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कपड़ों के शौकीनों की जेबें होंगी ढीली
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नए साल में रेडीमेड कपड़े पर जीएसटी 12 प्रतिशत होने से कपड़ों के शौकीनों की जेबें ढीली होंगी। अभी तक यह दर पांच प्रतिशत है। इस प्रकार जीएसटी सात प्रतिशत बढ़ने का सीधा असर आम आदमी और दुकानदारों पर पड़ेगा। दुकानदारों का कहना है कि अभी तक वे कोरोना की वजह से आई आर्थिक मंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं कि अब बढ़े जीएसटी की मार उन पर भारी पड़ने वाली है। इससे ग्राहक भी परेशान होंगे।
करनाल शहर में छोटी-बड़ी करीब 500 रेडीमेड कपड़ा दुकानें हैं। व्यवसायियों का कहना है कि कोरोना से पहले ही व्यवसाय डांवाडोल है। हर महीने पांच से सात दुकानदार किराये की दुकानें छोड़कर खाली कर रहे हैं। परिषद को इस मामले में सामंजस्य बनाना चाहिए ताकि व्यापारी व सामान्य ग्राहक पर कोई असर नहीं पड़े।
जीएसटी बढ़ाने से कपड़े की कीमत बढ़ेगी ओर ग्राहक परेशान हो जाएगा। कोरोना काल की वजह से बाजार में काम नहीं है। हर महीने पांच से सात तक रेडीमेड की दुकानें खाली हो रही हैं जो किराये पर चल रही थी। - नीरज उप्पल, प्रधान, करनाल रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन।
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जीएसटी बढ़ाने से व्यवसायी के मुनाफे पर ही फर्क पड़ेगा। ग्राहक से अलग से जीएसटी मांगने पर वह देने से मना करता है इसलिए कीमत में ही जीएसटी जोड़ लेते हैं। उसमें से जो बचता है वह दुकानदार का मुनाफा होता है। - निर्दोष जैन, जैन संस रेडीमेड प्रतिष्ठान, सराफा बाजार।
एक जनवरी 2022 से 12 प्रतिशत जीएसटी हो जाएगा। कीमतें बढ़ने से बाजार की स्थिति उसी समय पता चलेगी। यदि रेडीमेड कपड़े पर केवल पांच प्रतिशत ही जीएसटी कर देते तो अच्छा रहता। व्यवसायी व ग्राहक दोनों के हित के मद्देनजर काम होना चाहिए। - राजिंद्र कुमार, शाम गारमेंट्स।
जीएसटी की अलग-अलग स्लैब नहीं होनी चाहिए। जनता को ही टैक्स देना है और सरकार के खाते में जाएगा। व्यवसायी बीच का माध्यम है। असली तकलीफ जनता की है। यह सरकार सोचे कि जनता को कैसे राहत दी जाए। - अनिल चौधरी, नवयुग गारमेंट्स।
ग्राहकों ने विशेष समारोह में भी कपड़े पर बजट में 70 प्रतिशत तक कटौती कर रखी है। अवस्था ऐसी है कि ग्राहक है। पांच प्रतिशत टैक्स में भी कपड़ा आइटम महंगी पड़ती है। अलग-अलग दरों की वजह से तो व्यापारी उलझन में रहता है। - रवि चानना, उपप्रधान, करनाल रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन।
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करनाल। नए साल में रेडीमेड कपड़े पर जीएसटी 12 प्रतिशत होने से कपड़ों के शौकीनों की जेबें ढीली होंगी। अभी तक यह दर पांच प्रतिशत है। इस प्रकार जीएसटी सात प्रतिशत बढ़ने का सीधा असर आम आदमी और दुकानदारों पर पड़ेगा। दुकानदारों का कहना है कि अभी तक वे कोरोना की वजह से आई आर्थिक मंदी की मार से उबर नहीं पाए हैं कि अब बढ़े जीएसटी की मार उन पर भारी पड़ने वाली है। इससे ग्राहक भी परेशान होंगे।
करनाल शहर में छोटी-बड़ी करीब 500 रेडीमेड कपड़ा दुकानें हैं। व्यवसायियों का कहना है कि कोरोना से पहले ही व्यवसाय डांवाडोल है। हर महीने पांच से सात दुकानदार किराये की दुकानें छोड़कर खाली कर रहे हैं। परिषद को इस मामले में सामंजस्य बनाना चाहिए ताकि व्यापारी व सामान्य ग्राहक पर कोई असर नहीं पड़े।
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जीएसटी बढ़ाने से कपड़े की कीमत बढ़ेगी ओर ग्राहक परेशान हो जाएगा। कोरोना काल की वजह से बाजार में काम नहीं है। हर महीने पांच से सात तक रेडीमेड की दुकानें खाली हो रही हैं जो किराये पर चल रही थी। - नीरज उप्पल, प्रधान, करनाल रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन।
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जीएसटी बढ़ाने से व्यवसायी के मुनाफे पर ही फर्क पड़ेगा। ग्राहक से अलग से जीएसटी मांगने पर वह देने से मना करता है इसलिए कीमत में ही जीएसटी जोड़ लेते हैं। उसमें से जो बचता है वह दुकानदार का मुनाफा होता है। - निर्दोष जैन, जैन संस रेडीमेड प्रतिष्ठान, सराफा बाजार।
एक जनवरी 2022 से 12 प्रतिशत जीएसटी हो जाएगा। कीमतें बढ़ने से बाजार की स्थिति उसी समय पता चलेगी। यदि रेडीमेड कपड़े पर केवल पांच प्रतिशत ही जीएसटी कर देते तो अच्छा रहता। व्यवसायी व ग्राहक दोनों के हित के मद्देनजर काम होना चाहिए। - राजिंद्र कुमार, शाम गारमेंट्स।
जीएसटी की अलग-अलग स्लैब नहीं होनी चाहिए। जनता को ही टैक्स देना है और सरकार के खाते में जाएगा। व्यवसायी बीच का माध्यम है। असली तकलीफ जनता की है। यह सरकार सोचे कि जनता को कैसे राहत दी जाए। - अनिल चौधरी, नवयुग गारमेंट्स।
ग्राहकों ने विशेष समारोह में भी कपड़े पर बजट में 70 प्रतिशत तक कटौती कर रखी है। अवस्था ऐसी है कि ग्राहक है। पांच प्रतिशत टैक्स में भी कपड़ा आइटम महंगी पड़ती है। अलग-अलग दरों की वजह से तो व्यापारी उलझन में रहता है। - रवि चानना, उपप्रधान, करनाल रेडीमेड गारमेंट्स एसोसिएशन।