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Karnal News: खराब फोन के पैसे वापस करेगा दुकानदार
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करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दुकानदार को खराब फोन की पूरी कीमत उपभोक्ता को वापस करने का आदेश दिया है। शिकायत दर्ज होने के दो माह में आयोग ने फैसला सुनाया। विक्रेता को उपभोक्ता को फोन की लागत और मुआवजे के रूप में 13500 रुपये की राशि आदेश तिथि के 45 दिनों में अदा करनी होगी।
आयोग के फैसले के अनुसार, यमुनानगर निवासी अमित चोपड़ा ने 12 मार्च को करनाल स्थित बिंगो कम्युनिकेशन से 8,500 रुपये में एक पुराना ओप्पो ए3 5जी फोन खरीदा था। खरीद के महज तीन दिन बाद ही फोन में डिस्प्ले न आने या हैंग होने की समस्या आ गई। शिकायत पर दुकानदार ने फोन मरम्मत के लिए रख लिया और उन्हें अस्थायी रूप से दूसरा फोन दिया।
तीन जुलाई को दुकान मालिक अजय ने फोन की मरम्मत करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अमित ने अपने वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। कोई समाधान न मिलने पर अमित चोपड़ा ने 24 जुलाई को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
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आयोग ने बिंगो कम्युनिकेशन के मालिक अजय को नोटिस जारी किया। नोटिस के बावजूद विक्रेता सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में 18 अगस्त को आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का आदेश घोषित कर दिया।
विक्रेता की ओर से सेवा में कमी
अमित चोपड़ा ने आयोग के समक्ष अपने हलफनामे, मूल बिल, जी-पे भुगतान के स्क्रीनशॉट, कानूनी नोटिस और डाक रसीद जैसे महत्वपूर्ण सबूत पेश किए। आयोग ने इनके आधार पर जांच की और पाया कि विक्रेता ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा का सहारा लिया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि विक्रेता का कर्तव्य था कि वह या तो खराब फोन की मरम्मत करे या उसकी लागत वापस करे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद अब आयोग ने विक्रेता को मोबाइल फोन की लागत के रूप में 8,500 रुपये और मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न तथा मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने अमित चोपड़ा को अस्थायी रूप से दिए गए मोबाइल सेट को विक्रेता को वापस करने का भी निर्देश दिया।
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आयोग के फैसले के अनुसार, यमुनानगर निवासी अमित चोपड़ा ने 12 मार्च को करनाल स्थित बिंगो कम्युनिकेशन से 8,500 रुपये में एक पुराना ओप्पो ए3 5जी फोन खरीदा था। खरीद के महज तीन दिन बाद ही फोन में डिस्प्ले न आने या हैंग होने की समस्या आ गई। शिकायत पर दुकानदार ने फोन मरम्मत के लिए रख लिया और उन्हें अस्थायी रूप से दूसरा फोन दिया।
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तीन जुलाई को दुकान मालिक अजय ने फोन की मरम्मत करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अमित ने अपने वकील के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजा लेकिन उसका कोई जवाब नहीं मिला। कोई समाधान न मिलने पर अमित चोपड़ा ने 24 जुलाई को उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
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आयोग ने बिंगो कम्युनिकेशन के मालिक अजय को नोटिस जारी किया। नोटिस के बावजूद विक्रेता सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में 18 अगस्त को आयोग ने उनके खिलाफ एकतरफा कार्रवाई का आदेश घोषित कर दिया।
विक्रेता की ओर से सेवा में कमी
अमित चोपड़ा ने आयोग के समक्ष अपने हलफनामे, मूल बिल, जी-पे भुगतान के स्क्रीनशॉट, कानूनी नोटिस और डाक रसीद जैसे महत्वपूर्ण सबूत पेश किए। आयोग ने इनके आधार पर जांच की और पाया कि विक्रेता ने सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथा का सहारा लिया था। आयोग ने स्पष्ट किया कि विक्रेता का कर्तव्य था कि वह या तो खराब फोन की मरम्मत करे या उसकी लागत वापस करे लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद अब आयोग ने विक्रेता को मोबाइल फोन की लागत के रूप में 8,500 रुपये और मानसिक पीड़ा, उत्पीड़न तथा मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 5,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने अमित चोपड़ा को अस्थायी रूप से दिए गए मोबाइल सेट को विक्रेता को वापस करने का भी निर्देश दिया।