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भू पातालेश्वर मंदिर में स्वयं प्रकट हुआ था शिवलिंग
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113-असंध. भू पातालेश्वर मन्दिर मे शिवलिंग की पूजा करते श्रद्धालु।
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असंध। शहर के वार्ड-5 में बना भू-पातालेश्वर मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। श्रावण मास में तो पूजा अर्चना का यहां विशेष महत्व है। श्रावण महीने में शिव भक्त रोजाना सुबह मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव की पूजा करते है। मंदिर का भी अपना एक इतिहास है।
लगभग 200 वर्ष पुराना मंदिर एक जमाने में शहर के बाहर हुआ करता था। लेकिन लगातार विकास के बाद अब यह शहर के बीच में स्थित है। भू पातालेश्वर मंदिर में प्रत्येक वर्ष त्रयोदशी को विशेष भंडारा भी लगाया जाता है। मंदिर समिति के प्रधान रामनिवास गोयल ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग को किसी ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह अपने आप ही भूमि से प्रकट हुआ था। पुराने समय में एक समुदाय द्वारा शिवलिंग को यहां से तीन बार हटाया गया था। लेकिन बावजूद उसके भी शिवलिंग उसी जगह दोबारा फिर अपने आप धरती से निकल आया। इसीलिए मंदिर भू पातालेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां मांगी हर मन्नत पूरी होती है। हर त्रयोदशी को यहां भंडारा का आयोजन किया जाता है।
विवाह मंगल कामना पूजा के लिए आते हैं श्रद्धालु
पंडित राजपाल शास्त्री ने बताया कि मंदिर में विवाह मंगल कामना के लिए भी श्रद्धालुु दूर दूर से आते हैं। जो परिवार अब यहां से जाकर दूसरे राज्यों में बसे हैं। जब किसी का विवाह हो जाता है तो उसके बाद मंगल कामना पूजा हेतु असंध पहुंचते हैं। वहीं सावन के महीने में श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से आते हैं व भगवान शिव सब भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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लगभग 200 वर्ष पुराना मंदिर एक जमाने में शहर के बाहर हुआ करता था। लेकिन लगातार विकास के बाद अब यह शहर के बीच में स्थित है। भू पातालेश्वर मंदिर में प्रत्येक वर्ष त्रयोदशी को विशेष भंडारा भी लगाया जाता है। मंदिर समिति के प्रधान रामनिवास गोयल ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग को किसी ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह अपने आप ही भूमि से प्रकट हुआ था। पुराने समय में एक समुदाय द्वारा शिवलिंग को यहां से तीन बार हटाया गया था। लेकिन बावजूद उसके भी शिवलिंग उसी जगह दोबारा फिर अपने आप धरती से निकल आया। इसीलिए मंदिर भू पातालेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर की मान्यता है कि यहां मांगी हर मन्नत पूरी होती है। हर त्रयोदशी को यहां भंडारा का आयोजन किया जाता है।
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विवाह मंगल कामना पूजा के लिए आते हैं श्रद्धालु
पंडित राजपाल शास्त्री ने बताया कि मंदिर में विवाह मंगल कामना के लिए भी श्रद्धालुु दूर दूर से आते हैं। जो परिवार अब यहां से जाकर दूसरे राज्यों में बसे हैं। जब किसी का विवाह हो जाता है तो उसके बाद मंगल कामना पूजा हेतु असंध पहुंचते हैं। वहीं सावन के महीने में श्रद्धालु पूरे श्रद्धा भाव से आते हैं व भगवान शिव सब भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
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