियां इलेक्ट्रिकल की थी, वहीं एक एजेंसी कंस्ट्रक्शन लाइन की भी थी। यादव के मुताबिक यह टेंडर केवल खानापूर्ति के लिए था। उनका कहना है कि अमर उजाला माई सिटी में टेंडर वितरण में बरती गई लापरवाही का खुलासा होने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और अब टेंडर रद कर गीता जयंती के इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए री टेंडर किया जाएगा।
यह है पूरा मामला
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने चार फर्मों के टेंडर ऑन लाइन रिसीव किए थे। इनमें यादव इलेक्ट्रिकल वर्कर्स का सबसे कम रेट 24 लाख 80 हजार था। यादव का कहना है कि शर्त यह रखी गई कि जो फर्म ठेका लेगी, उसे सरकारी काम का अनुभव होना चाहिए। उनकी फर्म कई बार सरकारी कामों का ठेका ले चुकी हैं। इनमें चार बार गीता जयंती का ठेका भी शामिल है। एक बार कपाल मोचन मेला और दो बार फल्गु मेले में भी उनकी फर्म ने काम किया है। इस बार एक नियम यह भी था कि जो फर्म ठेका लेगी, उसका सालाना टर्न ओवर 50 लाख रुपये होना चाहिए। इस नियम के चलते सबसे कम कुटेशन देने वाली फर्म यादव इलेक्ट्रिकल को ठेका नहीं मिला। यादव का कहना है कि उन्होंने सारे डाक्यूटमेंट ई-टेंडरिंग के जरिए आनलाइन दे दिए थे। लेकिन, कुटेशन लिफाफे में थे। इस लिफाफे में सिर्फ रेट होता है। जब ई-टेंडरिंग के जरिये सभी डाक्यूमेंट आन लाइन दे दिए थे। उसमें टर्न ओवर की जानकारी केडीबी की टेंडर कमेटी को मिल चुकी थी, तो कुटेशन का लिफाफा क्यों खोला गया।
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कुरुक्षेत्र।
ये हैं टेंडर का खेल। जिस टेंडर को खुलने के बाद ठेका देने में एक माह का वक्त लगा, उसे इंटरनेशनल गीता जयंती फेस्टिवल से चंद दिन पहले रद कर री-टेंडर किया जाएगा। अब आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया गीता जयंती से चंद दिन पहले अपनाई जाएगी। यह प्रक्रिया दो महीने से क्यों नहीं की गई। यह सवाल टेंडर भरने वाली एजेंसी कर रही हैं।
बता दें कि अमर उजाला ने दो नवंबर 2017 को गीता जयंती के टेंडर में गड़बड़झाला, भेदभाव और सिफारिश का आरोप और 24 लाख की जगह 37 लाख वाले को दिया गया बिजली का ठेका... शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले को उजागर करने के साथ उस आरोप को भी प्रकाश में लाया गया था। इसमें कुरुक्षेत्र की एक फर्म का आरोप आरोप था कि विजय इलेक्ट्रिकल को यह ठेका 13 लाख रुपये ज्यादा में दिया गया था। माई सिटी में इस मामले के उजागर होने के बाद इस ठेके के री-टेंडर की प्रक्रिया उच्च अधिकारियों ने शुरू कर दी। इसकी पुष्टि इंटरनेशनल गीता जयंती के आयोजक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की चीफ एग्जीक्यूटिव आफिसर पूजा चांवरिया ने की है। प्रबंधन में लापरवाही का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि ठीक 12 दिन बाद इंटरनेशनल गीता जयंती महोत्सव शुरू होने जा रहा है। अब 13 दिन पहले टेंडर रद हो रहे हैं। अभी टेंडर करने में ही कम से कम पांच-छह दिन लगे जाएंगे। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी। पता यह भी चला है कि इसके अलावा और फ्लावर डेकोरेशन और अन्य एक टेंडर सहित कुल तीन री टेंडर किये जा रहे हैं।
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टेंपरेरी इलेक्टीफिकेशन के लिए इन्होंने भरा टेंडर
यादव इलेक्ट्रिकल वर्कर्स (24 लाख 79 हजार 600)
नरेंद्रा इलेक्ट्रिक वर्कर्स (26 लाख 500)
विजय इलेक्ट्रिक वर्कर्स (37 लाख 38 हजार 812)
एसपी कंस्ट्रक्शन (46 लाख लाख 37 हजार 610)
ठेका दिया 13 लाख ज्यादा बोली लगाने वाली एजेंसी को
ठेका दिए जाने के बाद सामने आया कि कहीं न कहीं ठेका देने में अनियमितता बरती गई है। क्योंकि, इलेक्ट्रिकल का ठेके के लिए चार निजी एजेंसियों ने ई-टेंडर भरा था। इनमें से सबसे कम खर्च में गीता जयंती का टेंपरेरी इलेक्ट्रिकल वर्क करने वाली एजेंसी को दरकिनार कर करनाल की ऐसी निजी एजेंसी को ठेका दिया गया, जिसने उसी कार्य के लिए 13 लाख रुपये अधिक का कुटेशन दिया था।
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अमर उजाला की खबर का है असर : यादव
हेमंत इलेक्ट्रिकल वर्क्स के मालिक हेमंत यादव ने अमर उजाला का आभार प्रकट करते हुए कहा कि गीता जयंती में इलेक्ट्रिकल वर्क का टेंडर तीन अक्तूबर 2017 को खोला गया था। उनके सहित इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए कुल चार फर्मों ने टेंडर भरा था। यादव का यह भी आरोप था कि इनमें से एक फर्म फर्जी थी। क्योंकि, तीन एजेंसियां इलेक्ट्रिकल की थी, वहीं एक एजेंसी कंस्ट्रक्शन लाइन की भी थी। यादव के मुताबिक यह टेंडर केवल खानापूर्ति के लिए था। उनका कहना है कि अमर उजाला माई सिटी में टेंडर वितरण में बरती गई लापरवाही का खुलासा होने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और अब टेंडर रद कर गीता जयंती के इलेक्ट्रिकल वर्क के लिए री टेंडर किया जाएगा।
यह है पूरा मामला
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने चार फर्मों के टेंडर ऑन लाइन रिसीव किए थे। इनमें यादव इलेक्ट्रिकल वर्कर्स का सबसे कम रेट 24 लाख 80 हजार था। यादव का कहना है कि शर्त यह रखी गई कि जो फर्म ठेका लेगी, उसे सरकारी काम का अनुभव होना चाहिए। उनकी फर्म कई बार सरकारी कामों का ठेका ले चुकी हैं। इनमें चार बार गीता जयंती का ठेका भी शामिल है। एक बार कपाल मोचन मेला और दो बार फल्गु मेले में भी उनकी फर्म ने काम किया है। इस बार एक नियम यह भी था कि जो फर्म ठेका लेगी, उसका सालाना टर्न ओवर 50 लाख रुपये होना चाहिए। इस नियम के चलते सबसे कम कुटेशन देने वाली फर्म यादव इलेक्ट्रिकल को ठेका नहीं मिला। यादव का कहना है कि उन्होंने सारे डाक्यूटमेंट ई-टेंडरिंग के जरिए आनलाइन दे दिए थे। लेकिन, कुटेशन लिफाफे में थे। इस लिफाफे में सिर्फ रेट होता है। जब ई-टेंडरिंग के जरिये सभी डाक्यूमेंट आन लाइन दे दिए थे। उसमें टर्न ओवर की जानकारी केडीबी की टेंडर कमेटी को मिल चुकी थी, तो कुटेशन का लिफाफा क्यों खोला गया।