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Karnal News: सीएचसी तरावड़ी में भवन व स्टाफ की कमी
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पीएचसी से सीएचसी में अपग्रेड होने के बावजूद नहीं मिल रही पर्याप्त सुविधाएं
डॉक्टरों के सात पद स्वीकृत, पांच पद पड़े हैं खाली, मरीजों को नहीं मिला इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अपग्रेड हुआ अस्पताल में सुविधा ना के बराबर है। अपग्रेड होने के बावजूद 30 बेड की बजाय पीएचसी स्तर वाले मात्र 12 बेड की ही सुविधा मिली हुई है। इसमें छह बेड जनरल वार्ड और छह बेड महिला वार्ड में लगाए गए हैं। इसका खामियाजा कार्यरत स्टाफ और यहां पर अपना इलाज कराने वाले मरीज भुगत रहे हैं।
विदित है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तरावड़ी पीएचसी के पुराने भवन में चल रही है। सीएचसी में हर साल मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है लेकिन उस स्तर की सुविधाएं यहां पर नहीं मिल रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते अधिकतर समय एक बेड पर कई-कई मरीजों को बैठाकर व लेटाकर इलाज करना डॉक्टरों और स्टाफ के लिए चुनौती बना हुआ है।
बेड के साथ-साथ कमरों की भी भारी कमी है। ऐसे में डॉक्टरों को बाहर बैठकर अपना इलाज करना पड़ता है। डॉक्टरों की स्थिति पर नजर डाले तो यहां पर सात डॉक्टरों के स्वीकृत पद है। इनमें से पांच भरे हुए है और दो पद खाली है। वहीं, रियलटी चेक में एक डॉक्टर पीजी कोर्स में गए हैं। एक डॉक्टर ड्यूटी से गैर-हाजिर है और एक डॉक्टर मेटरनिटी लीव पर है। ऐसे में सात में से दो ही डॉक्टर सीएचसी में काम कर रहे हैं। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
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दो सेंटर एक कमरे में चलाने पर मजबूर
सीएचसी के भवन में कमरों की कमी के कारण लैब और टीबी जांच केंद्र एक की कमरे में चलाने में स्थानीय अधिकारी चलाने पर मजबूर है। टीबी की जांच के लिए अलग से कमरा होना चाहिए लेकिन दोनों जांच केंद्र एक में ही चलने के कारण टीबी के मरीजों से अन्य मरीजों को टीबी होने का खतरा बढ़ा रहता है।
सीएचसी में मशीनों की भी कमी
सीएचसी तरावड़ी में ईसीजी, सीआरसी सहित अन्य सामान्य जांच के लिए भी मशीनें नहीं है और पिछले काफी समय से लोगों की मांग है कि यहां पर अल्ट्रासाउंड मशीन भी लगाई जाए लेकिन वह भी फिलहाल यहां पर लगाती हुई नजर नहीं आ रही। वहीं, पिछले दो साल से सीएचसी को 50 बेड का अपग्रेड कर दिया है।
इसके लिए पास में बिल्डिंग निर्माणाधीन है लेकिन उसका निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है, जब तक यह बिल्डिंग बनकर पूरी तैयार नहीं होगी, तब तक पुराने भवन में स्टाफ और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
हड्डियों का नहीं डॉक्टर, मरीज परेशान
सौंकडा गांव निवासी कंवरजीत सिंह का कहना है कि यहां पर हड्डियों का डॉक्टर नहीं है। ऐसे में हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों खासकर बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को जेब ढीली कर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है या फिर जिला नागरिक अस्पताल में जाना पड़ता है।
अपग्रेड का नहीं मिला लाभ -
तखाना गांव निवासी सुदेश कहना है कि अपग्रेड होने का कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। घंटों तक बैठकर कर भी इलाज नहीं हो पाता है। वहीं, अगर डॉक्टर दवाइयां लिख देते हैं तो यहां पर सारी दवाइयां भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ती है।
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डॉक्टरों के सात पद स्वीकृत, पांच पद पड़े हैं खाली, मरीजों को नहीं मिला इलाज
संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अपग्रेड हुआ अस्पताल में सुविधा ना के बराबर है। अपग्रेड होने के बावजूद 30 बेड की बजाय पीएचसी स्तर वाले मात्र 12 बेड की ही सुविधा मिली हुई है। इसमें छह बेड जनरल वार्ड और छह बेड महिला वार्ड में लगाए गए हैं। इसका खामियाजा कार्यरत स्टाफ और यहां पर अपना इलाज कराने वाले मरीज भुगत रहे हैं।
विदित है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तरावड़ी पीएचसी के पुराने भवन में चल रही है। सीएचसी में हर साल मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाती है लेकिन उस स्तर की सुविधाएं यहां पर नहीं मिल रही है। मरीजों की बढ़ती संख्या के चलते अधिकतर समय एक बेड पर कई-कई मरीजों को बैठाकर व लेटाकर इलाज करना डॉक्टरों और स्टाफ के लिए चुनौती बना हुआ है।
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बेड के साथ-साथ कमरों की भी भारी कमी है। ऐसे में डॉक्टरों को बाहर बैठकर अपना इलाज करना पड़ता है। डॉक्टरों की स्थिति पर नजर डाले तो यहां पर सात डॉक्टरों के स्वीकृत पद है। इनमें से पांच भरे हुए है और दो पद खाली है। वहीं, रियलटी चेक में एक डॉक्टर पीजी कोर्स में गए हैं। एक डॉक्टर ड्यूटी से गैर-हाजिर है और एक डॉक्टर मेटरनिटी लीव पर है। ऐसे में सात में से दो ही डॉक्टर सीएचसी में काम कर रहे हैं। इसके चलते मरीजों को भारी परेशानी से जूझना पड़ रहा है।
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दो सेंटर एक कमरे में चलाने पर मजबूर
सीएचसी के भवन में कमरों की कमी के कारण लैब और टीबी जांच केंद्र एक की कमरे में चलाने में स्थानीय अधिकारी चलाने पर मजबूर है। टीबी की जांच के लिए अलग से कमरा होना चाहिए लेकिन दोनों जांच केंद्र एक में ही चलने के कारण टीबी के मरीजों से अन्य मरीजों को टीबी होने का खतरा बढ़ा रहता है।
सीएचसी में मशीनों की भी कमी
सीएचसी तरावड़ी में ईसीजी, सीआरसी सहित अन्य सामान्य जांच के लिए भी मशीनें नहीं है और पिछले काफी समय से लोगों की मांग है कि यहां पर अल्ट्रासाउंड मशीन भी लगाई जाए लेकिन वह भी फिलहाल यहां पर लगाती हुई नजर नहीं आ रही। वहीं, पिछले दो साल से सीएचसी को 50 बेड का अपग्रेड कर दिया है।
इसके लिए पास में बिल्डिंग निर्माणाधीन है लेकिन उसका निर्माण कार्य भी धीमी गति से चल रहा है, जब तक यह बिल्डिंग बनकर पूरी तैयार नहीं होगी, तब तक पुराने भवन में स्टाफ और लोगों को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
हड्डियों का नहीं डॉक्टर, मरीज परेशान
सौंकडा गांव निवासी कंवरजीत सिंह का कहना है कि यहां पर हड्डियों का डॉक्टर नहीं है। ऐसे में हड्डी रोग से पीड़ित मरीजों खासकर बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को जेब ढीली कर निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है या फिर जिला नागरिक अस्पताल में जाना पड़ता है।
अपग्रेड का नहीं मिला लाभ -
तखाना गांव निवासी सुदेश कहना है कि अपग्रेड होने का कोई लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। घंटों तक बैठकर कर भी इलाज नहीं हो पाता है। वहीं, अगर डॉक्टर दवाइयां लिख देते हैं तो यहां पर सारी दवाइयां भी नहीं मिल पाती है। ऐसे में उन्हें प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवाइयां खरीदनी पड़ती है।