{"_id":"5e1e29028ebc3e4b6475dd81","slug":"vegetable-rate-increased-karnal-news-knl187044129","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्याज बजट से बाहर हुआ तो तड़का जीरा से सलाद में सेब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्याज बजट से बाहर हुआ तो तड़का जीरा से सलाद में सेब
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कड़कड़ाती ठंड में महंगाई की आग ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। हाल यह है कि 15 लाख की आबादी के लिए जिले के किसानों से सब्जी की खपत पूरी नहीं हो पाती। ऐसे में दूसरे जिलों के अलावा दिल्ली और उत्तर प्रदेश से आने वाली सब्जियों पर मौसम ने ब्रेक सा लगाया हुआ है। डिमांड पूरी न होने से सब्जी के भाव आसमान छू रहे हैं। स्थिति यह है कि सस्ता होने के बाद भी प्याज के भाव 50 रुपये प्रति किलो हैं। मंगलवार को सब्जी मंडी में पहुंचे दंपति ने प्याज न खरीदने के सवाल पर कहा कि, ‘भाई साहब प्याज तो बजट से बाहर हो गया है, अब तड़का जीरे से लगाते हैं और सलाद में सेब लाते हैं।’ वहीं हाउसिंग कालोनी के रणजीत ने बताया कि उसने तो छत पर सब्जी उगाने का फैसला लिया है। इसके लिए पौधे व गमले खरीदने के लिए मार्केट पहुंचा हूं। टमाटर, मटर का भाव पिछले साल की तुलना में इस बार डबल हो गया। गोभी, बंद गोभी चार गुणा पहुंच गई है। इसके अलावा तेल में 10 फीसदी, उदड़ दाल 18 फीसदी और मिर्च में 14 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में महिलाओं के लिए रसोई चलाना मुश्किल हो रहा है।
पीछे से नहीं आ रहा स्टाक
खुदरा व्यापारियों ने मंहगी सब्जियों के बारे में बताया कि जब पीछे से स्टॉक नहीं आ रहा तो उनके पास भी कोई अतिरिक्त साधन नहीं है। थोक विक्रेताओं के पास स्टॉक खत्म होने को हैं।
4000 हेक्टेयर में उगती हैं सब्जियां
मंडी में पहुंची हर सब्जी का उत्पादन जिले में होता है। जिला उद्यान विभाग अधिकारी डॉ. मदन लाल ने बताया कि मौजूदा समय में चार हजार हेक्टेयर में सब्जी का उत्पादन होता है। मौजूदा समय में आलू, टमाटर, गाजर, मटर, गोभी, खीरा उगाया जाता है।
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रसोई को क्या कर रहा है प्रभावित, जानिए....
आलू
20 रुपये प्रति किलो है। पिछले वर्ष से डबल भाव हुआ।
मटर
40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले वर्ष से डबल भाव हुआ।
टमाटर
40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले सप्ताह तक 20 रुपये प्रति किलो भाव था।
प्याज
50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। 100 रुपये भाव होने के बाद 50 पर पहुंचा।
खीरा
40 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल 10 रुपये प्रति किलो बिका था।
शिमला मिर्च
50 रुपये प्रति किलो है। पहले साल 30 रुपये प्रति किलो था।
गोभी
30 रुपये प्रति किलो है। पहले साल से चार गुणा भाव ज्यादा हुआ।
उदड़
90 रुपये प्रति किलो बिक रही है। पिछले महीने 78 रुपये भाव था।
तेल
110 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले महीने 95 रुपये भाव था।
मिर्च
60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इससे पहले 45 रुपये भाव था।
शहर में 10 सब्जी मंडी
शहरवासियों के लिए सात स्थानों पर सब्जी मंडी लगती है। इनमें तीन ऐसे स्थान हैं जहां पर रोजाना सब्जी की बिक्री होती है। इनमें एक तो हाईवे स्थित नई सब्जी मंडी स्थल, दूसरा मुगल कैनाल स्थित सब्जी मंडी और तीसरा रामनगर बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी शामिल है। इसके लिए सात ऐसे स्थान हैं जहां पर अलग-अलग दिनों में मंडी लगती है। रविवार को सेक्टर-12 के ग्राउंड में, वीरवार को सेक्टर-9, शुक्रवार को प्रेम नगर, बुधवार सेक्टर-7 में सब्जी मंडी लगती है।
रसोई को कैसे संभाल रही हैं महिलाएं, सुनिए.....
इस बार गोभी नहीं बनाई
गोभी का भाव काफी ज्यादा है। इस बार दूसरी सब्जी से काम चला रही है। मंडी से गोभी की खरीद नहीं की। गोभी के अलावा भी कई सब्जियां हैं जो मंडी में जाने के बाद बदल देते हैं। -नीलम, गृहणी। (फोटो-12)
पहली बार देखी इतनी महंगाई
साल दर साल महंगाई बढ़ती तो देखी है, लेकिन इतनी महंगाई पहली बार देखी है। ध्यान है कि पिछले साल मटर की कीमत 15 रुपये किलो थी जो अब 40 है। रसोई को संभालना आसान नहीं रहा। -अंजू, गृहणी। (फोटो-13)
सब्जी खरीदना बजट से बाहर
बाजार में सभी सब्जियों के दाम इतने बढ़ चुुके हैं कि समझ नहीं आ रहा है कि कौन सी सब्जी खरीदी जाए। बाजार में थैला लेकर सब्जियां खरीदने आए थे पर यहां तो सब बजट से बाहर है। -पूनम, गृहणी। (फोटो-14)
अब दो दिन में एक बार बनती है सब्जी
बाजार में सब्जी खरीदने आया था। सीजन वाली सब्जियों की बात तो छोड़ो, बाजार में आलू के रेट भी 30 रुपये किलो हो गए हैं। हमारे घर में अब तो सब्जी भी दो दिन में एक बार बनती है। -केला देवी, गृहणी। (फोटो-16)
रेट पूछकर बिना खरीद भी लौट आते हैं
सब्जी के भाव इतने ज्यादा हैं कि कई बार तो मंडी में जाने के बाद रेट पूछकर बिना सब्जी खरीदे ही वापस लौट आते हैं। ऐसा उनके साथ कई बार हुआ है। दूसरा विकल्प भी नहीं होता। -इंदू, गृहणी। (फोटो-17)
सब्जियों की पसंद सपनों में सिमटी
सब्जी मंडी में सब्जियों के रेट काफी हद तक बढ़ चुुके हैं। आम लोगों के लिए तो सिर्फ सपनों में ही उनकी मन पसंदीदा सब्जी बन पाती है। बजट से बाहर निकला नहीं जा सकता। -निर्मला देवी, गृहणी। (फोटो-18)
बढ़ते सब्जी के दामों से परेशान
सब्जियों के बढ़ते दामों से परेशान हो चुके हैं। रोजाना सब्जी के नए नए रेट निकल आते हैं। सब्जी मंडी से लेकर आम रेहड़ी चालक के अलग-अलग रेट हो चुके हैं। पता नहीं कब सुधार होगा। - मंजीत, गृहणी। (फोटो-19)
सरकार ले महंगाई पर संज्ञान
सब्जियों के दाम बढ़ने से आम आदमी परेशान हो चुका है। सबसे ज्यादा मुसीबत गृहणियों के लिए खड़ी हो चुकी है। सरकार को महंगाई के मामले में संज्ञान लेकर कंट्रोल करने के लिए कदम उठाना चाहिए। बचनी देवी, गृहणी। (फोटो-20)
दाल व अन्य विकल्पों की रहती है तलाश
रोजाना एक सब्जी भी नहीं बना सकते और मंहगी सब्जी खरीद नहीं सकते। दाल व अन्य विकल्प को शामिल किया जाता है। ऐसे विकल्पों को तलाश करके रसोई का काम चलाया जा रहा है। - रजनी, गृहणी। (फोटो-21)
किचन में नहीं है सब्जी
किचन में पहले सब्जियों के ढ़ेर लगा करते थे, लेकिन मंहगाई की वजह से इनके दाम अब आसमान छू रहे हैं। अब तो दिन में एक बार ही सब्जी बनानी पड़ती है। कई बार तो सब्जी होती नहीं। -आरती, गृहणी। (फोटो-22)
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पीछे से नहीं आ रहा स्टाक
खुदरा व्यापारियों ने मंहगी सब्जियों के बारे में बताया कि जब पीछे से स्टॉक नहीं आ रहा तो उनके पास भी कोई अतिरिक्त साधन नहीं है। थोक विक्रेताओं के पास स्टॉक खत्म होने को हैं।
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4000 हेक्टेयर में उगती हैं सब्जियां
मंडी में पहुंची हर सब्जी का उत्पादन जिले में होता है। जिला उद्यान विभाग अधिकारी डॉ. मदन लाल ने बताया कि मौजूदा समय में चार हजार हेक्टेयर में सब्जी का उत्पादन होता है। मौजूदा समय में आलू, टमाटर, गाजर, मटर, गोभी, खीरा उगाया जाता है।
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रसोई को क्या कर रहा है प्रभावित, जानिए....
आलू
20 रुपये प्रति किलो है। पिछले वर्ष से डबल भाव हुआ।
मटर
40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले वर्ष से डबल भाव हुआ।
टमाटर
40 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले सप्ताह तक 20 रुपये प्रति किलो भाव था।
प्याज
50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। 100 रुपये भाव होने के बाद 50 पर पहुंचा।
खीरा
40 रुपये प्रति किलो है। पिछले साल 10 रुपये प्रति किलो बिका था।
शिमला मिर्च
50 रुपये प्रति किलो है। पहले साल 30 रुपये प्रति किलो था।
गोभी
30 रुपये प्रति किलो है। पहले साल से चार गुणा भाव ज्यादा हुआ।
उदड़
90 रुपये प्रति किलो बिक रही है। पिछले महीने 78 रुपये भाव था।
तेल
110 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पिछले महीने 95 रुपये भाव था।
मिर्च
60 रुपये प्रति किलो बिक रही है। इससे पहले 45 रुपये भाव था।
शहर में 10 सब्जी मंडी
शहरवासियों के लिए सात स्थानों पर सब्जी मंडी लगती है। इनमें तीन ऐसे स्थान हैं जहां पर रोजाना सब्जी की बिक्री होती है। इनमें एक तो हाईवे स्थित नई सब्जी मंडी स्थल, दूसरा मुगल कैनाल स्थित सब्जी मंडी और तीसरा रामनगर बाजार में लगने वाली सब्जी मंडी शामिल है। इसके लिए सात ऐसे स्थान हैं जहां पर अलग-अलग दिनों में मंडी लगती है। रविवार को सेक्टर-12 के ग्राउंड में, वीरवार को सेक्टर-9, शुक्रवार को प्रेम नगर, बुधवार सेक्टर-7 में सब्जी मंडी लगती है।
रसोई को कैसे संभाल रही हैं महिलाएं, सुनिए.....
इस बार गोभी नहीं बनाई
गोभी का भाव काफी ज्यादा है। इस बार दूसरी सब्जी से काम चला रही है। मंडी से गोभी की खरीद नहीं की। गोभी के अलावा भी कई सब्जियां हैं जो मंडी में जाने के बाद बदल देते हैं। -नीलम, गृहणी। (फोटो-12)
पहली बार देखी इतनी महंगाई
साल दर साल महंगाई बढ़ती तो देखी है, लेकिन इतनी महंगाई पहली बार देखी है। ध्यान है कि पिछले साल मटर की कीमत 15 रुपये किलो थी जो अब 40 है। रसोई को संभालना आसान नहीं रहा। -अंजू, गृहणी। (फोटो-13)
सब्जी खरीदना बजट से बाहर
बाजार में सभी सब्जियों के दाम इतने बढ़ चुुके हैं कि समझ नहीं आ रहा है कि कौन सी सब्जी खरीदी जाए। बाजार में थैला लेकर सब्जियां खरीदने आए थे पर यहां तो सब बजट से बाहर है। -पूनम, गृहणी। (फोटो-14)
अब दो दिन में एक बार बनती है सब्जी
बाजार में सब्जी खरीदने आया था। सीजन वाली सब्जियों की बात तो छोड़ो, बाजार में आलू के रेट भी 30 रुपये किलो हो गए हैं। हमारे घर में अब तो सब्जी भी दो दिन में एक बार बनती है। -केला देवी, गृहणी। (फोटो-16)
रेट पूछकर बिना खरीद भी लौट आते हैं
सब्जी के भाव इतने ज्यादा हैं कि कई बार तो मंडी में जाने के बाद रेट पूछकर बिना सब्जी खरीदे ही वापस लौट आते हैं। ऐसा उनके साथ कई बार हुआ है। दूसरा विकल्प भी नहीं होता। -इंदू, गृहणी। (फोटो-17)
सब्जियों की पसंद सपनों में सिमटी
सब्जी मंडी में सब्जियों के रेट काफी हद तक बढ़ चुुके हैं। आम लोगों के लिए तो सिर्फ सपनों में ही उनकी मन पसंदीदा सब्जी बन पाती है। बजट से बाहर निकला नहीं जा सकता। -निर्मला देवी, गृहणी। (फोटो-18)
बढ़ते सब्जी के दामों से परेशान
सब्जियों के बढ़ते दामों से परेशान हो चुके हैं। रोजाना सब्जी के नए नए रेट निकल आते हैं। सब्जी मंडी से लेकर आम रेहड़ी चालक के अलग-अलग रेट हो चुके हैं। पता नहीं कब सुधार होगा। - मंजीत, गृहणी। (फोटो-19)
सरकार ले महंगाई पर संज्ञान
सब्जियों के दाम बढ़ने से आम आदमी परेशान हो चुका है। सबसे ज्यादा मुसीबत गृहणियों के लिए खड़ी हो चुकी है। सरकार को महंगाई के मामले में संज्ञान लेकर कंट्रोल करने के लिए कदम उठाना चाहिए। बचनी देवी, गृहणी। (फोटो-20)
दाल व अन्य विकल्पों की रहती है तलाश
रोजाना एक सब्जी भी नहीं बना सकते और मंहगी सब्जी खरीद नहीं सकते। दाल व अन्य विकल्प को शामिल किया जाता है। ऐसे विकल्पों को तलाश करके रसोई का काम चलाया जा रहा है। - रजनी, गृहणी। (फोटो-21)
किचन में नहीं है सब्जी
किचन में पहले सब्जियों के ढ़ेर लगा करते थे, लेकिन मंहगाई की वजह से इनके दाम अब आसमान छू रहे हैं। अब तो दिन में एक बार ही सब्जी बनानी पड़ती है। कई बार तो सब्जी होती नहीं। -आरती, गृहणी। (फोटो-22)