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Karnal News: इकलौती बेटी ने दी पिता के शव को मुखाग्नि
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। भारतीय संस्कारों में बेटे को पिता की चिता को आग देने का अधिकार है, लेकिन बदलते परिवेश में अब बेटी भी समानता का अधिकार रखती है। जिसे अल्फा सिटी की अपने माता-पिता की इकलौती बेटी अनुष्का ने अपने कैंसर पीड़ित पिता के निधन पर उन्हें मुखाग्नि देकर एक बार फिर साबित किया है।
अल्फा सिटी निवासी विशोक कुमार बारिक एक कार कंपनी में महाप्रबंधक पद पर कार्यरत थे। वह कैंसर से पीड़ित थे। मंगलवार को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को मॉडल टाउन में किया गया बात संस्कारों की चली तो बेटे के विकल्प पर भी चर्चा हुई, लेकिन उनकी बेटी अनुष्का ने मुखाग्नि देने की बात कही। समाज के लोगों ने भी इसका समर्थन किया। इसके साथ ही अनुष्का ने विधिवत तरीके से अपने पिता के शव को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।
अल्फा आरडब्ल्यूए के प्रधान प्रो. जोगिंद्र मदान ने बताया कि विशोक कुमार बारिक आरडब्ल्यूए के सदस्य भी थे। बेटा या बेटी में कोई अंतर नहीं है। संस्कारों में भी ये बदलाव आवश्यक है। जिनका बेटा नहीं है, वहां लड़कियों को भी अंतिम संस्कार का अधिकार होना ही चाहिए। बेटा हो या बेटी, अपने के प्रति सम्मान होना बेहद आवश्यक है।
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करनाल। भारतीय संस्कारों में बेटे को पिता की चिता को आग देने का अधिकार है, लेकिन बदलते परिवेश में अब बेटी भी समानता का अधिकार रखती है। जिसे अल्फा सिटी की अपने माता-पिता की इकलौती बेटी अनुष्का ने अपने कैंसर पीड़ित पिता के निधन पर उन्हें मुखाग्नि देकर एक बार फिर साबित किया है।
अल्फा सिटी निवासी विशोक कुमार बारिक एक कार कंपनी में महाप्रबंधक पद पर कार्यरत थे। वह कैंसर से पीड़ित थे। मंगलवार को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार बुधवार को मॉडल टाउन में किया गया बात संस्कारों की चली तो बेटे के विकल्प पर भी चर्चा हुई, लेकिन उनकी बेटी अनुष्का ने मुखाग्नि देने की बात कही। समाज के लोगों ने भी इसका समर्थन किया। इसके साथ ही अनुष्का ने विधिवत तरीके से अपने पिता के शव को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार किया।
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अल्फा आरडब्ल्यूए के प्रधान प्रो. जोगिंद्र मदान ने बताया कि विशोक कुमार बारिक आरडब्ल्यूए के सदस्य भी थे। बेटा या बेटी में कोई अंतर नहीं है। संस्कारों में भी ये बदलाव आवश्यक है। जिनका बेटा नहीं है, वहां लड़कियों को भी अंतिम संस्कार का अधिकार होना ही चाहिए। बेटा हो या बेटी, अपने के प्रति सम्मान होना बेहद आवश्यक है।
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