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Karnal News: स्कूलों में निजी पुस्तकों की जांच करेगी छह कमेटियां
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- जिला शिक्षा अधिकारी ने खंड स्तर पर गठित कराई कमेटियां
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नया सत्र शुरू होने से पहले ही दाखिले करते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने वाले स्कूलों की अब खैर नहीं है। शिक्षा विभाग की टीम अब इन स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए कार्रवाई करेगी। निदेशालय के निर्देशानुसार, जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी छह खंडों के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की हैं।
खंड स्तरीय कमेटियां अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाएंगी और किताबों की जांच करेंगी। ये कमेटियां रिपोर्ट बनाएंगी कि किस स्कूल ने किस कक्षा में एनसीईआरटी की किताबें लगवाईं हैं और कौन सा स्कूल निजी प्रकाशकों पर मेहरबान हुआ है। कमेटियां औचक निरीक्षक करते हुए इस माह के अंत तक रिपोर्ट पेश करेंगी। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से इस संदर्भ में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
विदित हो कि अमर उजाला ने निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने का मुद्दा उठाया था। 11 अप्रैल के अंक में स्कूलों की मनमानी हावी, निजी पुस्तकों से जेब ढीली.. शीर्षक से इस विषय पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए अब जिला शिक्षा अधिकारी ने कमेटियां गठित की हैं। ताकि मनमानी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जा सके। जिले में सीबीएसई के 120 और एचबीएसई के करीब 250 निजी स्कूल हैं। जहां हर साल करीब दो लाख विद्यार्थी दाखिला लेकर पढ़ाई करते हैं।
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छह हजार रुपये तक बिका किताबों का सेट
निदेशालय के अनुसार, स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जा सकती हैं। लेकिन स्कूलों ने निजी पुस्तक प्रकाशकों पर मेहरबानी करते हुए एनसीईआरटी की किताबों को दरकिनार कर दिया गया है जबकि इन्हीं किताबों का लगाया जाना अनिवार्य है। स्कूलों की ओर से प्रकाशकों के साथ मिलकर विशेष तौर पर सेट तैयार कराए गए हैं। जिनकी कीमत कक्षा अनुसार, 2500 रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक है। जबकि एनसीईआरटी की किताबों का सेट 250 रुपये से लेकर 950 रुपये तक में उपलब्ध हो जाता है। 50 से 60 फीसदी तक होता है कमीशन
निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के पीछे उनका अपना स्वार्थ होता है। जबकि वे अभिभावकों को बेहतर शिक्षा और परीक्षा परिणाम का हवाला देते हुए इन किताबों को खरीदने का दबाव बनाते हैं। किताबों का प्रति सेट पांच सौ से एक हजार रुपये तक का कमीशन होता है। इसके अलावा स्कूल की किताबों पर 50 प्रतिशत तक का कमीशन अलग से है, जिसका निजी प्रकाशक भुगतान करते हैं।
एनसीईआरटी की किताबें न लगवाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसे लेकर जांच के लिए खंड स्तर पर कमेटियां बनाई हैं। खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटियां जांच करके रिपोर्ट सौंपेंगी।
- सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। नया सत्र शुरू होने से पहले ही दाखिले करते हुए निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने वाले स्कूलों की अब खैर नहीं है। शिक्षा विभाग की टीम अब इन स्कूलों पर शिकंजा कसते हुए कार्रवाई करेगी। निदेशालय के निर्देशानुसार, जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी छह खंडों के लिए अलग-अलग कमेटियां गठित की हैं।
खंड स्तरीय कमेटियां अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाएंगी और किताबों की जांच करेंगी। ये कमेटियां रिपोर्ट बनाएंगी कि किस स्कूल ने किस कक्षा में एनसीईआरटी की किताबें लगवाईं हैं और कौन सा स्कूल निजी प्रकाशकों पर मेहरबान हुआ है। कमेटियां औचक निरीक्षक करते हुए इस माह के अंत तक रिपोर्ट पेश करेंगी। जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से इस संदर्भ में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
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विदित हो कि अमर उजाला ने निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने का मुद्दा उठाया था। 11 अप्रैल के अंक में स्कूलों की मनमानी हावी, निजी पुस्तकों से जेब ढीली.. शीर्षक से इस विषय पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। इस पर संज्ञान लेते हुए अब जिला शिक्षा अधिकारी ने कमेटियां गठित की हैं। ताकि मनमानी करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई की जा सके। जिले में सीबीएसई के 120 और एचबीएसई के करीब 250 निजी स्कूल हैं। जहां हर साल करीब दो लाख विद्यार्थी दाखिला लेकर पढ़ाई करते हैं।
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छह हजार रुपये तक बिका किताबों का सेट
निदेशालय के अनुसार, स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें ही लगाई जा सकती हैं। लेकिन स्कूलों ने निजी पुस्तक प्रकाशकों पर मेहरबानी करते हुए एनसीईआरटी की किताबों को दरकिनार कर दिया गया है जबकि इन्हीं किताबों का लगाया जाना अनिवार्य है। स्कूलों की ओर से प्रकाशकों के साथ मिलकर विशेष तौर पर सेट तैयार कराए गए हैं। जिनकी कीमत कक्षा अनुसार, 2500 रुपये से लेकर छह हजार रुपये तक है। जबकि एनसीईआरटी की किताबों का सेट 250 रुपये से लेकर 950 रुपये तक में उपलब्ध हो जाता है। 50 से 60 फीसदी तक होता है कमीशन
निजी स्कूलों द्वारा निजी प्रकाशकों की किताबें लगवाने के पीछे उनका अपना स्वार्थ होता है। जबकि वे अभिभावकों को बेहतर शिक्षा और परीक्षा परिणाम का हवाला देते हुए इन किताबों को खरीदने का दबाव बनाते हैं। किताबों का प्रति सेट पांच सौ से एक हजार रुपये तक का कमीशन होता है। इसके अलावा स्कूल की किताबों पर 50 प्रतिशत तक का कमीशन अलग से है, जिसका निजी प्रकाशक भुगतान करते हैं।
एनसीईआरटी की किताबें न लगवाने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसे लेकर जांच के लिए खंड स्तर पर कमेटियां बनाई हैं। खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटियां जांच करके रिपोर्ट सौंपेंगी।
- सुदेश ठुकराल, जिला शिक्षा अधिकारी