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Karnal News: असंतुलित खानपान से गठिया की चपेट में युवा
Sat, 12 Oct 2024 05:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 12 Oct 2024 05:39 AM IST
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अनुज शर्मा
करनाल। असंतुलित खानपान युवाओं को गठिया बीमारी की ओर लेकर जा रहा है। व्यायाम से दूरी और अत्यधिक तला हुआ भोजन के सेवन से युवाओं में मोटापा बढ़ता जा रहा है।
इससे शरीर का सारा वजन उनके घुटनों और शरीर के प्रत्येक जोड़ पर पड़ रहा है। ऐसे में युवा गठिया रोग का शिकार हो रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 250 मरीज पहुंचे रहे हैं, इनमें 75 युवा शामिल हैं।
हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक दुआ ने बताया कि गठिया रोग ज्यादातर 50 साल की उम्र के बाद होता था, लेकिन आज बदलती जीवनशैली की वजह से यह रोग 35 साल तक के युवाओं में भी देखा जा रहा है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है, खासतौर से वे जिनका वजन ज्यादा है।
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इसकी शुरूआत शरीर के किसी भी जोड़ से हो सकती है और समय के साथ-साथ यह शरीर के बाकी जोड़ों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि शरीर में जोड़ों को नर्म और लचीला बनाए रखने के लिए जोड़ों के बीच में कार्टिलेज होता है। जो जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। जब ये कम होने लगता है तो हड्डियों के जोड़ों पर दबाव पड़ने लगता है। जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या पैदा होती है।
डॉ. कार्तिक दुआ ने बताया कि उनकी ओपीडी में रोजाना आने वाले 250 में से लगभग 65 मरीजों को फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ रही है। वहीं प्रतिमाह उनकी ओपीडी में पांच केस ऐसे आ रहे हैं। जिन मरीजों के पास घुटने बदलवाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऐसा जागरूकता की कमी के कारण हो रहा है। संवाद
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करनाल। असंतुलित खानपान युवाओं को गठिया बीमारी की ओर लेकर जा रहा है। व्यायाम से दूरी और अत्यधिक तला हुआ भोजन के सेवन से युवाओं में मोटापा बढ़ता जा रहा है।
इससे शरीर का सारा वजन उनके घुटनों और शरीर के प्रत्येक जोड़ पर पड़ रहा है। ऐसे में युवा गठिया रोग का शिकार हो रहे हैं। जिला नागरिक अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में 250 मरीज पहुंचे रहे हैं, इनमें 75 युवा शामिल हैं।
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हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कार्तिक दुआ ने बताया कि गठिया रोग ज्यादातर 50 साल की उम्र के बाद होता था, लेकिन आज बदलती जीवनशैली की वजह से यह रोग 35 साल तक के युवाओं में भी देखा जा रहा है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है, खासतौर से वे जिनका वजन ज्यादा है।
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इसकी शुरूआत शरीर के किसी भी जोड़ से हो सकती है और समय के साथ-साथ यह शरीर के बाकी जोड़ों को भी प्रभावित करता है। उन्होंने बताया कि शरीर में जोड़ों को नर्म और लचीला बनाए रखने के लिए जोड़ों के बीच में कार्टिलेज होता है। जो जोड़ों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है। जब ये कम होने लगता है तो हड्डियों के जोड़ों पर दबाव पड़ने लगता है। जिससे जोड़ों में दर्द की समस्या पैदा होती है।
डॉ. कार्तिक दुआ ने बताया कि उनकी ओपीडी में रोजाना आने वाले 250 में से लगभग 65 मरीजों को फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ रही है। वहीं प्रतिमाह उनकी ओपीडी में पांच केस ऐसे आ रहे हैं। जिन मरीजों के पास घुटने बदलवाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। ऐसा जागरूकता की कमी के कारण हो रहा है। संवाद