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आज पूरा विश्व झेल रहा जल संकट का दंश : डाॅ. सुनील पंवार
Sun, 24 Aug 2025 12:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 24 Aug 2025 12:07 AM IST
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- जिला प्रशासन की ओर से एनडीआरआई में संस्कृति की अवधारणा विषय पर हुआ विमर्श
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
एनडीआरआई के सभागार में 18 से 24 अगस्त तक आयोजित प्रकृति महोत्सव के छठे दिन बिन पानी सब सून और पानी और प्रकृति विषय पर भी विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक डॉ. सुनील पंवार ने कहा कि आज पूरा विश्व जल संकट का दंश झेल रहा है। भविष्य में जलसंरक्षण बहुत जरूरी है, इसके लिए आने वाली युवा पीढ़ी को पानी का महत्व समझना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रकृति, जल और साहित्य जीवन के तीन स्तंभ है। सौरमंडल में मात्र पानी के ही कारण पृथ्वी दूसरे ग्रहों से अलग नजर आती है। पानी से ही जीवन की शुरुआत होती है, इसलिए पानी बचाना ही जीवन बचाना है। अतः आवश्यक है कि आज नई पीढ़ी इन समस्याओं को समझकर इसके समाधान के बारे में सोचे और इसके लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविदों के अनुभव से सीख लेकर अपने जीवन में लागू करने का प्रयास करें।
महाराजा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डाॅ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कहा कि बदलते हुए समय के साथ यह आवश्यक है कि हम हर तकनीक एवं अनुसंधान में ऐसे विषयों को प्रोत्साहित करें, जिसमें हम पानी के अपने स्रोतों का कम से कम दोहन की सीख दे सके। उन्होंने सभी से जल संचयन, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
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दयाल सिंह कॉलेज की प्राचार्य डाॅ. आशिमा गक्खड़, एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डाॅ. धीर सिंह ने भी पानी के महत्व के बारे में बताया। डाॅ. जय कौशिक ने भी विचार रखे। विमर्श के उपरांत एसडी गर्ल्स वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल की छात्राओं ने हरियाणवी संस्कृति पर आधारित नृत्य किया। पंडित चिरंजीलाल पीजी काॅलेज की छात्राओं ने सोलो डांस पर प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को प्रस्तुत किया। याशिका, नेहा और रुकमणी की ओर से एकल प्रस्तुति दी गई। डाॅ. गोपाल संखला, डाॅ. प्रियंका, डाॅ. पंकज सारस्वत, डाॅ. निशांत एवं डाॅ. हीना शर्मा ने व्यवस्थाएं संभालीं।
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
एनडीआरआई के सभागार में 18 से 24 अगस्त तक आयोजित प्रकृति महोत्सव के छठे दिन बिन पानी सब सून और पानी और प्रकृति विषय पर भी विमर्श हुआ। मुख्य अतिथि मुख्य वन संरक्षक डॉ. सुनील पंवार ने कहा कि आज पूरा विश्व जल संकट का दंश झेल रहा है। भविष्य में जलसंरक्षण बहुत जरूरी है, इसके लिए आने वाली युवा पीढ़ी को पानी का महत्व समझना होगा।
उन्होंने कहा कि प्रकृति, जल और साहित्य जीवन के तीन स्तंभ है। सौरमंडल में मात्र पानी के ही कारण पृथ्वी दूसरे ग्रहों से अलग नजर आती है। पानी से ही जीवन की शुरुआत होती है, इसलिए पानी बचाना ही जीवन बचाना है। अतः आवश्यक है कि आज नई पीढ़ी इन समस्याओं को समझकर इसके समाधान के बारे में सोचे और इसके लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविदों के अनुभव से सीख लेकर अपने जीवन में लागू करने का प्रयास करें।
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महाराजा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय, करनाल के कुलपति डाॅ. सुरेश कुमार मल्होत्रा ने कहा कि बदलते हुए समय के साथ यह आवश्यक है कि हम हर तकनीक एवं अनुसंधान में ऐसे विषयों को प्रोत्साहित करें, जिसमें हम पानी के अपने स्रोतों का कम से कम दोहन की सीख दे सके। उन्होंने सभी से जल संचयन, वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय योगदान देने की अपील की।
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दयाल सिंह कॉलेज की प्राचार्य डाॅ. आशिमा गक्खड़, एनडीआरआई के निदेशक एवं कुलपति डाॅ. धीर सिंह ने भी पानी के महत्व के बारे में बताया। डाॅ. जय कौशिक ने भी विचार रखे। विमर्श के उपरांत एसडी गर्ल्स वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल की छात्राओं ने हरियाणवी संस्कृति पर आधारित नृत्य किया। पंडित चिरंजीलाल पीजी काॅलेज की छात्राओं ने सोलो डांस पर प्रस्तुति के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों को प्रस्तुत किया। याशिका, नेहा और रुकमणी की ओर से एकल प्रस्तुति दी गई। डाॅ. गोपाल संखला, डाॅ. प्रियंका, डाॅ. पंकज सारस्वत, डाॅ. निशांत एवं डाॅ. हीना शर्मा ने व्यवस्थाएं संभालीं।