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खाकी की आड़ में चल रहा था ठगी का गिरोह
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। सस्ते दाम में सोने के गहने दिलाने के नाम पर 85 लाख रुपये छीनने के मामले में गिरोह के पीछे दो पुलिस कर्मचारियों का हाथ होने का खुलासा हुआ है। इनमें एक पुलिस कर्मी सेवानिवृत्त हो चुका है तो दूसरा पुलिस कर्मी अंबाला में नौकरी करता है, जो एसआई बताया जा रहा है।
पता चला है कि खाकी की आड़ में ही यह ठगी का गिरोह चल रहा था। जो लोगों को सस्ते दाम में गहने दिलाने के बहाने रुपये ठग लेते थे या छीन लेते थे, क्योंकि दोनों पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचकर रेड मारते थे, बाद में गहने और रुपये कब्जे में लेकर ठगों के साथ बांट लेते थे। यह भी पता चला है कि ये दोनों पुलिस कर्मचारियों को एक से दो लाख रुपये कमीशन दिया जाता था। हालांकि मामले का पूरा खुलासा इन दोनों आरोपियों व मुख्य आरोपी दर्शन के पकड़े जाने पर होगा। फिलहाल पुलिस की सीआईए-1 की टीम जांच कर रही है। जांच अधिकारी रमेश ने बताया कि 27 नवंबर को पकड़े गए आरोपी रणधीर को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया है।
ये था मामला
पुलिस के अनुसार 11 नवंबर को गुरविंद्र सिंह खुराना निवासी सेक्टर- 06 करनाल ने शिकायत दी थी कि वह कपड़े बेचने का काम करता है। उसके पास एक व्यक्ति आया और बोला कि वह सस्ते दाम में गहने दिला देगा। उसका जानकार कुछ मजबूरी के चलते यह सोना सस्ता बेच रहा है। वह उसकी बातों में आ गया। गहने खरीदने के लिए आरोपी दर्शन की बताई गई जगह अंबाला के साहा रोड पर पहुंच गया।
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वहां उसने आरोपियों को 85 लाख रुपये से भरा बैग दे दिया और उसे गहनों से भरा बैग दे दिया। इसी दौरान एक कार में वहां पुलिस कर्मचारी आ गए और उसके हाथ से गहनों व आरोपियों के हाथ से रुपयों से भरा बैग ले गए। आरोपी भी पुलिस कर्मियों साथ ही चले गए। जब उसने अपने रुपये मांगे तो उन्होंने मामले को भूल जाने को कहा।
पुलिस ने इस मामले की जांच की तो चार आरोपी चतर सिंह उर्फ सोनू निवासी गंदापुर, जिला यमुनानगर, आरोपी मस्तान शाह निवासी ऊंचा सदान जिला यमुनानगर, आरोपी हरबीर उर्फ छोटू जयसिंह का माजरा जिला यमुनानगर और आरोपी रणधीर उर्फ धीरा निवासी जय सिंह का माजरा, जिला यमुनानगर को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। इन आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि दो पुलिस कर्मी उनके साथ थे।
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करनाल। सस्ते दाम में सोने के गहने दिलाने के नाम पर 85 लाख रुपये छीनने के मामले में गिरोह के पीछे दो पुलिस कर्मचारियों का हाथ होने का खुलासा हुआ है। इनमें एक पुलिस कर्मी सेवानिवृत्त हो चुका है तो दूसरा पुलिस कर्मी अंबाला में नौकरी करता है, जो एसआई बताया जा रहा है।
पता चला है कि खाकी की आड़ में ही यह ठगी का गिरोह चल रहा था। जो लोगों को सस्ते दाम में गहने दिलाने के बहाने रुपये ठग लेते थे या छीन लेते थे, क्योंकि दोनों पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचकर रेड मारते थे, बाद में गहने और रुपये कब्जे में लेकर ठगों के साथ बांट लेते थे। यह भी पता चला है कि ये दोनों पुलिस कर्मचारियों को एक से दो लाख रुपये कमीशन दिया जाता था। हालांकि मामले का पूरा खुलासा इन दोनों आरोपियों व मुख्य आरोपी दर्शन के पकड़े जाने पर होगा। फिलहाल पुलिस की सीआईए-1 की टीम जांच कर रही है। जांच अधिकारी रमेश ने बताया कि 27 नवंबर को पकड़े गए आरोपी रणधीर को कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से उसे जेल भेज दिया है।
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ये था मामला
पुलिस के अनुसार 11 नवंबर को गुरविंद्र सिंह खुराना निवासी सेक्टर- 06 करनाल ने शिकायत दी थी कि वह कपड़े बेचने का काम करता है। उसके पास एक व्यक्ति आया और बोला कि वह सस्ते दाम में गहने दिला देगा। उसका जानकार कुछ मजबूरी के चलते यह सोना सस्ता बेच रहा है। वह उसकी बातों में आ गया। गहने खरीदने के लिए आरोपी दर्शन की बताई गई जगह अंबाला के साहा रोड पर पहुंच गया।
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वहां उसने आरोपियों को 85 लाख रुपये से भरा बैग दे दिया और उसे गहनों से भरा बैग दे दिया। इसी दौरान एक कार में वहां पुलिस कर्मचारी आ गए और उसके हाथ से गहनों व आरोपियों के हाथ से रुपयों से भरा बैग ले गए। आरोपी भी पुलिस कर्मियों साथ ही चले गए। जब उसने अपने रुपये मांगे तो उन्होंने मामले को भूल जाने को कहा।
पुलिस ने इस मामले की जांच की तो चार आरोपी चतर सिंह उर्फ सोनू निवासी गंदापुर, जिला यमुनानगर, आरोपी मस्तान शाह निवासी ऊंचा सदान जिला यमुनानगर, आरोपी हरबीर उर्फ छोटू जयसिंह का माजरा जिला यमुनानगर और आरोपी रणधीर उर्फ धीरा निवासी जय सिंह का माजरा, जिला यमुनानगर को अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया। इन आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि दो पुलिस कर्मी उनके साथ थे।