फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   teacher day

शिक्षक दिवस

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Sep 2022 02:45 AM IST
विज्ञापन
teacher day
शिक्षक दिवस विशेष
विज्ञापन

मेहनत से लिखी सफलता की इबारत
- किसी ने मिटाया अंधकार, कोई दूसरों को लगा रहा सफलता के पंख
गगन तलवार
करनाल। शिक्षक अगर मेहनत करें तो न केवल विद्यार्थी का भविष्य संवार सकते हैं। बल्कि जिस संस्थान में कार्यरत हों, उसकी तकदीर और तस्वीर बदल सकते हैं। कर्ण नगरी में भी ऐसे कई शिक्षक हैं जिन्होंने अपनी मेहनत के बल पर सफलता की इबारत लिखी है। किसी ने स्कूल या विद्यार्थी के जीवन में बदलाव लाकर अंधकार मिटाया तो कोई अतिरिक्त प्रयास करके बचपन को सफलता के पंख लगा रहा है। शहर के लिए गर्व की बात यह भी है कि ऐसी शख्सियतों में से ही नौ शिक्षकों को सोमवार को राजभवन में राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार देकर सम्मानित करेंगे।
फोटो--202
1. खंडहर हो चुके स्कूल के कमरे को दुरुस्त कराकर खुलवाए लैब
- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल नरूखेड़ी की प्रिंसिपल क्षमा वर्मा ने स्कूल के हालात बदले, छात्र संख्या बढ़ाने का भी प्रयास किया। अक्तूबर 2021 में प्रिंसिपल बनीं। इससे पहले टिकरी के स्कूल में कॉमर्स की लेक्चरर थीं। स्टाफ के सहयोग से पैसा एकत्रित करके स्कूल के खंडहर हो चुके कमरे को मरम्मत कराकर नया बनाया। इसके अलावा साइंस और मैथ लैब तैयार किया। पहले स्कूल में कक्षा छठी से 12वीं तक 250 बच्चे थे, इस बार अब तक 300 एडमिशन हो चुके हैं।
विज्ञापन

.....
फोटो--203
2. ड्रॉपआउट लड़कियों को शिक्षित कराने का उठाया बीड़ा
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल सुभरी में वीना 2019 से प्रिंसिपल हैं। ड्रॉपआउट बच्चों में पढ़ने की ललक पैदा करने के लिए विशेष रूप से कार्य किया। खुद सर्वे करके गांव की ड्रॉपआउट लड़कियों को स्कूल में दाखिला कराया। 2019 में 12वीं कक्षा का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा। इस उपलब्धि के लिए उन्हें शिक्षामंत्री सम्मानित भी कर चुके हैं। एमडीडी बाल भवन में स्वयं और अपने स्टाफ के माध्यम से बच्चों को शिक्षित करने का जिम्मा भी उठाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

.....
फोटो-- 209
3. छात्राओं का विज्ञान में बढ़ा रहे रुझान
राजकीय मॉडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल रेलवे रोड की पीजीटी बायोलॉजी रेखा साइंस एक्टिविटी में हिस्सा लेने के लिए बच्चों को प्रेरित करतीं हैं। पिछले तीन साल में साइंस संकाय में छात्र संख्या बढ़ी है। स्कूल में 12वीं कक्षा में 36 छात्राएं हैं। इसमें 26 छात्राएं मेडिकल संकाय में हैं। बिना कोचिंग के दो साल पहले एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए स्कूल की छात्रा का चयन भी हुआ। इसके अलावा एक छात्रा फारेंसिक साइंस की पढ़ाई करने मुंबई में गई है।
फोटो-- 211
4. शरीर से रहे तंग पर हिम्मत नहीं हारी
- राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल कुटेल के शिक्षक अमन का अब तक 100 प्रतिशत परीक्षा परिणाम रहा। जनवरी माह में छत से गिरने के बाद दोनों पांवों में फ्रैक्चर आ गया। उस दौरान अस्पताल में भर्ती रहते हुए भी ऑनलाइन कक्षाएं लीं। काफी समय तक चलने में भी असमर्थ रहे तो साथी टीचर उन्हें रोजाना स्कूल लेकर जाते रहे, ताकि उनकी शारीरिक दिक्कत के कारण किसी विद्यार्थी की पढ़ाई बाधित न हो, लिहाजा उनकी मेहनत रंग लाई और परीक्षा परिणाम भी हर साल की तरह शत प्रतिशत रहा.
101
5. कभी शौचालय और पानी की व्यवस्था नहीं थी, अब लाइब्रेरी व लैब की भी सुविधा
राजकीय स्कूल पधाना और शामगढ़ में कुछ साल पहले शौचालय और पीने के पानी तक की भी व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में यहां पर अभिभावक बच्चों को पढ़ने के लिए नहीं भेजते थे। आज यहां लाइब्रेरी के अलावा साइंस और कंप्यूटर लैब की भी सुविधा है। ऐसा हुआ वर्तमान में निसिंग के राजकीय कन्या विद्यालय की प्रिंसिपल मनदीप शर्मा की मेहनत से. उन्होंने बताया कि पधाना के राजकीय स्कूल के सुधार के लिए उन्होंने अपनी जेब, साथी शिक्षकों और ग्रामीणों का सहयोग लिया। जबकि शामगढ़ स्कूल के सुधार के लिए अपने खर्च के अलावा एडीसी कार्यालय से 35 लाख रुपये अलग-अलग प्रोजेक्ट के रूप में मिले। अगस्त 2021 में कुटेल स्कूल के मुखिया के रूप में जिम्मेदारी मिली। वैसे उनकी 2012 में पधाना गांव के स्कूल में राजनीतिक विज्ञान की प्राध्यापिका के रूप में तैनाती हुई थी। स्कूल की खराब स्थिति को देखते हुए सुधार का जिम्मा उठाया। 2015 तक स्थिति बदली तो मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण प्रतियोगिता में स्कूल जिले में प्रथम रहा। 2016 की ट्रांसफर ड्राइव में उनका तबादला शामगढ़ स्कूल में हो गया।
बॉक्स
एडीसी को स्कूल की दयनीय स्थिति की फोटो दिखाई तो शुरू हुआ काम
मनदीप शर्मा ने बताया कि 2016 में शामगढ़ स्कूल में भी कोई व्यवस्था नहीं थी। पुराने भवनों की बरसात में छत टपकती थी। स्कूल में साथियों का सहयोग नहीं मिला तो हालात की फोटो खींचकर एडीसी कार्यालय पहुंच गई। यहां तत्कालीन एडीसी निशांत यादव को स्थिति दिखाई। तो शौचालयों से लेकर भवन की मरम्मत के लिए अलग-अलग प्रोजेक्ट में 35 लाख रुपये ग्रांट मिली। खुद लेबर लगाकर देर शाम तक काम कराया और स्थिति सुधारी।
.....
107 से 109 बड़ा फोटो भी है।
6. तीन शिक्षकों ने मेहनत कर हटाया बदहाली का दाग, अब बच्चों के लिए यहां है मॉडर्न कीचन, टॉयलेट और क्लास रूम
-सुंदरीकरण में राजकीय प्राथमिक पाठशाला नन्हेड़ा को मिल चुका नंबर-1 स्कूल का खिताब
.. जिले में एक स्कूल ऐसा भी है, जहां छह साल पहले अपने बच्चों को कोई पढ़ाना तो दूर देखना भी पसंद नहीं करता था। आज उस स्कूल की स्थिति ऐसी है कि छुट्टी के बाद भी बच्चे घर नहीं जाते है। यह बदली स्थिति इंद्री खंड के नन्हेड़ा स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला की है, जिसे जनवरी 2017 में जिले की नंबर-1 पाठशाला का खिताब भी मिल चुका है। इस उपलब्धि के लिए तीन शिक्षक इंचार्ज महेंद्र कुमार, उधम सिंह और सुनील की कड़ी मेहनत लगी। जिन्होंने न केवल स्कूल के रंग रूप को बदला, बल्कि कीचन और टॉयलेट को अपने वेतन से मॉडर्न बनाया। वहीं क्लास रूप में भी विद्यार्थियों को घर जैसा माहौल और सुविधाएं दी। इसके अलावा खाली मैदान को सुंदर पार्क में तब्दील करते हुए यहां झुले और ओपन एयर जिम भी लगा डाला। इसके अलावा पूरी तरह से टाट फ्री हुए स्कूल में 16 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भी होती है। तीन किलो वाट का सोलर पैनल लगवाकर 24 घंटे बिजली-पानी का प्रबंध किया। वहीं बच्चों के लिए शौचालय में इंग्लिश सीट, वाटर कूलर और घर जैसी मॉड्यूलर किचन बनी है।
बॉक्स
झाड़ियों से अटा मैदान अब औषधि और फलदार पौधों की बगिया
एक समय में पाठशाला के मैदान का कुछ हिस्सा झाड़ियों से अटा था, तो कुछ बंजर भूमि की तरह धूल के गुबार उड़ाता था। सितंबर 2016 में स्कूल ज्वाइन करने के बाद शिक्षक महेंद्र ने इसकी स्थिति सुधारने का विचार किया। उनके साथी शिक्षक उधम सिंह ने खुद ट्रैक्टर चलाकर मैदान को समतल बनाया। फिर नर्सरी से पौधे लाकर पार्क का रूप दे दिया। तीन एकड़ जमीन पर बनीं पाठशाला में हर प्रकार के फूलों, औषधि और फलदार पौधे काफी सुकून देते हैं।
...
119
7. - 12 वर्षों में शिक्षक सतपाल मलिक ने लिखे 14 नाटक
कर्ण नगरी का एक शिक्षक लोक संस्कृति के वजूद को मजबूती दे रहे हैं। उनका मानना है कि हमारी संस्कृति विश्व में सर्वोपरि है। यदि संस्कृति से कट जाएंगे तो इसके दूरगामी घातक परिणाम हो सकते हैं। शिष्यों को पढ़ाने के साथ-साथ संस्कृति को कायम रखने में हिंदी अध्यापक सतपाल मलिक 12 वर्षों से समर्पित हैं।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ागांव में कार्यरत में शिक्षक अब तक 14 नाटक लिख चुके हैं। इसके अलावा हरियाणवी लोक संस्कृति से जुड़ी कविताएं और गीतों की रचना कर चुके हैं। इन रचनाओं की प्रस्तुति प्रदेश स्तर तक के कार्यक्त्रस्मों में छाप छोड़ चुकी है। इनके द्वारा रचित नाटकों को रंगमंच पर युवा रंगकर्मी मंचित करते हुए स्वयं को किरदार में सहज ही ढालते हैं। बेहतर प्रस्तुति से कई विद्यार्थी रंगकर्मी पुरस्कार विजेता भी बने।
बॉक्स
एक घटना ने झंझोड़ा दिल, तभी संस्कृति को बनाया हथियार
शिक्षक मलिक ने बताया कि सन 2010 में बुजुर्गों के अपमान होने और वृद्धाश्रम में जाने के कई मामले आए थे। अखबारों में रोजाना ऐसी खबरें भी पढ़ने को मिली थीं। इन घटनाओं पर प्रहार करने के लिए उन्होंने लोक संस्कृति को अपना हथियार बनाया। नाटकों के माध्यम से स्कूल और कॉलेजों में जाकर संदेश देने लगे। शुरुआत में सकारात्मक असर दिखा तो ये नाटकों का सिलसिला साल दर साल आगे बढ़ता गया। हर वर्ष वे नए मुद्दे पर नाटक तैयार कर जागरूक करने लगे। अब भी स्कूल की छुट्टी के बाद या अवकाश के दिन वे गांवों में नाटक का मंचन करते हैं।
....
फोटो 106
एक प्रयास बना बुनियाद बदलाव का...
कानों से सुनी एक छोटी सी घटना भी समाज में बदलाव की बुनियाद बन सकती है। कब, कैसे, क्या हो जाए? ये सब बातें फिर पलक झपकने सी लगती है। घर की शुरू हुए एक अनजाने प्रयास कब किसी के जीवन में बदलाव ला दे, इसका कुछ पता नहीं चलता। डेंटिस्ट बेटी कीर्ति गुप्ता को एक घटना ने पढ़ाई के दौरान ही टीचर बना दिया। जिसके बाद डेंटिस्ट कीर्ति गुप्ता ने गरीब व जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को अक्षर ज्ञान देना शुरू कर दिया। एक सीख के साथ सात बच्चों से शुरू हुई पुकार वक्त की.. संस्था की कक्षा में आज 130 से ज्यादा बच्चे निशुल्क पढ़ाई करते हैं। 7 फरवरी 2014 से चल रही संस्था की शिक्षा क्लास में 75 टीचर निशुल्क सहयोग कर रहे हैं और अब तक 62 बच्चों का सीबीएसई स्कूलों में दाखिला कराया जा चुका है
......
आज इन 9 शिक्षकों को मिलेगा राज्य शिक्षक पुरस्कार
( वर्ष 2020 के लिए)
फोटो-- 105
सियाराम शास्त्री, टीजीटी संस्कृत, राजकीय माध्यमिक विद्यालय घीसरपुरी
उपलब्धि : 2006 में साथी शिक्षक को यह पुरस्कार मिला था। तभी से इसके लिए प्रयास शुरू किए थे। सन 2000 में नियमित संस्कृत शिक्षक के रूप में नियुक्ति हुई। कई सालों से स्काउट एंड गाइड, कानूनी साक्षरता, सांस्कृतिक गतिविधियां, भाखड़ा बांध मैनेजमेंट बोर्ड और रेडक्त्रसस के जिला समन्वयक हैं। जिले का नाम प्रदेश स्तर पर चमकाया। परीक्षा परिणाम भी अच्छा रहा।
...
फोटो--- 106
अनिल कुमार, जेबीटी, राजकीय उच्च विद्यालय अर्बन अस्टेट सेक्टर-13, जेबीटी
उपलब्धि : सन 2000 में नियुक्ति हुई। 2013 से करनाल में कार्यरत हैं। प्राइमरी खेलों में तीन साल तक इनकी टीमें प्रदेश में प्रथम रही। सर्व शिक्षा अभियान के टीचर लर्निंग मैटिरियल प्रतियोगिता में भी तीन साल पुरस्कार जीते। 2017 से स्काउट में कब बुलबुल के जिला संगठन आयुक्त हैं। 2018 में कब बुलबुल में बेहतर कार्य के लिए राज्य स्तरीय गवर्नर अवार्ड मिला।
..
फोटो-- 107
-गायित्री देवी, टीजीटी संस्कृत, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल तरावड़ी
उपलब्धि : 1998 में हिसार में नियुक्ति हुई थी। 2005 से तरावड़ी स्कूल में कार्यरत हैं। 2015 तक 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाने का मौका भी मिला। हर बार परीक्षा परिणाम शानदार रहा। गीता जयंती अैर प्रदेश स्तरीय कानूनी साक्षरता पर आने वाले कार्यक्त्रस्म में इनकी टीमों ने पुरस्कार जीते हैं। इस पुरस्कार के बारे में कभी सोचा नहीं था। रमाना रमानी स्कूल के मुख्याध्यापक पति अमन शर्मा, स्कूल के प्रिंसिपल विवेक भैणीवाल, पूर्व प्रिंसिपल संतोष बैरागी और पूर्व डीपीसी ओमपाल बालियान का उपलब्धियों में सहयोग रहा।
..
फोटो--108
-नरेंद्र मान, जेबीटी, राजकीय प्राथमिक स्कूल टपराना
उपलब्धि : 2000 में नियुक्ति हुई थी। खेलों में हर साल जिला टीम लेकर प्रदेश में गए हैं और पुरस्कार भी जीते। 2017 तक करनाल के मॉडल टाउन स्कूल कार्यरत थे, उस समय सुंदरता में स्कूल प्रथम आया था। 2018 में उसके बाद टपराना स्कूल आ गए, फिर ये स्कूल भी स्वच्छता में प्रथम आया। पुरस्कार बच्चों को समर्पित किया।
...
फोटो--- 109
-डॉ. राधेश्याम, हिंदी टीचर, राजकीय उच्च विद्यालय नगला मेघा
उपलब्धि : ग्राम पंचायत और स्टाफ के साथ मिलकर स्कूल को सुंदर बनाया। पहले स्कूल बदहाल था। बच्चों को लॉकडाउन में भी अतिरिक्त कक्षाएं लेकर पढ़ाया। पीएचडी होने के नाते अब तक तीन किताबें भी लिख चुके हैं। इनमें से दो किताबें लघु कथाएं और एक बच्चों की कहानियों पर आधारित है। अब तक कई रक्तदान शिविर भी आयोजित किए।
.....
( वर्ष 2021 के लिए)
फोटो--- 101
रेणू मलिक , प्रिंसिपल, जीएसएसएस घीड़
उपलब्धि : सेक्टर-13 निवासी रेणू के स्कूल का परीक्षा परिणाम हमेशा 90 प्रतिशत से ऊपर रहा। बच्चों को पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी हिस्सा दिलाती हैं। एजूकेशन में पीएचडी किया है। अतिरिक्त कक्षाएं लगाने, लाइब्रेरी को तैयार करने के लिए स्थानीय स्तर पर भी कई बार संस्थाओं से सम्मानित हो चुकी हैं। 1991 में अहरकुराना पानीपत में कॉमर्स लेक्चरर के रूप में नियुक्ति हुई। दिसंबर 1991 में प्रेमनगर स्कूल में पोस्टिंग हो गई। यहीं पर पदोन्नति के बाद 2012 में प्रिंसिपल बनी और नरूखेड़ी में पहली पोस्टिंग हुई। अब 2017 में घीड़ में प्रिंसिपल के रूप में कार्यरत हैं।
---
फोटो-- 102
रामनिवास सोलंकी, मुख्याध्यापक, जीपीएस प्रेमनगर
उपलब्धि : 2014 से इसी स्कूल में हैं। इससे पहले 2004 से जयसिंहपुरा स्कूल में रहे। मुख्यमंत्री स्कूल सुंदरीकरण का खंड स्तर पर दो बार जयसिंहपुरा और दो बार प्रेमनगर स्कूल को पुरस्कार मिला। तीन बार उपायुक्त ने सम्मानित किया। एडीसी से भी स्वच्छता का खिताब ले चुके हैं। स्कूल में लगभग 800 बच्चे हैं। चार हाउस बनाकर उनमें गतिविधियां कराते हैं। अवार्ड का श्रेय स्टाफ को सहयोग और उच्चाधिकारियों के मार्गदर्शन को दिया। दो दिसंबर 1997 को असंध के रत्तक गांव में जेबीटी टीचर के रूप में पहली नियुक्ति हुई थी।
---
फोटो-- 103
अनीता रानी, हिंदी, जीएमएस हैबतपुर
उपलब्धि : कुरुक्षेत्र की विज कॉलोनी की रहने वाली शिक्षिका स्वयं भी विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं। कला उत्सव में पुरस्कार जीते, इसके अलावा जिला स्तर पर दो बार नृत्य में प्रथम और पेंटिंग में तृतीय रहीं। राज्य स्तर पर मोनो एक्टिंग में भी प्रथम पुरस्कार जीता। निजी स्कूलों के 12 बच्चों को हैबतपुर के सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया। दिसंबर 1997 में बल्ला में पहली नियुक्ति हुई। नौकरी के साथ-साथ एम फील किया। 2001 में गुढ़ा ट्रांसफर हुआ। इसके बाद 2005 से 2019 तक अंजनथली के स्कूल में सेवाएं दी। शुरुआत में 42 बच्चे थे। स्कूल भी मिडल से अब स्कूल सीनियर सेकेंडरी है और 350 छात्र संख्या है। हैबतपुर में भी अच्छे कार्य के लिए सम्मानित हुए। पति भारत भूषण भी इसी स्कूल में गणित के शिक्षक हैं। हरियाणा भूषण अवार्ड भी मिल चुका है।

-------------
फोटो--- 104
डॉ. जीत सिंह मान, पीजीटी संस्कृत, जीएसएसएस कुटेल
उपलब्धि : सेक्टर-9 निवासी शिक्षक संस्कृत में पीएचडी हैं। अब तक का परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत रहा। स्कूल में विभाग की योजनाओं को लागू करने के लिए 2019 में उपायुक्त और एसीएस से भी सम्मानित हो चुके हैं। 2021 में स्कूल की छात्र संख्या 1100 तक करने पर एडीसी ने भी सम्मानित किया। बेटियों को बोर्ड की परीक्षा देने के लिए दूर न जाना पड़े, इसलिए 2018 से स्कूल को हरियाणा बोर्ड का परीक्षा केंद्र बनवाने की स्वीकृति दिलाई। 11 मार्च 1995 को लेक्चरर के रूप में सोनीपत के खुबडू गांव के स्कूल में पहली पोस्टिंग हुई। 2003 में नीलोखेड़ी स्कूल में आए। 2016 से कुटेल में कार्यरत हैं। 2021 में आठ माह प्रिंसिपल के रूप में भी कार्यभार संभाला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed