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Karnal News: वैट के अटके मामलों में सुधार के लिए दो दिन शेष
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- वैट खत्म हुए सात साल बीते, अभी भी जिले के व्यापारियों पर करोड़ों बकाया
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। देश में वैट खत्म हुए सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उस समय के कर से जुड़े वर्षों पुराने मामले आज भी लंबित हैं। जिनमें सुधार के साथ निपटान को लेकर कराधान विभाग की ओर से अभियान चलाया गया है। इसके तहत आवेदन के दो दिन शेष हैं। व्यापारी 31 जुलाई तक आवेदन करते हुए अपने पुराने मामले निपटा सकते हैं।
पुराने वैट पर जुर्माना और ब्याज लगने के बाद अब यह भारी भरकम राशि का रूप ले चुके हैं। लंबित मामलों पर नजर डालें तो करनाल के कारोबारियों पर भी करोड़ों रुपये अभी भी बकाया हैं। कराधान विभाग की ओर से भी कई बार सख्ती के बाद यह राशि जमा नहीं हुई तो अब विभाग ने भी लंबित मामलों को निपटाने के उद्देश्य से इनमें सुधार व पुनर्मूल्यांकन का अभियान चलाया है। इसके तहत 31 जुलाई तक मामलों पर सुनवाई करते हुए उनके फार्म भी लिए जा रहे हैं।
वहीं कारोबारियों और कर बार एसोसिएशन सरकार से एक बार फिर ओटीएस यानी वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू करने की मांग की है। ताकि जो उद्यमी पिछली ओटीएस में लाभ नहीं उठा पाए, वे इस बार छूट का लाभ ले सकें। विदित हो कि जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने वैट को खत्म कर दिया था। व्यापारियों एवं अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016-17 तक के केसों में इनपुट मैच न होने के कारण और वैट के फार्म जमा न करवाने के कारण कर पर ब्याज और जुर्माना लगा था। ब्यूरो
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पिछली ओटीएस का नहीं मिला लाभ
एसोसिएशन का कहना है कि जनवरी माह में सरकार जो ओटीएस लाई थी, उसमें केवल उन कारोबारियों को ही लाभ मिल पाया था, जिनके फार्म दिसंबर 2023 से पहले जमा थे और अधिकारियों की ओर से आर्डर भी जारी हो चुके थे। जिन कारोबारियों के फार्म आर्डर नहीं थे, उन्हें छूट नहीं मिली, इसलिए अभी तक वैट के मामले लंबित होने के साथ कर की राशि भी प्रदेश पर बकाया खड़ी है।
अभियान के दौरान पूर्व के वर्षों की बकाया वसूली के मामलों पर सुनवाई होगी। इसमें सुधार, रिमांड मामलों का निर्णय और पुनर्मूल्यांकन आदि भी किया जा सकता है। जिन व्यापारियों एवं उद्यमियों के मामले लंबित हैं, वे इस अभियान का लाभ उठा सकते हैं।
- नीरज सिंह, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। देश में वैट खत्म हुए सात साल बीत चुके हैं, लेकिन उस समय के कर से जुड़े वर्षों पुराने मामले आज भी लंबित हैं। जिनमें सुधार के साथ निपटान को लेकर कराधान विभाग की ओर से अभियान चलाया गया है। इसके तहत आवेदन के दो दिन शेष हैं। व्यापारी 31 जुलाई तक आवेदन करते हुए अपने पुराने मामले निपटा सकते हैं।
पुराने वैट पर जुर्माना और ब्याज लगने के बाद अब यह भारी भरकम राशि का रूप ले चुके हैं। लंबित मामलों पर नजर डालें तो करनाल के कारोबारियों पर भी करोड़ों रुपये अभी भी बकाया हैं। कराधान विभाग की ओर से भी कई बार सख्ती के बाद यह राशि जमा नहीं हुई तो अब विभाग ने भी लंबित मामलों को निपटाने के उद्देश्य से इनमें सुधार व पुनर्मूल्यांकन का अभियान चलाया है। इसके तहत 31 जुलाई तक मामलों पर सुनवाई करते हुए उनके फार्म भी लिए जा रहे हैं।
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वहीं कारोबारियों और कर बार एसोसिएशन सरकार से एक बार फिर ओटीएस यानी वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू करने की मांग की है। ताकि जो उद्यमी पिछली ओटीएस में लाभ नहीं उठा पाए, वे इस बार छूट का लाभ ले सकें। विदित हो कि जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने वैट को खत्म कर दिया था। व्यापारियों एवं अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016-17 तक के केसों में इनपुट मैच न होने के कारण और वैट के फार्म जमा न करवाने के कारण कर पर ब्याज और जुर्माना लगा था। ब्यूरो
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पिछली ओटीएस का नहीं मिला लाभ
एसोसिएशन का कहना है कि जनवरी माह में सरकार जो ओटीएस लाई थी, उसमें केवल उन कारोबारियों को ही लाभ मिल पाया था, जिनके फार्म दिसंबर 2023 से पहले जमा थे और अधिकारियों की ओर से आर्डर भी जारी हो चुके थे। जिन कारोबारियों के फार्म आर्डर नहीं थे, उन्हें छूट नहीं मिली, इसलिए अभी तक वैट के मामले लंबित होने के साथ कर की राशि भी प्रदेश पर बकाया खड़ी है।
अभियान के दौरान पूर्व के वर्षों की बकाया वसूली के मामलों पर सुनवाई होगी। इसमें सुधार, रिमांड मामलों का निर्णय और पुनर्मूल्यांकन आदि भी किया जा सकता है। जिन व्यापारियों एवं उद्यमियों के मामले लंबित हैं, वे इस अभियान का लाभ उठा सकते हैं।
- नीरज सिंह, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त