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Karnal News: एसएचओ ने डॉक्टर को थप्पड़ मारा, तीन हजार से ज्यादा मरीजों ने भुगता खामियाजा
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पंजीकरण की खिड़की पर लगी मरिजों की भीड़। संवाद
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। घरौंडा के सरकारी अस्पताल में बुधवार को एसएचओ दीपक कुमार द्वारा डॉक्टर प्रशांत कुमार को थप्पड़ जड़ने के बाद विवाद बढ़ गया है। शुक्रवार को इसका खामियाजा जिले के तीन हजार से ज्यादा मरीजों को भुगतना पड़ा। वीरवार को घरौंडा में हड़ताल करने के बाद शुक्रवार को जिला स्तर पर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी।
शुक्रवार को जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रही जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज घंटों इंतजार करने के बाद लौट गए। सुबह से अस्पतालों में मरीजों की कतारें लगनी शुरू हो गई थी लेकिन डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण ओपीडी काउंटर बंद मिले। कुछ जगहों पर इमरजेंसी सेवाएं भी सीमित रहीं। गांवों से इलाज के लिए आए लोगों को ज्यादा दिक्कत हुई। पहली बार इमरजेंसी भी बंद रही।
कई मरीज दूरदराज के क्षेत्रों से बस और अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचे थे लेकिन उन्हें यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। ऐसे में उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। ऐसे में कई मरीज निजी अस्पताल गए तो कुछ ने मेडिकल कॉलेज की भीड़ में उपचार के लिए इंतजार किया। मेडिकल कॉलेज में 2138 मरीजों की ओपीडी में जांच हुई, जबकि रोजाना 1500 के करीब ओपीडी होती है। वहीं नागरिक अस्पताल में दो हजार और अन्य सभी अस्पतालों में एक हजार से ज्यादा ओपीडी होती है।
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कई किलोमीटर दूर से आए, नहीं मिले डॉक्टर
मरीज राजेश कुमार ने बताया कि वह सुबह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। काफी देर इंतजार करने के बाद उन्हें वापस जाना पड़ा। सुनीता देवी ने कहा कि वह अपने बच्चे को तेज बुखार के कारण अस्पताल लाई थीं लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा। महेंद्र सिंह ने बताया कि वह गांव से कई किलोमीटर दूर से आए थे लेकिन अस्पताल में ओपीडी बंद होने के कारण इलाज नहीं हो पाया। वहीं पूजा ने कहा कि वह एक मरीज को इमरजेंसी में लेकर आई थीं लेकिन यहां भी पूरी तरह से इलाज नहीं मिल पाया।
कोई 20 तो कोई 50 किलोमीटर दूर से आया
केस 1-- -
बिहार की सीमा ने बताया कि वे करनाल में मजदूरी का काम करती हैं। कुछ दिनों से उनके पेट में दर्द है। तो वे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सिविल अस्पताल आई थी लेकिन हड़ताल के चलते अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया और इलाज के लिए अल्ट्रासाउंड कराना है। पता नहीं अब कब अल्ट्रासाउंड होगा और कब इलाज मिल सकेगा।
केस 2-- -
ओंगद से आई बुजुर्ग महिला लक्ष्मी ने बताया कि उनको दिल की बीमारी है। कई दिनों से यहीं दिखा रहीं थीं। उन्होंने बताया कि दो दिनों से तबियत खराब हुई है जिस कारण आज यहां दिखाने आई थी। अब लौटना पड़ेगा। यह भी नहीं पता कि कब हालात सामान्य होंगे।
केस 3-- -
शामली से आए मनीष ने बताया कि वे अपने एक परिचित को दवाई दिलाने लाए थे। सुबह से सोचा था कि थोड़ी देर में हड़ताल खत्म हो जाएगी लेकिन अब दोपहर तक हड़ताल खत्म नहीं हुई है। अब वापस जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि जल्द ये विवाद सुलझे और जल्द डॉक्टर वापस आएं।
केस 4-- -
पुंडरक से आए दिव्याग विजेंद्र ने बताया कि वे 20 किमी दूर से ट्राईसाइकिल चला कर आए हैं लेकिन यहां पता चला कि इलाज ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनको दो साल से किडनी की समस्या है। अब वे किसी निजी अस्पताल में ही दिखाएंगे।
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करनाल। घरौंडा के सरकारी अस्पताल में बुधवार को एसएचओ दीपक कुमार द्वारा डॉक्टर प्रशांत कुमार को थप्पड़ जड़ने के बाद विवाद बढ़ गया है। शुक्रवार को इसका खामियाजा जिले के तीन हजार से ज्यादा मरीजों को भुगतना पड़ा। वीरवार को घरौंडा में हड़ताल करने के बाद शुक्रवार को जिला स्तर पर डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल कर दी।
शुक्रवार को जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रही जिससे इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मरीज घंटों इंतजार करने के बाद लौट गए। सुबह से अस्पतालों में मरीजों की कतारें लगनी शुरू हो गई थी लेकिन डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के कारण ओपीडी काउंटर बंद मिले। कुछ जगहों पर इमरजेंसी सेवाएं भी सीमित रहीं। गांवों से इलाज के लिए आए लोगों को ज्यादा दिक्कत हुई। पहली बार इमरजेंसी भी बंद रही।
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कई मरीज दूरदराज के क्षेत्रों से बस और अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचे थे लेकिन उन्हें यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। ऐसे में उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा। ऐसे में कई मरीज निजी अस्पताल गए तो कुछ ने मेडिकल कॉलेज की भीड़ में उपचार के लिए इंतजार किया। मेडिकल कॉलेज में 2138 मरीजों की ओपीडी में जांच हुई, जबकि रोजाना 1500 के करीब ओपीडी होती है। वहीं नागरिक अस्पताल में दो हजार और अन्य सभी अस्पतालों में एक हजार से ज्यादा ओपीडी होती है।
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कई किलोमीटर दूर से आए, नहीं मिले डॉक्टर
मरीज राजेश कुमार ने बताया कि वह सुबह इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे लेकिन यहां आकर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। काफी देर इंतजार करने के बाद उन्हें वापस जाना पड़ा। सुनीता देवी ने कहा कि वह अपने बच्चे को तेज बुखार के कारण अस्पताल लाई थीं लेकिन डॉक्टर न मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा। महेंद्र सिंह ने बताया कि वह गांव से कई किलोमीटर दूर से आए थे लेकिन अस्पताल में ओपीडी बंद होने के कारण इलाज नहीं हो पाया। वहीं पूजा ने कहा कि वह एक मरीज को इमरजेंसी में लेकर आई थीं लेकिन यहां भी पूरी तरह से इलाज नहीं मिल पाया।
कोई 20 तो कोई 50 किलोमीटर दूर से आया
केस 1
बिहार की सीमा ने बताया कि वे करनाल में मजदूरी का काम करती हैं। कुछ दिनों से उनके पेट में दर्द है। तो वे अल्ट्रासाउंड कराने के लिए सिविल अस्पताल आई थी लेकिन हड़ताल के चलते अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया और इलाज के लिए अल्ट्रासाउंड कराना है। पता नहीं अब कब अल्ट्रासाउंड होगा और कब इलाज मिल सकेगा।
केस 2
ओंगद से आई बुजुर्ग महिला लक्ष्मी ने बताया कि उनको दिल की बीमारी है। कई दिनों से यहीं दिखा रहीं थीं। उन्होंने बताया कि दो दिनों से तबियत खराब हुई है जिस कारण आज यहां दिखाने आई थी। अब लौटना पड़ेगा। यह भी नहीं पता कि कब हालात सामान्य होंगे।
केस 3
शामली से आए मनीष ने बताया कि वे अपने एक परिचित को दवाई दिलाने लाए थे। सुबह से सोचा था कि थोड़ी देर में हड़ताल खत्म हो जाएगी लेकिन अब दोपहर तक हड़ताल खत्म नहीं हुई है। अब वापस जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मैं प्रशासन से मांग करता हूं कि जल्द ये विवाद सुलझे और जल्द डॉक्टर वापस आएं।
केस 4
पुंडरक से आए दिव्याग विजेंद्र ने बताया कि वे 20 किमी दूर से ट्राईसाइकिल चला कर आए हैं लेकिन यहां पता चला कि इलाज ही उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि उनको दो साल से किडनी की समस्या है। अब वे किसी निजी अस्पताल में ही दिखाएंगे।

पंजीकरण की खिड़की पर लगी मरिजों की भीड़। संवाद