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0000सजा की चाहत पूरी,मगर दहशत से उड़ा है चेहरे का रंग 00
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:51 AM IST
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डेरा प्रमुख के जेल में जाने की चाहत पूरी पर दहशत से उड़ा चेहरों का रंग
-डेरे की पूर्व साध्वी के परिवार को मिली थी अनेक बार धमकियां
धमकियों से नहीं डिगे तो 15 साल में कई बार दिया प्रलोभन
-डेरे की धमकियों से दुखी होकर कटवाया था बीएसएनएल का फोन कनेक्शन
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
डेरा प्रमुख को सलाखों के पीछे देखने की चाहत तो पूरी हुई पर दहशत का आलम ये है कि कुरुक्षेत्र निवासी एक परिवार के चेहरों का रंग सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद से उड़ा हुआ है। यह परिवार है, डेरा सच्चा सौदा की उस पूर्व साध्वी का है, जो 15 साल पहले डेरे की हकीकत जानने के बाद मुखर हुई थीं।
पिछले डेढ़ दशक से डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के प्रभाव को जानने समझने के बावजूद न्याय पाने के लिए पूर्व साध्वी के परिवार ने न जाने कितनी चौखटों पर जाकर दस्तक दी। इनमें कई जगह इस परिवार के सदस्यों को घोर निराशा मिली तो कई जगह उन्हें आशा की नई किरण भी दिखी। साध्वी के परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्हें कई बार तोड़ने का प्रयास हुुआ। उन्हें धमकियां दी गईं और इसके बाद भी जब वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए तो प्रलोभन देकर उन्हें केस से पीछे हटने को कहा गया। डेरे की पूर्व साध्वी के परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह सब कुछ डेरा प्रमुख के इशारे पर हो रहा था। टेलीफोन पर उन्हें पूरे परिवार सहित जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। इससे परेशान होकर उन्होंने अपना बीएसएनएल का फोन कनेक्शन कटवा दिया। इसके बाद भी धमकियों का सिलसिला नहीं रुका और एक मर्तबा बंदूकों से लैस डेरे के कुछ लोग उनके फार्म पर भी आये थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार उन्होंने इन धमकियों के बाद साफ कह दिया था चाहे सभी को मौत के घाट उतार दो, लेकिन वे कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
भारी भरकम राशि और बच्चों को सरकारी नौकरी का दिया था लालच
अपने प्रभाव के बावजूद डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख जानते थे कि अगर कानून का डंडा चल गया तो कभी ना कभी वे शिकंजे में फंस सकते हैं। इसी डर से जब उनका परिवार धमकियों के बावजूद टस से मस नहीं हुआ तो डेरे की ओर से भारी भरकम राशि देने के अलावा इनके परिवार के बच्चों को सरकारी नौकरी में उच्च पद दिलाने का लालच दिया गया। डेरा से पीड़ित इस परिवार एक सदस्य ने बताया कि उनके रिश्तेदारों को भी लालच दिये गए,ताकि वे डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ किए गए केस को वापस कराने में दबाव बना सकें।
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गुमनाम, मगर मिसाल योग्य है कुरुक्षेत्र का ये परिवार
कुरुक्षेत्र की एक कॉलोनी में रह रही डेरा सच्चा सौदा की पूर्व साध्वी और इनके परिवार को भले इस नाते कोई नहीं जानता हो, मगर बड़े जमींदार घराने से ताल्लुक रखनी वाली उक्त महिला के परिवार ने न्याय की आस में जो कानूनी जंग लड़ी, वो एक बड़ी मिसाल के योग्य है। उनका टकराव उस प्रभावशाली डेरे के महंत के खिलाफ था, जिसके आगे कई सरकारें और राजनीतिक दल घुटनों के बल चलते रहे। आज अमर उजाला ने जब उनके परिवार के सदस्यों से बात की तो उनकी बातचीत में यह साफ झलक देखी गई कि वे किस तरह अब भी भय के साये में जी रहे हैं। किसी भी तरह के खतरे को भांपते हुए इन्होंने अपनी फोटो और पहचान देने से इनकार किया है।
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-डेरे की पूर्व साध्वी के परिवार को मिली थी अनेक बार धमकियां
धमकियों से नहीं डिगे तो 15 साल में कई बार दिया प्रलोभन
-डेरे की धमकियों से दुखी होकर कटवाया था बीएसएनएल का फोन कनेक्शन
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र।
डेरा प्रमुख को सलाखों के पीछे देखने की चाहत तो पूरी हुई पर दहशत का आलम ये है कि कुरुक्षेत्र निवासी एक परिवार के चेहरों का रंग सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद से उड़ा हुआ है। यह परिवार है, डेरा सच्चा सौदा की उस पूर्व साध्वी का है, जो 15 साल पहले डेरे की हकीकत जानने के बाद मुखर हुई थीं।
पिछले डेढ़ दशक से डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम के प्रभाव को जानने समझने के बावजूद न्याय पाने के लिए पूर्व साध्वी के परिवार ने न जाने कितनी चौखटों पर जाकर दस्तक दी। इनमें कई जगह इस परिवार के सदस्यों को घोर निराशा मिली तो कई जगह उन्हें आशा की नई किरण भी दिखी। साध्वी के परिवार के सदस्यों का कहना है कि उन्हें कई बार तोड़ने का प्रयास हुुआ। उन्हें धमकियां दी गईं और इसके बाद भी जब वे अपने इरादे से टस से मस नहीं हुए तो प्रलोभन देकर उन्हें केस से पीछे हटने को कहा गया। डेरे की पूर्व साध्वी के परिवार के सदस्यों का कहना है कि यह सब कुछ डेरा प्रमुख के इशारे पर हो रहा था। टेलीफोन पर उन्हें पूरे परिवार सहित जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। इससे परेशान होकर उन्होंने अपना बीएसएनएल का फोन कनेक्शन कटवा दिया। इसके बाद भी धमकियों का सिलसिला नहीं रुका और एक मर्तबा बंदूकों से लैस डेरे के कुछ लोग उनके फार्म पर भी आये थे। परिवार के सदस्यों के अनुसार उन्होंने इन धमकियों के बाद साफ कह दिया था चाहे सभी को मौत के घाट उतार दो, लेकिन वे कानूनी लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
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भारी भरकम राशि और बच्चों को सरकारी नौकरी का दिया था लालच
अपने प्रभाव के बावजूद डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख जानते थे कि अगर कानून का डंडा चल गया तो कभी ना कभी वे शिकंजे में फंस सकते हैं। इसी डर से जब उनका परिवार धमकियों के बावजूद टस से मस नहीं हुआ तो डेरे की ओर से भारी भरकम राशि देने के अलावा इनके परिवार के बच्चों को सरकारी नौकरी में उच्च पद दिलाने का लालच दिया गया। डेरा से पीड़ित इस परिवार एक सदस्य ने बताया कि उनके रिश्तेदारों को भी लालच दिये गए,ताकि वे डेरा सच्चा सौदा के खिलाफ किए गए केस को वापस कराने में दबाव बना सकें।
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गुमनाम, मगर मिसाल योग्य है कुरुक्षेत्र का ये परिवार
कुरुक्षेत्र की एक कॉलोनी में रह रही डेरा सच्चा सौदा की पूर्व साध्वी और इनके परिवार को भले इस नाते कोई नहीं जानता हो, मगर बड़े जमींदार घराने से ताल्लुक रखनी वाली उक्त महिला के परिवार ने न्याय की आस में जो कानूनी जंग लड़ी, वो एक बड़ी मिसाल के योग्य है। उनका टकराव उस प्रभावशाली डेरे के महंत के खिलाफ था, जिसके आगे कई सरकारें और राजनीतिक दल घुटनों के बल चलते रहे। आज अमर उजाला ने जब उनके परिवार के सदस्यों से बात की तो उनकी बातचीत में यह साफ झलक देखी गई कि वे किस तरह अब भी भय के साये में जी रहे हैं। किसी भी तरह के खतरे को भांपते हुए इन्होंने अपनी फोटो और पहचान देने से इनकार किया है।