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Karnal News: राजकीय विद्यालयों में बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़
Sat, 30 Aug 2025 02:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 30 Aug 2025 02:09 AM IST
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कुरुक्षेत्र। जिले के एक स्कूल में भोजन ग्रहण करने के दौरान बच्चे। संवाद
- फोटो : samvad
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के साथ लापरवाही की जा रही है। सरकार की ओर से विद्यार्थियों को पोषण देने के लिए शुरू की गई योजना में ढिलाई बरती जा रही है। बच्चों को अब तक प्रोटीन मिल्क बार नहीं मिल रहे और मिड डे मील भी निर्धारित मेन्यू के अनुसार नहीं परोसा जा रहा। इससे न केवल बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है बल्कि योजनाओं के उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
जुलाई माह में ही विभाग ने बच्चों को प्रोटीन मिल्क बार उपलब्ध कराने के लिए कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था। इसका मकसद बच्चों को अतिरिक्त पोषण देना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना था लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इस वजह से विद्यार्थी योजना के लाभ से वंचित हैं। इतना ही नहीं, मिड-डे मील भी बिना मेन्यू के परोसा जा रहा है।
कई विद्यालयों में खराब गुणवत्ता का आटा पहुंच रहा है। वहीं समय पर आटा न पहुंचने की वजह से बच्चों को सिर्फ चावल आधारित रेसिपी ही दी जा रही है। इसका असर बच्चों की पोषण आवश्यकताओं पर पड़ रहा है। इस संबंध में शिक्षक संघ ने विभाग को अवगत भी कराया था। विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और उनका पोषण मुख्य रूप से मिड-डे मील और सरकारी योजनाओं पर ही निर्भर करता है। ऐसे में योजनाओं की अनदेखी सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से खिलवाड़ है।
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जल्द शुरू होगी प्रोटीन मिल्क बार की
जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि जल्द ही प्रोटीन मिल्क बार की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए स्टोर की व्यवस्था पूरी कर ली गई है और अगले सप्ताह से विद्यालयों में मिल्क बार पहुंचने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि मिड-डे मील की गुणवत्ता और समय पर सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग सख्त कदम उठाएगा।
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कुरुक्षेत्र। राजकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य के साथ लापरवाही की जा रही है। सरकार की ओर से विद्यार्थियों को पोषण देने के लिए शुरू की गई योजना में ढिलाई बरती जा रही है। बच्चों को अब तक प्रोटीन मिल्क बार नहीं मिल रहे और मिड डे मील भी निर्धारित मेन्यू के अनुसार नहीं परोसा जा रहा। इससे न केवल बच्चों की सेहत प्रभावित हो रही है बल्कि योजनाओं के उद्देश्य पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
जुलाई माह में ही विभाग ने बच्चों को प्रोटीन मिल्क बार उपलब्ध कराने के लिए कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था। इसका मकसद बच्चों को अतिरिक्त पोषण देना और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना था लेकिन दो माह बीत जाने के बाद भी सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इस वजह से विद्यार्थी योजना के लाभ से वंचित हैं। इतना ही नहीं, मिड-डे मील भी बिना मेन्यू के परोसा जा रहा है।
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कई विद्यालयों में खराब गुणवत्ता का आटा पहुंच रहा है। वहीं समय पर आटा न पहुंचने की वजह से बच्चों को सिर्फ चावल आधारित रेसिपी ही दी जा रही है। इसका असर बच्चों की पोषण आवश्यकताओं पर पड़ रहा है। इस संबंध में शिक्षक संघ ने विभाग को अवगत भी कराया था। विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे गरीब परिवारों से आते हैं और उनका पोषण मुख्य रूप से मिड-डे मील और सरकारी योजनाओं पर ही निर्भर करता है। ऐसे में योजनाओं की अनदेखी सीधे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से खिलवाड़ है।
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जिला शिक्षा अधिकारी विनोद कौशिक ने बताया कि जल्द ही प्रोटीन मिल्क बार की सप्लाई शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए स्टोर की व्यवस्था पूरी कर ली गई है और अगले सप्ताह से विद्यालयों में मिल्क बार पहुंचने की संभावना है। उन्होंने यह भी कहा कि मिड-डे मील की गुणवत्ता और समय पर सामग्री की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग सख्त कदम उठाएगा।