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जिले में आज 95830 क्विंटल की खरीदने के बाद सीजन खत्म
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। तीन नवंबर के बाद रविवार को हरियाणा सरकार ने जिले की करनाल, इंद्री, असंध, घरौंडा आदि पांच अनाज मंडियों में अपराह्न दो बजे तक तहसीलदार से सत्यापित धान की खरीद की। जिसमें रविवार को कुल 95830 क्विंटल धान की खरीद की गई। इसके बाद इस सीजन की धान की खरीद को विराम दे दिया गया। इस सीजन में कुल खरीद 10612200 क्विंटल की गई। जो पिछले साल की गई 13571290 क्विंटल के सापेक्ष 2959090 क्विंटल कम है। इसी के साथ अब सीमांत राज्यों के किसानों से धान की खरीद की संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा पीआर धान की सरकारी खरीद का आज अंतिम दिन था। सरकार ने इस बार बिना किसी पूर्व सूचना के दिवाली से एक दिन पूर्व तीन नवंबर को यह कहकर खरीद बंद की थी, कि दिवाली के कारण खरीद सात नवंबर तक बंद रहेगी लेकिन इसके बाद सैकड़ो की संख्या में किसान धान की ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर मंडियों में डटे रहे लेकिन सरकार के पास सूचना पहुंची कि उत्तरप्रदेश आदि सीमांत राज्यों से बड़ी संख्या में धान करनाल आदि अनाज मंडियों में पहुंच चुका है। जिसे आढ़ती, राइस मिलर्स, मंडी कर्मचारी व खरीद एजेंसियों के कर्मचारी मिलकर खेल कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए दिवाली के बाद खरीद नहीं खोली गई। किसानों ने कई स्थानों पर हंगामा किया। रोडजाम किया। तब जाकर सरकार सत्यापन के बाद धान खरीदने को राजी हुई। रविवार को तहसीलदार द्वारा सत्यापित धान खरीदा गया। अपराह्न दो बजे के बाद गेटपास बंद कर दिए गए थे। हालांकि कई किसान मंडी में अपने धान के सत्यापित अभिलेख दिखाते रहे। क्योंकि काफी किसान ऐसे थे, जिन्होंने बिना गेटपास के ही किराये की ट्रैक्टर ट्रालियां होने के कारण धान को मंडी में डालकर ढेरी लगा ली थी। उनका धान नहीं बिक पाया।
सीमांत राज्यों का धान न खरीदने से बढ़ी चिंता
-आढ़तियों व राइस मिलर्स की चिंता काफी बढ़ गई है, क्योंकि उन्होंने करोड़ो रुपये धान खरीद के लालच में यूपी के किसानों को दे रखा है, अब यूपी के किसानों का धान हरियाणा की मंडियों में आने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं, जिससे उनका करोड़ो रुपये फंस सकता है।हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि सीमांत राज्यों के किसानों का पंजीकरण कराने के बाद भी धान न खरीदना किसानों के साथ भी धोखा है। इसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ेगा।
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अनाज मंडी खरीद (क्विंटल में)
असंध 1513300
बल्लाह 93000
बयाना 112710
घरौंडा 1579210
घीड़ 133960
इंद्री 1175330
जुंडला 912160
करनाल 2140630
कुंजपुरा 413600
निगदू 365360
नीलोखेड़ी 140670
निसिंग 1111500
तरावड़ी 920770
खुल खरीद 10612200
मंडी में पांच दिन बाद काटे पीआर धान के 93 गेटपास
निसिंग।
अनाजमंडी में सात अक्तूबर के बाद पीआर धान के गेटपास नही काटे गए थे, जिसको लेकर किसानों ने कई बार हंगामा भी किया था। कुछ किसान ट्रालियों को छोड़ ट्रैक्टर लेकर गेहूं की बिजाई करने चले गए। रविवार को सुबह सात बजे से दो बजे तक पीआर धान के 93 गेटपास काटे गए। किसानों ने ट्रालियों की कतारें टूटने नही दी।
मंडी में करीब 3500 क्विंटल पीआर धान की आवक हुई है। इससे पहले नायब तहसीलदार रामकुमार ने किसान के धान का सत्यापन किया। उसके बाद गेटपास काटे गए। बीते कई दिनों से किसान गेटपास के लिए मंडी की सडक़ पर धान से भरी ट्रालियों की पहरेदारी कर रहे थे। गेटपास मिलने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। हैफेड निरिक्षक दर्शन सिंह ने बताया कि मंडी में पहुंची धान की ऐजेंसियों द्वारा खरीद कर ली गई है। उन्होंने महज पांच सौ क्विंटल धान खरीदा है। शेष धान डीएफएससी ने खरीद किया है।
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करनाल। तीन नवंबर के बाद रविवार को हरियाणा सरकार ने जिले की करनाल, इंद्री, असंध, घरौंडा आदि पांच अनाज मंडियों में अपराह्न दो बजे तक तहसीलदार से सत्यापित धान की खरीद की। जिसमें रविवार को कुल 95830 क्विंटल धान की खरीद की गई। इसके बाद इस सीजन की धान की खरीद को विराम दे दिया गया। इस सीजन में कुल खरीद 10612200 क्विंटल की गई। जो पिछले साल की गई 13571290 क्विंटल के सापेक्ष 2959090 क्विंटल कम है। इसी के साथ अब सीमांत राज्यों के किसानों से धान की खरीद की संभावनाएं भी खत्म हो गई हैं।
हरियाणा सरकार द्वारा पीआर धान की सरकारी खरीद का आज अंतिम दिन था। सरकार ने इस बार बिना किसी पूर्व सूचना के दिवाली से एक दिन पूर्व तीन नवंबर को यह कहकर खरीद बंद की थी, कि दिवाली के कारण खरीद सात नवंबर तक बंद रहेगी लेकिन इसके बाद सैकड़ो की संख्या में किसान धान की ट्रैक्टर ट्रालियां लेकर मंडियों में डटे रहे लेकिन सरकार के पास सूचना पहुंची कि उत्तरप्रदेश आदि सीमांत राज्यों से बड़ी संख्या में धान करनाल आदि अनाज मंडियों में पहुंच चुका है। जिसे आढ़ती, राइस मिलर्स, मंडी कर्मचारी व खरीद एजेंसियों के कर्मचारी मिलकर खेल कर सकते हैं। इस संभावना को देखते हुए दिवाली के बाद खरीद नहीं खोली गई। किसानों ने कई स्थानों पर हंगामा किया। रोडजाम किया। तब जाकर सरकार सत्यापन के बाद धान खरीदने को राजी हुई। रविवार को तहसीलदार द्वारा सत्यापित धान खरीदा गया। अपराह्न दो बजे के बाद गेटपास बंद कर दिए गए थे। हालांकि कई किसान मंडी में अपने धान के सत्यापित अभिलेख दिखाते रहे। क्योंकि काफी किसान ऐसे थे, जिन्होंने बिना गेटपास के ही किराये की ट्रैक्टर ट्रालियां होने के कारण धान को मंडी में डालकर ढेरी लगा ली थी। उनका धान नहीं बिक पाया।
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सीमांत राज्यों का धान न खरीदने से बढ़ी चिंता
-आढ़तियों व राइस मिलर्स की चिंता काफी बढ़ गई है, क्योंकि उन्होंने करोड़ो रुपये धान खरीद के लालच में यूपी के किसानों को दे रखा है, अब यूपी के किसानों का धान हरियाणा की मंडियों में आने की उम्मीदें खत्म हो गई हैं, जिससे उनका करोड़ो रुपये फंस सकता है।हरियाणा स्टेट अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन रजनीश चौधरी ने बताया कि सीमांत राज्यों के किसानों का पंजीकरण कराने के बाद भी धान न खरीदना किसानों के साथ भी धोखा है। इसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ेगा।
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अनाज मंडी खरीद (क्विंटल में)
असंध 1513300
बल्लाह 93000
बयाना 112710
घरौंडा 1579210
घीड़ 133960
इंद्री 1175330
जुंडला 912160
करनाल 2140630
कुंजपुरा 413600
निगदू 365360
नीलोखेड़ी 140670
निसिंग 1111500
तरावड़ी 920770
खुल खरीद 10612200
मंडी में पांच दिन बाद काटे पीआर धान के 93 गेटपास
निसिंग।
अनाजमंडी में सात अक्तूबर के बाद पीआर धान के गेटपास नही काटे गए थे, जिसको लेकर किसानों ने कई बार हंगामा भी किया था। कुछ किसान ट्रालियों को छोड़ ट्रैक्टर लेकर गेहूं की बिजाई करने चले गए। रविवार को सुबह सात बजे से दो बजे तक पीआर धान के 93 गेटपास काटे गए। किसानों ने ट्रालियों की कतारें टूटने नही दी।
मंडी में करीब 3500 क्विंटल पीआर धान की आवक हुई है। इससे पहले नायब तहसीलदार रामकुमार ने किसान के धान का सत्यापन किया। उसके बाद गेटपास काटे गए। बीते कई दिनों से किसान गेटपास के लिए मंडी की सडक़ पर धान से भरी ट्रालियों की पहरेदारी कर रहे थे। गेटपास मिलने के बाद किसानों ने राहत की सांस ली। हैफेड निरिक्षक दर्शन सिंह ने बताया कि मंडी में पहुंची धान की ऐजेंसियों द्वारा खरीद कर ली गई है। उन्होंने महज पांच सौ क्विंटल धान खरीदा है। शेष धान डीएफएससी ने खरीद किया है।