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Karnal News: तबादलों में उलझीं परियोजनाएं, कुछ लटके तो कई फेल

Sun, 30 Apr 2023 02:32 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल Updated Sun, 30 Apr 2023 02:32 AM IST
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Projects entangled in transfers, some hang and many fail
गगन तलवार
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करनाल। नगर निगम की कई परियोजनाएं वर्षों से लटकीं हैं, वहीं जो परियोजनाएं सिरे चढ़े उनमें से भी कई अनदेखी के कारण फेल हो गए। ऐसे में जहां पैसे की बर्बादी तो हुई ही वहीं, शहरवासी भी सुविधाओं से महरूम हैं। इनमें डेयरी शिफ्टिंग, अतिक्रमण, शहरी बस सेवा, अमरूत योजना आदि प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के फेल होने या लटकने के पीछे एक बड़ी वजह नगर निगम आयुक्तों का जल्द तबादला होना भी है। हर बार जब नए आयुक्त आए तो पहले की परियोजनाएं धीमी पड़ गई।
नगर निगम में पिछले 12 वर्षों में 19 आयुक्त बदले हैं। ऐसे में जो अधिकारी नया आया, उसने नई परियोजना शुरू करनी चाही। जब तक परियोजना धरातल पर उतरती तब तक तबादला हो गया। ऐसे में इसके बाद जो अगला अधिकारी आया, उसने पिछली परियोजना पर ध्यान ही नहीं दिया। जिस कारण ये लटक गए। स्थिति यह है कि 19 में से केवल चार आयुक्त ही ऐसे हैं, जिन्होंने एक साल से ज्यादा समय शहर को दिया। जबकि अन्य अधिकारी एक से तीन या छह से आठ माह तक ही टिके। जे गणेशन ऐसे आयुक्त रहे, जिनका कार्यकाल महज छह ही दिन का रहा। करनाल नगर निगम के 20 वार्ड में पांच लाख से ज्यादा आबादी रहती है। जिन्हें परियोजनाओं के लटकने या फेल होने के कारण समस्याओं से जूझना पड़ रहा ह। ब्यूरो
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ये पांच बड़ी परियोजनाएं अधर में
- डेयरी शिफ्टिंग : यह परियोजना 2012 की है। पिंगली स्थित डेयरी स्थल पर 231 प्लाॅट हैं। 141 का ड्राॅ निकला है। इनमें भी केवल सात में डेयरी शिफ्ट हुई हैं।
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- अमरूत : स्टॉर्म वाटर लाइन, सीवरेज लाइन, एसटीपी, आईपीएस (इंटरमीडिएट पंपिंग स्टेशन), रेन वाटर हार्वेस्टर आदि कार्य होने हैं। 2017 की इस प्लानिंग का काफी कार्य अधर में है।
- पुराना नगर निगम भवन : 2017 में यहां से नगर निगम शिफ्ट हो गया था। यहां पर मल्टी स्टोरी पार्किंग या मॉल बनाने की योजना है, यह भी लटकी है।
- पुरानी सब्जी मंडी में मल्टी स्टोरी पार्किंग : 2016 में पुरानी सब्जी मंडी को नई अनाज मंडी के पास शिफ्ट किया था। यहां पर मल्टी स्टोरी पार्किंग व मॉल बनाने की योजना भी अधर में है।
- वेंडिंग जोन : शहर में सब्जी व फल की रेहड़ी-फड़ी को कैथल रोड और काछवा रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के नीचे शिफ्ट करने की परियोजना 2017 से लटकी है।



ये पांच प्रमुख परियोजनाएं फेल
- नाइट मार्केट : सेक्टर-12 में नाइट मार्केट बनाई गई। स्मार्ट सिटी के तहत कार्य हुआ, लेकिन पुराने डीसी के तबादले के बाद यह परियोजना फेल हो गई।
- शहरी बस सेवा : जनवरी 2018 में आयुक्त डॉ. प्रियंका सोनी के कार्यकाल में यह सेवा शुरू हुई। 2020 में लॉकडाउन के दौरान घाटा दिखाकर बंद कर दी।
- सांझी साइकिल : डॉ. आदित्य दहिया के कार्यकाल में 2016 में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट 2020 तक पूरी तरह बंद हो गया। अब साइकिलें भी गायब हैं।
- पार्कों में वाईफाई : 2017 में शहर के सभी पार्कों को वाई-फाई किया गया था। वाईफाई का बिल ही नहीं भरा तो 2018 के अंत तक यह बंद हो गए।
- शीरे रूम : 2016 में शहर में तीन शीरो रूम स्थापित किए गए थे। ये महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बने थे। अब इन पर ताले लटके हैं।




इस आयुक्त का इतना रहा कार्यकाल

आयुक्त

(कार्यकाल)

जेएस अहलावत
(07 माह)
नीलम प्रदीप कासनी
(19 माह)

रेणू एस फूलिया
(14 माह)

विकास यादव
06 माह)
बलराज सिंह

(10 माह)

जे गणेशन

(छह दिन)

अरविंद मलहन
(06 माह)

सुमेधा कटारिया
(15 माह)
डॉ. आदित्य दहिया
(11 माह)
डॉ. प्रियंका सोनी
(10 माह)
राजीव मेहता

(16 माह)
निशांत कुमार यादव
(03 माह)
राजीव मेहता

(एक माह)
निशांत कुमार यादव
(09 माह)
विक्रम

(08 माह)
मनोज कुमार

(08 माह)
नरेश नरवाल

(06 माह)
अजय सिंह तोमर
(06 माह)
अभिषेक मीणा
(वर्तमान में जारी)







छह माह तो शहर को समझने के लिए चाहिए

आयुक्त जैसे बड़े अधिकारी को शहर को समझने के लिए कम से कम छह माह का समय चाहिए। ताकि मौसम और सामान्य हालात में होने वाली दिक्कतें पता चलें। अगर अधिकारी का कार्यकाल छह माह का होगा तो कैसे नई परियोजनाएं बन पाएंगी।
- राजेश कुमार, एडवोकेट



नए अधिकारी पुरानी परियोजना देखते ही नहीं

नए अधिकारी पुराने अधिकारी की परियोजना को ज्यादा देखते ही नहीं। सीएम की घोषणा हो तो कुछ महत्व दे देते हैं। अन्यथा हर अधिकारी अपने स्तर पर अपनी योजना के अनुसार ही कार्य करने का प्रयास करता है। तभी परियोजनाएं फेल होती।

- विकास ढींगड़ा, शहरवासी



सभी परियोजनाओं पर चल रहा काम

जो परियोजनाएं पुरानी हैं, उन पर भी काम चल रहा है। सभी परियोजनाएं पूरा होने का अलग-अलग समय है। हां यह भी कहा जा सकता है कि अधिकारी कम समय तक रहेंगे तो काम अटकते हैं, क्योंकि हर किसी के सोचने और काम का नजरिया अलग होता है।
- अभिषेक मीणा, आयुक्त नगर निगम
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