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Karnal News: कम मीठे आम और बड़े वाले अमरूद ने खींचा ध्यान
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महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी करनाल में प्रथम उद्यान मेला एवं हॉटी एक्सपो-2026 के दौर
करनाल। कम मीठे आम, छोटे आकार का पपीता, ड्रैगन व बड़े आकार का बिना बीज वाला अमरूद। उद्यान मेला एवं एक्सपो में ये बड़ा आकर्षण रहे। किसानों ने इनके पौधे भी खरीदे। दो दिवसीय आयोजन का शनिवार को महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में शुभारंभ हुआ। पहले दिन मेले में 80 स्टॉल लगाए गए। विभिन्न कंपनियों और विभागों की ओर से लगे स्टॉल में नई तकनीक और उत्पादों का प्रदर्शन किया गया।
मेले से प्रदेशभर के किसान पहुंचे। किसानों को एक ही जगह पर एमएचयू के साथ-साथ दूसरे अनुसंधान केंद्रों, उद्यमियों की ओर से किए जा रहे नवाचारों को देखने का मौका मिला। मेले का उद्घाटन कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किया। अध्यक्षता एमएचयू के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने की।
मेले में हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से किसान, उद्यमी, कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनियां, महिला, किसान समूह, आईसीएआर के अलावा हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए हैं।
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कुलसचिव प्रो सुरेंद्र सिंह ने उद्यान मेला में सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी विधायक भगवानदास कबीरपंथी, मेयर रेणु बाला गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीन लाठर, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि कविंद्र राणा, एचएयू हिसार के वीसी डॉ. बीआर कांबोज अनुसंधान निदेशक डॉ. विशाल राणा, डीजी हॉर्टिकल्चरल के डॉ. रणधीर सिंह, पशुधन बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार मौजूद रहे।
दो सबसे बड़े आकर्षण
मेले में 30 तरह के फलों, सब्जियों और मसालों के पौधे वितरित किए गए।
- तोतापूरी आम : यह आम अपनी हल्की मिठास, थोड़े खट्टे स्वाद और कम फाइबर के लिए जाना जाता है। यह व्यावसायिक रूप से और घरेलू उपयोग (अचार, जूस और स्लाइस) के लिए बहुत लोकप्रिय है।
- बड़े आकार का अमरूद : विश्वविद्यालय और हरियाणा के बागवानी केंद्रों की ओर से बड़े आकार और बंपर पैदावार के लिए पहचानी जाने वाली किस्म वीएनआर बिही प्रस्तुत की गई। यह अमरूद की एक बेहद खास और बड़े आकार की किस्म है। इसके एक फल का वजन 300 ग्राम से लेकर 850 ग्राम (कुछ मामलों में 1 किलो तक) होता है। इसमें बीज बहुत कम होते हैं।
प्रयोगशालाओं का लोकार्पण, किसानों को दी सैंपल रिपोर्ट
कृषि मंत्री ने एमएचयू की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, शहद टेस्टिंग प्रयोगशाला का शुभारंभ किया। इसके साथ ही किसानों को सैंपल रिपोर्ट भी दी गई। हरियाणा बागवानी पत्रिका, एमएचयू का पॉडकास्ट का विमोचन किया गया और एमएचयू के प्रमोशन वीडियो भी जारी किया गया।
पहले कृषि का मतलब केवल गेहूं-जीरी था, अब बागवानी सहित कई प्रकार : श्याम सिंह
- उद्यान मेले में कृषि मंत्री बोले- अब किसान का ज्यादा मुनाफा और पौष्टिक व रसायन मुक्त उपज प्राथमिकता
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में आयोजित उद्यान मेले में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों और विद्यार्थियों में जोश भरा। उन्होंने कहा कि पहले कृषि का मतलब एक ही होता था गेहूं और जीरी (धान/चावल) लेकिन अब कृषि भी कई क्षेत्रों में विभाजित हो चुकी है। इनमें बागवानी की खेती भी एक प्रकार है। उन्होंने कहा कि पहले केवल उत्पादन पर जोर था लेकिन अब समय के साथ प्राथमिकताएं और जरूरतें भी बदली हैं।
मंच से संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब किसान का ज्यादा मुनाफा और उत्पादन देने के साथ पौष्टिक और रसायन मुक्त उपज भी प्राथमिकता है। इसके लिए बागवानी विश्वविद्यालय जैसे कई संस्थान काम कर रहे हैं। ये संस्थान न केवल नई तकनीक विकसित कर रहे हैं बल्कि नई वैज्ञानिक पौध भी तैयार कर रहे हैं। जो भविष्य की चुनौतियों को आसान बनाएगी।
उन्होंने कहा कि बागवानी की खेती करने वाले किसानों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कैसे हो साथ ही प्रदेशवासियों को किस प्रकार से पौष्टिक रसायन से मुक्त फल, फूल, सब्जियां, मसाले मिले। इसके लिए सरकार की ओर से एमएचयू की स्थापना की गई।
आबादी बढ़ने के साथ संकुचित हो रही जमीन, बागवानी बड़ा विकल्प
कृषि मंत्री ने कहा कि विश्व में भारतवर्ष ऐसा देश है, जहां पर करीब 80 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य भूमि है लेकिन समय के साथ-साथ जनसंख्या बढ़ने से जमीन संकुचित होती जा रही है। किसान कम जमीन में बागवानी कर अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते है।
भावांतर भरपाई योजना : उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार 24 फसलों पर एमएसपी दे रही है, अगर कोई फसल एमएसपी से कम पर बिकती है तो किसान को नुकसान न हो इसे देखते हुए भावांतर भरपाई योजना शुरू की है। किसान को एमएसपी से जितना कम दाम मिलेगा, उतना दाम भावांतर भरपाई योजना के तहत प्रदेश सरकार किसान को देंगी। किसान पशु पालन भी करें, जैविक खेती को प्राथमिकता दें।
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मेले से प्रदेशभर के किसान पहुंचे। किसानों को एक ही जगह पर एमएचयू के साथ-साथ दूसरे अनुसंधान केंद्रों, उद्यमियों की ओर से किए जा रहे नवाचारों को देखने का मौका मिला। मेले का उद्घाटन कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किया। अध्यक्षता एमएचयू के कुलपति प्रो. सुरेश मल्होत्रा ने की।
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मेले में हरियाणा के अलग-अलग हिस्सों से किसान, उद्यमी, कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनियां, महिला, किसान समूह, आईसीएआर के अलावा हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए हैं।
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कुलसचिव प्रो सुरेंद्र सिंह ने उद्यान मेला में सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम में इंद्री विधायक रामकुमार कश्यप, नीलोखेड़ी विधायक भगवानदास कबीरपंथी, मेयर रेणु बाला गुप्ता, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रवीन लाठर, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के प्रतिनिधि कविंद्र राणा, एचएयू हिसार के वीसी डॉ. बीआर कांबोज अनुसंधान निदेशक डॉ. विशाल राणा, डीजी हॉर्टिकल्चरल के डॉ. रणधीर सिंह, पशुधन बोर्ड के चेयरमैन डॉ. अशोक कुमार मौजूद रहे।
दो सबसे बड़े आकर्षण
मेले में 30 तरह के फलों, सब्जियों और मसालों के पौधे वितरित किए गए।
- तोतापूरी आम : यह आम अपनी हल्की मिठास, थोड़े खट्टे स्वाद और कम फाइबर के लिए जाना जाता है। यह व्यावसायिक रूप से और घरेलू उपयोग (अचार, जूस और स्लाइस) के लिए बहुत लोकप्रिय है।
- बड़े आकार का अमरूद : विश्वविद्यालय और हरियाणा के बागवानी केंद्रों की ओर से बड़े आकार और बंपर पैदावार के लिए पहचानी जाने वाली किस्म वीएनआर बिही प्रस्तुत की गई। यह अमरूद की एक बेहद खास और बड़े आकार की किस्म है। इसके एक फल का वजन 300 ग्राम से लेकर 850 ग्राम (कुछ मामलों में 1 किलो तक) होता है। इसमें बीज बहुत कम होते हैं।
प्रयोगशालाओं का लोकार्पण, किसानों को दी सैंपल रिपोर्ट
कृषि मंत्री ने एमएचयू की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, शहद टेस्टिंग प्रयोगशाला का शुभारंभ किया। इसके साथ ही किसानों को सैंपल रिपोर्ट भी दी गई। हरियाणा बागवानी पत्रिका, एमएचयू का पॉडकास्ट का विमोचन किया गया और एमएचयू के प्रमोशन वीडियो भी जारी किया गया।
पहले कृषि का मतलब केवल गेहूं-जीरी था, अब बागवानी सहित कई प्रकार : श्याम सिंह
- उद्यान मेले में कृषि मंत्री बोले- अब किसान का ज्यादा मुनाफा और पौष्टिक व रसायन मुक्त उपज प्राथमिकता
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय में आयोजित उद्यान मेले में कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों और विद्यार्थियों में जोश भरा। उन्होंने कहा कि पहले कृषि का मतलब एक ही होता था गेहूं और जीरी (धान/चावल) लेकिन अब कृषि भी कई क्षेत्रों में विभाजित हो चुकी है। इनमें बागवानी की खेती भी एक प्रकार है। उन्होंने कहा कि पहले केवल उत्पादन पर जोर था लेकिन अब समय के साथ प्राथमिकताएं और जरूरतें भी बदली हैं।
मंच से संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि अब किसान का ज्यादा मुनाफा और उत्पादन देने के साथ पौष्टिक और रसायन मुक्त उपज भी प्राथमिकता है। इसके लिए बागवानी विश्वविद्यालय जैसे कई संस्थान काम कर रहे हैं। ये संस्थान न केवल नई तकनीक विकसित कर रहे हैं बल्कि नई वैज्ञानिक पौध भी तैयार कर रहे हैं। जो भविष्य की चुनौतियों को आसान बनाएगी।
उन्होंने कहा कि बागवानी की खेती करने वाले किसानों को ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कैसे हो साथ ही प्रदेशवासियों को किस प्रकार से पौष्टिक रसायन से मुक्त फल, फूल, सब्जियां, मसाले मिले। इसके लिए सरकार की ओर से एमएचयू की स्थापना की गई।
आबादी बढ़ने के साथ संकुचित हो रही जमीन, बागवानी बड़ा विकल्प
कृषि मंत्री ने कहा कि विश्व में भारतवर्ष ऐसा देश है, जहां पर करीब 80 प्रतिशत भूमि कृषि योग्य भूमि है लेकिन समय के साथ-साथ जनसंख्या बढ़ने से जमीन संकुचित होती जा रही है। किसान कम जमीन में बागवानी कर अधिक से अधिक मुनाफा कमा सकते है।
भावांतर भरपाई योजना : उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार 24 फसलों पर एमएसपी दे रही है, अगर कोई फसल एमएसपी से कम पर बिकती है तो किसान को नुकसान न हो इसे देखते हुए भावांतर भरपाई योजना शुरू की है। किसान को एमएसपी से जितना कम दाम मिलेगा, उतना दाम भावांतर भरपाई योजना के तहत प्रदेश सरकार किसान को देंगी। किसान पशु पालन भी करें, जैविक खेती को प्राथमिकता दें।

महाराणा प्रताप हॉर्टिकल्चरल यूनिवर्सिटी करनाल में प्रथम उद्यान मेला एवं हॉटी एक्सपो-2026 के दौर

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