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अद्भुत धारणा के स्वामी रहे हैं गुरु नानक देव : भाई मंगप्रीत सिंह
Updated Sun, 05 Nov 2017 12:11 AM IST
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फोटो न. 14-15
अद्भुत धारणा के स्वामी रहे हैं गुरु नानक देव : भाई मंगप्रीत सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
धर्मनगरी के ऐतिहासिक छठी पातशाही गुरुद्वारा सहित जिलेभर में श्रीगुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर धार्मिक समागम के साथ लंगर भी आयोजित किया गया। छठी पातशाही में सिख मिशन हरियाणा प्रभारी और प्रसिद्ध कथावाचक भाई मंगप्रीत सिंह ने कहा कि श्रीगुरु नानक देव बचपन से ही अद्भुत धारणा के स्वामी रहे। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण गुरु साहिब की जीवनी में मिलता है।
उन्होंने न केवल अबला समझी जाने वाली महिला को सम्मान देने का संदेश दिया, बल्कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी अलख जगाई। भाई मंगप्रीत सिंह गुरु नानक देव के प्रकाश उत्सव पर उमड़ी संगत से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्रीअमृतसर के मेंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना, धर्म प्रचार कमेटी के मेंबर तजिंदरपाल सिंह, सब ऑफिस प्रभारी परमजीत सिंह दुनियामाजरा, शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान जरनैल सिंह बोढी, मैनेजर अमरिंदर सिंह, प्रताप सिंह, जज सिंह, हैप्पी बुट्टर आदि ने भी श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाया।
भाई मंगप्रीत सिंह ने कहा कि जब गुरु साहिब ने जन्म लिया, तो उस समय समाज में अराजकता फैली थी। बचपन में ही गुरु साहिब ने अपनी आध्यात्मिकता से दूसरों का मार्गदर्शन करना आरंभ कर दिया था। विश्व भ्रमण के दौरान गुरु साहिब ने ज्ञान का प्रकाश फैलाया और सामाजिक बुराइयों क ेसाथ ही अंध विश्वास को मिटाने का प्रयास किया। समागम में धर्म प्रचार कमेटी के ढाडी जत्थे भाई शमशेर सिंह ने भी गुरु इतिहास और गुरमत विचारों से संगत को जोड़ा। कार्यक्रम में धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य तजिंदरपाल सिंह ने कहा कि हमें अमृतपान कर गुरु सिख बनना चाहिए। हर समस्या का समाधान हमें गुरबाणी से मिलता है। बस जरूरत है गुरबाणी के मार्गदर्शन को अपनाने की। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव ने ऊंच-नीच के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। सिख कौम के गुरु साहिबान ने भी पक्षपात और भेदभाव की नीति का विरोध किया। इसलिए हम सब को गुरु साहिबान की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए और अपने बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। समागम में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई बलविंदर सिंह और मलविंदर सिंह ने शबद कीर्तन किया। रागी जत्थों ने गुरु साहिब की रूहानियत की महिमा का गुणगान किया।
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बॉक्स
सबसे पहले श्री गुरु नानक देव जी ने दिया नारी को सम्मान
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के मैंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना ने श्री गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाशोत्सव की बधाई देते हुए संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी महाराज ने जीवन भर लोक कल्याण और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर अभियान चलाए हुए हैं। मगर श्री गुरु नानक देव जी महाराज ने विश्व में सबसे पहले नारी को स मान देने का संदेश दिया था। उन्होंने महिलाओं का सत्कार के लिए प्रेरित करते हुए कहा था कि सो क्यों मंदा आखिये, जित्त ज मै राजान...। गुरु साहिब की शिक्षा को मानते हुए हम सब को बेटियों को उचित मान-सम्मान देकर उन्हें उच्च शिक्षा देनी चाहिए, ताकि भविष्य में वे स्वावलंबी बन कर देश विकास में अहम भूमिका निभा सकें।
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अद्भुत धारणा के स्वामी रहे हैं गुरु नानक देव : भाई मंगप्रीत सिंह
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
धर्मनगरी के ऐतिहासिक छठी पातशाही गुरुद्वारा सहित जिलेभर में श्रीगुरुनानक देव का प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर धार्मिक समागम के साथ लंगर भी आयोजित किया गया। छठी पातशाही में सिख मिशन हरियाणा प्रभारी और प्रसिद्ध कथावाचक भाई मंगप्रीत सिंह ने कहा कि श्रीगुरु नानक देव बचपन से ही अद्भुत धारणा के स्वामी रहे। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण गुरु साहिब की जीवनी में मिलता है।
उन्होंने न केवल अबला समझी जाने वाली महिला को सम्मान देने का संदेश दिया, बल्कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी अलख जगाई। भाई मंगप्रीत सिंह गुरु नानक देव के प्रकाश उत्सव पर उमड़ी संगत से रूबरू हो रहे थे। इस दौरान शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्रीअमृतसर के मेंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना, धर्म प्रचार कमेटी के मेंबर तजिंदरपाल सिंह, सब ऑफिस प्रभारी परमजीत सिंह दुनियामाजरा, शिरोमणि अकाली दल के जिला प्रधान जरनैल सिंह बोढी, मैनेजर अमरिंदर सिंह, प्रताप सिंह, जज सिंह, हैप्पी बुट्टर आदि ने भी श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के समक्ष शीश नवाया।
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भाई मंगप्रीत सिंह ने कहा कि जब गुरु साहिब ने जन्म लिया, तो उस समय समाज में अराजकता फैली थी। बचपन में ही गुरु साहिब ने अपनी आध्यात्मिकता से दूसरों का मार्गदर्शन करना आरंभ कर दिया था। विश्व भ्रमण के दौरान गुरु साहिब ने ज्ञान का प्रकाश फैलाया और सामाजिक बुराइयों क ेसाथ ही अंध विश्वास को मिटाने का प्रयास किया। समागम में धर्म प्रचार कमेटी के ढाडी जत्थे भाई शमशेर सिंह ने भी गुरु इतिहास और गुरमत विचारों से संगत को जोड़ा। कार्यक्रम में धर्म प्रचार कमेटी के सदस्य तजिंदरपाल सिंह ने कहा कि हमें अमृतपान कर गुरु सिख बनना चाहिए। हर समस्या का समाधान हमें गुरबाणी से मिलता है। बस जरूरत है गुरबाणी के मार्गदर्शन को अपनाने की। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव ने ऊंच-नीच के भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। सिख कौम के गुरु साहिबान ने भी पक्षपात और भेदभाव की नीति का विरोध किया। इसलिए हम सब को गुरु साहिबान की शिक्षाओं को अपनाना चाहिए और अपने बच्चों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। समागम में ऐतिहासिक गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई बलविंदर सिंह और मलविंदर सिंह ने शबद कीर्तन किया। रागी जत्थों ने गुरु साहिब की रूहानियत की महिमा का गुणगान किया।
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शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर के मैंबर जत्थेदार हरभजन सिंह मसाना ने श्री गुरु नानक देव जी महाराज के प्रकाशोत्सव की बधाई देते हुए संगत को गुरु साहिब की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्री गुरु नानक देव जी महाराज ने जीवन भर लोक कल्याण और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर अभियान चलाए हुए हैं। मगर श्री गुरु नानक देव जी महाराज ने विश्व में सबसे पहले नारी को स मान देने का संदेश दिया था। उन्होंने महिलाओं का सत्कार के लिए प्रेरित करते हुए कहा था कि सो क्यों मंदा आखिये, जित्त ज मै राजान...। गुरु साहिब की शिक्षा को मानते हुए हम सब को बेटियों को उचित मान-सम्मान देकर उन्हें उच्च शिक्षा देनी चाहिए, ताकि भविष्य में वे स्वावलंबी बन कर देश विकास में अहम भूमिका निभा सकें।