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केयू प्रशासन ने कर्मचारियों से की हड़ताल पर न जाने की अपील
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:35 AM IST
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आठ माह में तीसरी बार लंबी हड़ताल के रास्ते पर ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी की मैनपावर
- कुंटिया ने फूंका बिगुल, आज से केयू के 1350 कर्मी रहेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
- केयू प्रशासन ने छह माह में दूसरी बार दिया नो वर्क नो पे का आदेश
- डिमांड चार्टर पर कुंटिया की वीसी से बातचीत फेल, एक्टिव मेंबरों की बैठक में हड़ताल का ऐलान
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी की मैनपावर आठ माह में तीसरी बार लंबी हड़ताल के रास्ते पर है। बुधवार से केयू में नो वर्क नो पे के आदेशों को दरकिनार कर कुंटिया ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस साल में यह दूसरा मौका है जब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गैर शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) की अनिश्चितकालीन को खत्म कराने के लिये केयू प्रशासन को नो वर्क नो पे का आदेश जारी करना पड़ा है।
बता दें कि मंगलवार शाम को सवा तीन से सवा चार बजे के बीच केयू के कुलपति डा.कैलाश चंद्र शर्मा और कुंटिया के प्रतिनिधियों में हुई बातचीत के दौरान डिमांड चार्टर पर कोई सहमति नहीं बनी,जिसके बाद सवा चार से सवा पांच बजे तक कुंटिया कार्यालय में अध्यक्ष रामकुमार गुर्जर और महासचिव नीलकंठ शर्मा ने सक्रिय सदस्यों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुंटिया के करीब 90 सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान वीसी के साथ हुई बातचीत और डिमांड पूरी न होने संबंधित सदस्यों को अवगत कराया गया,जिसके बाद बुधवार से हड़ताल का निर्णय लिया गया। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा ने बैठक के बाद अमर उजाला को बताया कि सैक्षणिक योग्यता को पूरा किये बगैर पदोन्नति देने से केयू कुलपति ने साफ इंकार कर दिया है। इसके अलावा 2016 से बकाया सातवें वेतन आयोग का एरियर व अन्य मांगों पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। लिहाजा मजबूर होकर कुंटिया को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिये विवश होना पड़ा है। इधर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी गैर-शिक्षक कर्मचारियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की है। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल पर न जाएं। हड़ताल विश्वविद्यालय के हित में नहीं है। कर्मचारियों की सभी जायज मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले से ही मान ली हैं। बार-बार हड़ताल करने से विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी जायज मांग पर हमेशा बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी है कि नियमों के विपरीत विश्वविद्यालय किसी भी मांग को स्वीकार नहीं करेगा। अगर कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहते हैं तो विश्वविद्यालय में नो वर्क नो पे लागू रहेगा। खैर,इन आदेशों को दरकिनार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल बज चुका है और बुधवार से केयू का कामकाज प्रभावित होना लाजिमी है। इसका सबसे बड़ा असर देशभर से केयू में काम के लिये आने वाले व रोजाना के कामकाज पर भी पड़ेगा।
इन मांगों के पूरा ना होने पर बजा हड़ताल का बिगुल
केयू प्रशासन का कहना है कि सातवें आयोग का एरियर देने की मांग तब तक पूरी नहीं हो सकती,जब तक सरकार से 100 करोड़ की ग्रांट नहीं मिलती। लंबे समय से इस ग्रांट के अटके होने से एरियर का मामला फंसा है। कुंटिया की यह भी मांग है कि चतुर्थ कर्मियों को आगे प्रमोट किया जाए, लेकिन केयू प्रशासन का दो टूक कहना है कि जब तक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होती, पदोन्नति नहीं मिलेगी। कुंटिया की मांगों में बगैर शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के एआर और डीआर प्रमोट करने की भी मांग शामिल है, जबकि इस मांग के अलावा सेल्फ फाइनेंस के लिपिकों की पदोन्नति, बगैर लाइपिंग टेस्ट के करने की मांग भी कुंटिया ने वीसी के समक्ष रखी थी, लेकिन वीसी ने शैक्षणिक योग्यता, दक्षता और अनुभव के बगैर इन मांगों को पूरा करने से फिलहाल साफ इंकार कर दिया है।
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बगैर सैक्षणिक योग्यता के जिन्हें प्रमोशन दी उन्हें अब वित्तीय लाभ
इसी वर्ष कुंटिया की हड़ताल के बाद केयू प्रशासन ने तीन माह पहले बगैर शैक्षणिक योग्यता के केयू गैर शिक्षक कर्मचारियों को एआर और डीआर प्रमोट किया था। लेकिन तब यह प्रमोशन बिना वित्तीय लाभ के की गई थी। केयू प्रशासन ने शैक्षणिक योग्यता पूरा करने के बाद पदोन्नति का वित्तीय लाभ देने की शर्त रखी थी, मगर अब कुंटिया ने इस शर्त के साथ प्रमोशन ले चुके एआर और डीआर को वित्तीय लाभ देेने की भी मांग रख दी है।
इन नियमों को हटाने की भी है मांग
नियमानुसार एआर और डीआर की पदोन्नति के लिए एमए में 55 प्रतिशत अंक होने चाहिये। वहीं कुंटिया ने मांग रखी है कि.जिसके एमएम में 55 प्रतिशत अंक नहीं है,उनके अलावा जो पोस्ट ग्रेजुएट भी नहीं है, उन्हें भी एआर और डीआर पद पर प्रमोशन दिया जाये। अब केयू द्वारा कुंटिया की इन मांगों को भी अगले दिनों में पूरा किया जाएगा या नहीं,इसके लिये कुंटिया ने संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
मार्च 2018 को भी दी जा चुकी है चेतावनी
इससे पहले इसी वर्ष मार्च में भी गैर शिक्षक कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर केयू प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया था। तब केयू प्रशासन ने कर्मचारियों से हड़ताल छोड़कर काम पर लौटने की अपील की थी। साथ ही हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को पत्र देकर चेतावनी भी दे दी कि यदि हड़ताल खत्म नहीं की, तो 6 मार्च 2018 से विश्वविद्यालय में नो वर्क नो पे सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय में कार्यकारिणी परिषद के निर्णय के अनुसार यह कदम उठाया जाएगा। इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों और शाखा अधिकारियों को पत्र जारी कर सूचित किया गया था।
दो बार सिर्फ आश्वासन पर खत्म हो चुकी है हड़ताल-कक्कड़
कुंटिया के पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़ ने केयू प्रशासन पर आरोप लगाया कि सैक्षणिक योग्यता ना होने के कारण वरिष्ठताक्रम को तोड़कर प्रमोशन की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस साल दो बार कुंटिया हड़ताल पर बैठ चुकी है,लेकिन तमाम विरोध के बावजूद सिर्फ आश्वासन पर ही हड़ताल को खत्म करा दिया गया,जबकि हड़ताल खत्म करने से पहले केयू प्रशासन से लिखित में आश्वासन लेना चाहिये था। उन्होंने कहा कि कुंटिया की एकता कायम है और बुधवार से सभी एकजुट होकर 100प्रतिशत इस हड़ताल को सफल बनाएंगे।
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- कुंटिया ने फूंका बिगुल, आज से केयू के 1350 कर्मी रहेंगे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर
- केयू प्रशासन ने छह माह में दूसरी बार दिया नो वर्क नो पे का आदेश
- डिमांड चार्टर पर कुंटिया की वीसी से बातचीत फेल, एक्टिव मेंबरों की बैठक में हड़ताल का ऐलान
राजेश शांडिल्य
कुरुक्षेत्र। ए प्लस ग्रेड यूनिवर्सिटी की मैनपावर आठ माह में तीसरी बार लंबी हड़ताल के रास्ते पर है। बुधवार से केयू में नो वर्क नो पे के आदेशों को दरकिनार कर कुंटिया ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। इस साल में यह दूसरा मौका है जब कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय गैर शिक्षक कर्मचारी संघ (कुंटिया) की अनिश्चितकालीन को खत्म कराने के लिये केयू प्रशासन को नो वर्क नो पे का आदेश जारी करना पड़ा है।
बता दें कि मंगलवार शाम को सवा तीन से सवा चार बजे के बीच केयू के कुलपति डा.कैलाश चंद्र शर्मा और कुंटिया के प्रतिनिधियों में हुई बातचीत के दौरान डिमांड चार्टर पर कोई सहमति नहीं बनी,जिसके बाद सवा चार से सवा पांच बजे तक कुंटिया कार्यालय में अध्यक्ष रामकुमार गुर्जर और महासचिव नीलकंठ शर्मा ने सक्रिय सदस्यों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में कुंटिया के करीब 90 सक्रिय सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान वीसी के साथ हुई बातचीत और डिमांड पूरी न होने संबंधित सदस्यों को अवगत कराया गया,जिसके बाद बुधवार से हड़ताल का निर्णय लिया गया। कुंटिया महासचिव नीलकंठ शर्मा ने बैठक के बाद अमर उजाला को बताया कि सैक्षणिक योग्यता को पूरा किये बगैर पदोन्नति देने से केयू कुलपति ने साफ इंकार कर दिया है। इसके अलावा 2016 से बकाया सातवें वेतन आयोग का एरियर व अन्य मांगों पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। लिहाजा मजबूर होकर कुंटिया को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिये विवश होना पड़ा है। इधर कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी गैर-शिक्षक कर्मचारियों से हड़ताल पर न जाने की अपील की है। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नीता खन्ना ने सभी कर्मचारियों से अपील की है कि वे हड़ताल पर न जाएं। हड़ताल विश्वविद्यालय के हित में नहीं है। कर्मचारियों की सभी जायज मांगे विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले से ही मान ली हैं। बार-बार हड़ताल करने से विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुंचती है। विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी जायज मांग पर हमेशा बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी है कि नियमों के विपरीत विश्वविद्यालय किसी भी मांग को स्वीकार नहीं करेगा। अगर कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहते हैं तो विश्वविद्यालय में नो वर्क नो पे लागू रहेगा। खैर,इन आदेशों को दरकिनार करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल बज चुका है और बुधवार से केयू का कामकाज प्रभावित होना लाजिमी है। इसका सबसे बड़ा असर देशभर से केयू में काम के लिये आने वाले व रोजाना के कामकाज पर भी पड़ेगा।
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इन मांगों के पूरा ना होने पर बजा हड़ताल का बिगुल
केयू प्रशासन का कहना है कि सातवें आयोग का एरियर देने की मांग तब तक पूरी नहीं हो सकती,जब तक सरकार से 100 करोड़ की ग्रांट नहीं मिलती। लंबे समय से इस ग्रांट के अटके होने से एरियर का मामला फंसा है। कुंटिया की यह भी मांग है कि चतुर्थ कर्मियों को आगे प्रमोट किया जाए, लेकिन केयू प्रशासन का दो टूक कहना है कि जब तक शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं होती, पदोन्नति नहीं मिलेगी। कुंटिया की मांगों में बगैर शैक्षणिक योग्यता और अनुभव के एआर और डीआर प्रमोट करने की भी मांग शामिल है, जबकि इस मांग के अलावा सेल्फ फाइनेंस के लिपिकों की पदोन्नति, बगैर लाइपिंग टेस्ट के करने की मांग भी कुंटिया ने वीसी के समक्ष रखी थी, लेकिन वीसी ने शैक्षणिक योग्यता, दक्षता और अनुभव के बगैर इन मांगों को पूरा करने से फिलहाल साफ इंकार कर दिया है।
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बगैर सैक्षणिक योग्यता के जिन्हें प्रमोशन दी उन्हें अब वित्तीय लाभ
इसी वर्ष कुंटिया की हड़ताल के बाद केयू प्रशासन ने तीन माह पहले बगैर शैक्षणिक योग्यता के केयू गैर शिक्षक कर्मचारियों को एआर और डीआर प्रमोट किया था। लेकिन तब यह प्रमोशन बिना वित्तीय लाभ के की गई थी। केयू प्रशासन ने शैक्षणिक योग्यता पूरा करने के बाद पदोन्नति का वित्तीय लाभ देने की शर्त रखी थी, मगर अब कुंटिया ने इस शर्त के साथ प्रमोशन ले चुके एआर और डीआर को वित्तीय लाभ देेने की भी मांग रख दी है।
इन नियमों को हटाने की भी है मांग
नियमानुसार एआर और डीआर की पदोन्नति के लिए एमए में 55 प्रतिशत अंक होने चाहिये। वहीं कुंटिया ने मांग रखी है कि.जिसके एमएम में 55 प्रतिशत अंक नहीं है,उनके अलावा जो पोस्ट ग्रेजुएट भी नहीं है, उन्हें भी एआर और डीआर पद पर प्रमोशन दिया जाये। अब केयू द्वारा कुंटिया की इन मांगों को भी अगले दिनों में पूरा किया जाएगा या नहीं,इसके लिये कुंटिया ने संघर्ष का ऐलान कर दिया है।
मार्च 2018 को भी दी जा चुकी है चेतावनी
इससे पहले इसी वर्ष मार्च में भी गैर शिक्षक कर्मचारियों की हड़ताल को लेकर केयू प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया था। तब केयू प्रशासन ने कर्मचारियों से हड़ताल छोड़कर काम पर लौटने की अपील की थी। साथ ही हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को पत्र देकर चेतावनी भी दे दी कि यदि हड़ताल खत्म नहीं की, तो 6 मार्च 2018 से विश्वविद्यालय में नो वर्क नो पे सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। विश्वविद्यालय में कार्यकारिणी परिषद के निर्णय के अनुसार यह कदम उठाया जाएगा। इस संबंध में सभी विभागाध्यक्षों और शाखा अधिकारियों को पत्र जारी कर सूचित किया गया था।
दो बार सिर्फ आश्वासन पर खत्म हो चुकी है हड़ताल-कक्कड़
कुंटिया के पूर्व प्रधान सुनील कक्कड़ ने केयू प्रशासन पर आरोप लगाया कि सैक्षणिक योग्यता ना होने के कारण वरिष्ठताक्रम को तोड़कर प्रमोशन की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस साल दो बार कुंटिया हड़ताल पर बैठ चुकी है,लेकिन तमाम विरोध के बावजूद सिर्फ आश्वासन पर ही हड़ताल को खत्म करा दिया गया,जबकि हड़ताल खत्म करने से पहले केयू प्रशासन से लिखित में आश्वासन लेना चाहिये था। उन्होंने कहा कि कुंटिया की एकता कायम है और बुधवार से सभी एकजुट होकर 100प्रतिशत इस हड़ताल को सफल बनाएंगे।