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संकट में सहारा... कर्ण नगरी के दो ममेरे भाईयों ने मोर्चा संभाला, दो हजार भारतीयों को यूक्रेन से सुरक्षित निकाला
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करनाल। यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच कर्ण नगरी के दो ममेरे भाई संकट में फंसे भारतीयों का सहारा बने हैं। पिछले 11 दिन से चल रहे युद्ध में वे अब तक दो हजार से ज्यादा भारतीय नागरिकों को यूक्रेन से सुरक्षित निकाल चुके हैं। अर्जुन गेट निवासी भावन शर्मा और उनके मामा के बेटे यश गोस्वामी ने बताया कि विदेश में फंसे अपने भाइयों को सुरक्षित अपने वतन भेजना ही उनके जीवन की सबसे बड़ी सेवा होगी।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में कीव में रह रहे भावन शर्मा ने बताया कि वे पिछले पांच साल से यूक्रेन में हैं। 2017 में वे केवल घूमने के लिए यूक्रेन आए थे। वहां का माहौल अच्छा लगा और परिवार का सहयोग मिला तो वहां पर खुद की टैक्सी, टूरिस्ट और ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। बाद में मामा का बेटा यश गोस्वामी भी उनके पास पहुंच गया।
दोनों मिलकर अपनी कंपनियां चला रहे थे। अब युद्ध की स्थिति में जब भारतीय विद्यार्थियों को भूख और अन्य दिक्कतों के कारण तड़पता देखा तो उन्होंने सभी युद्ध वाले शहरों से उन्हें बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। कंपनी की सभी टैक्सी इसी कार्य पर लगा दी गई। बाद में जब भारतीयों को बॉर्डर पार जाने दिया गया तो उन्होंने कई भारतीय नागरिकों को खारकीव समेत तनावपूर्ण अन्य 10 शहरों से रेस्क्यू करते हुए पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचाया। इस कार्य में उन दोनों के साथ भावन की महिला मित्र लयूबोव गुलिया भी जुटी है।
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पेट्रोल की किल्लत भी शुरू, सीमित पंप ही खुले
भावन ने बताया कि कई शहरों में खाने तक की किल्लत हो गई है। अब पेट्रोल भी खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि हाईवे पर 100 में से केवल चार पेट्रोल पंप ही खुले मिल रहे हैं। वे भी केवल सीमित ईंधन दे रहे हैं। स्थिति ऐसी ही रही तो जिन लोगों के पास अपने वाहन हैं, वे भी खुद को महफूज करने के लिए दूसरे शहरों में शिफ्ट नहीं कर पाएंगे। खारकीव और सुमिस में अभी भी 150 से ज्यादा भारतीय फंसे हैं। सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं, ऐसे में उन्हें वापस लाने के लिए रास्ते भी नहीं मिल रहे हैं।
यूरोप से लौटे यूक्रेनी नागरिक, उठा लीं बंदूकें
भावन शर्मा के अनुसार स्थानीय नागरिक खुद ही हर स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं। यूरोप में नौकरी करने वाले यूक्रेनी नागरिक भी अपने देश की सुरक्षा के लिए वापस आने लगे हैं। सरकार की अनुमति के बाद लोगों ने बंदूकें उठा ली हैं। सड़कों पर चेक पोस्ट भी स्थापित की हैं ताकि बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित रहें। काफी तनावपूर्ण स्थिति है। अपने सभी नागरिकों को निकालने के बाद ही वे खुद वापस आने की सोचेंगे।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में कीव में रह रहे भावन शर्मा ने बताया कि वे पिछले पांच साल से यूक्रेन में हैं। 2017 में वे केवल घूमने के लिए यूक्रेन आए थे। वहां का माहौल अच्छा लगा और परिवार का सहयोग मिला तो वहां पर खुद की टैक्सी, टूरिस्ट और ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। बाद में मामा का बेटा यश गोस्वामी भी उनके पास पहुंच गया।
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दोनों मिलकर अपनी कंपनियां चला रहे थे। अब युद्ध की स्थिति में जब भारतीय विद्यार्थियों को भूख और अन्य दिक्कतों के कारण तड़पता देखा तो उन्होंने सभी युद्ध वाले शहरों से उन्हें बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। कंपनी की सभी टैक्सी इसी कार्य पर लगा दी गई। बाद में जब भारतीयों को बॉर्डर पार जाने दिया गया तो उन्होंने कई भारतीय नागरिकों को खारकीव समेत तनावपूर्ण अन्य 10 शहरों से रेस्क्यू करते हुए पोलैंड बॉर्डर तक पहुंचाया। इस कार्य में उन दोनों के साथ भावन की महिला मित्र लयूबोव गुलिया भी जुटी है।
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पेट्रोल की किल्लत भी शुरू, सीमित पंप ही खुले
भावन ने बताया कि कई शहरों में खाने तक की किल्लत हो गई है। अब पेट्रोल भी खत्म हो चुका है। उन्होंने बताया कि हाईवे पर 100 में से केवल चार पेट्रोल पंप ही खुले मिल रहे हैं। वे भी केवल सीमित ईंधन दे रहे हैं। स्थिति ऐसी ही रही तो जिन लोगों के पास अपने वाहन हैं, वे भी खुद को महफूज करने के लिए दूसरे शहरों में शिफ्ट नहीं कर पाएंगे। खारकीव और सुमिस में अभी भी 150 से ज्यादा भारतीय फंसे हैं। सड़कें ध्वस्त हो चुकी हैं, ऐसे में उन्हें वापस लाने के लिए रास्ते भी नहीं मिल रहे हैं।
यूरोप से लौटे यूक्रेनी नागरिक, उठा लीं बंदूकें
भावन शर्मा के अनुसार स्थानीय नागरिक खुद ही हर स्थिति से निपटने के लिए तैयारी कर रहे हैं। यूरोप में नौकरी करने वाले यूक्रेनी नागरिक भी अपने देश की सुरक्षा के लिए वापस आने लगे हैं। सरकार की अनुमति के बाद लोगों ने बंदूकें उठा ली हैं। सड़कों पर चेक पोस्ट भी स्थापित की हैं ताकि बच्चे और बुजुर्ग सुरक्षित रहें। काफी तनावपूर्ण स्थिति है। अपने सभी नागरिकों को निकालने के बाद ही वे खुद वापस आने की सोचेंगे।