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Karnal News: दर्द निवारण के लिए संजीवनी बना पंचकर्म
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दर्द निवारण के लिए संजीवनी बना पंचकर्म
- पिछले पांच वर्ष में 21842 मरीजों का किया जा चुका इलाज, इनमें से 15289 लोगों ने यूरिक एसिड, कमर, घुटनों व एडी के दर्द से पाया छुटकारा
अनुज शर्मा
करनाल। सेक्टर- 6 में स्थापित पंचकर्म चिकित्सा केंद्र शरीर के हर दर्द के निवारण के लिए संजीवनी का काम कर रहा है। पिछले पांच सालों में 21 हजार 842 लोगों ने इसका लाभ उठाया है। जहां पर 15,289 सबसे अधिक यूरिक एसिड, कमर दर्द, घुटनों का दर्द व एडी के लंबे दर्द से पीड़ित लोग पहुंचे हैं। वहीं, 6552 माइग्रेन, मोटापा, बीपी, शुगर व आंखों की बीमारी से पीड़ित लोग पहुंचे हैं। जबकि इससे पहले दर्द से छुटकारा पाने के लिए ये लोग लंबे समय से एलोपैथ का सहारा ले रहे थे।
पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. रमनदीप ने बताया कि केंद्र में दर्द से पीड़ित लोग सबसे अधिक पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर कई वर्षों से एलोपैथ की दवाएं खाकर व निराश होकर केंद्र में पहुंच रहे हैं। जिनकी उम्मीद पर पंचकर्म चिकित्सा केंद्र खरा उतर रहा है और उन्हें दर्द से राहत दिलाने में मदद कर रहा है।
इसके अलावा केंद्र माइग्रेन, मोटापा, बीपी व शुगर जैसी बीमारियों से लोगों को छुटकारा दिला रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में पंचकर्म की ओपीडी वर्ष 2013 में सिविल अस्पताल में शुरू हुई थी। जिसके बाद वर्ष 2017 के मध्य में पंचकर्म थेरेपी की शुरुआत की गई। जहां पर धीरे-धीरे एक-एक करके थेरेपी शुरू गई। आज केंद्र में 45 तरह की पंचकर्म थेरेपी की सुविधा दी जा रही है।
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नाममात्र का शुल्क देकर करवा सकते हैं उपचार
डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि केंद्र में 45 प्रकार की थेरेपी की सुविधा दी जा रही है। यहां पर महिलाओं और पुरुषों की थेरेपी के लिए अलग-अलग सुविधा है। केंद्र में महिला थेरेपिस्ट भानू और पुरुष थेरेपिस्ट जितेंद्र शर्मा व रमेश कुमार काम कर रहे हैं। वहीं केंद्र में कोई भी व्यक्ति नाममात्र चार्ज देकर गंभीर बीमारी का उपचार करवा सकता है।
क्या है पंचकर्म
पंचकर्म आयुर्वेद का एक प्रमुख शुद्धिकरण उपचार है। पंचकर्म का अर्थ पांच विभिन्न चिकित्सा का मिश्रण है। इसमें पांच चिकित्सा में वमन, विरेचन, नास्य, बस्ती व रक्त मोक्षण शामिल हैं। इस प्रक्रिया का प्रयोग शरीर को बीमारियों व कुपोषण से छोड़े गए विषैले पदार्थों से निर्मल करने के लिए होता है।
पंचकर्मा में हुई थेरेपी पर एक नजर
वर्ष थेरेपी
2018 5628
2019 7926
2020 1007 (जनवरी से मार्च तक)
2021 1271 (जुलाई से दिसंबर तक)
2022 4605
2023 1405 (जनवरी से अप्रैल तक)
कुल 21,842
पंचकर्मा केंद्र में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जहां पर लोग एलोपैथ में लंबे समय से दवाएं खाकर और निराश होकर पहुंच रहे हैं। जिनका पंचकर्मा केंद्र में आयुर्वेदिक दवाओं और विशेष थेरेपी से इलाज किया जा रहा है।
डॉ. सतपाल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, करनाल
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अनुज शर्मा
करनाल। सेक्टर- 6 में स्थापित पंचकर्म चिकित्सा केंद्र शरीर के हर दर्द के निवारण के लिए संजीवनी का काम कर रहा है। पिछले पांच सालों में 21 हजार 842 लोगों ने इसका लाभ उठाया है। जहां पर 15,289 सबसे अधिक यूरिक एसिड, कमर दर्द, घुटनों का दर्द व एडी के लंबे दर्द से पीड़ित लोग पहुंचे हैं। वहीं, 6552 माइग्रेन, मोटापा, बीपी, शुगर व आंखों की बीमारी से पीड़ित लोग पहुंचे हैं। जबकि इससे पहले दर्द से छुटकारा पाने के लिए ये लोग लंबे समय से एलोपैथ का सहारा ले रहे थे।
पंचकर्म विशेषज्ञ डॉ. रमनदीप ने बताया कि केंद्र में दर्द से पीड़ित लोग सबसे अधिक पहुंच रहे हैं। इनमें अधिकतर कई वर्षों से एलोपैथ की दवाएं खाकर व निराश होकर केंद्र में पहुंच रहे हैं। जिनकी उम्मीद पर पंचकर्म चिकित्सा केंद्र खरा उतर रहा है और उन्हें दर्द से राहत दिलाने में मदद कर रहा है।
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इसके अलावा केंद्र माइग्रेन, मोटापा, बीपी व शुगर जैसी बीमारियों से लोगों को छुटकारा दिला रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में पंचकर्म की ओपीडी वर्ष 2013 में सिविल अस्पताल में शुरू हुई थी। जिसके बाद वर्ष 2017 के मध्य में पंचकर्म थेरेपी की शुरुआत की गई। जहां पर धीरे-धीरे एक-एक करके थेरेपी शुरू गई। आज केंद्र में 45 तरह की पंचकर्म थेरेपी की सुविधा दी जा रही है।
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नाममात्र का शुल्क देकर करवा सकते हैं उपचार
डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि केंद्र में 45 प्रकार की थेरेपी की सुविधा दी जा रही है। यहां पर महिलाओं और पुरुषों की थेरेपी के लिए अलग-अलग सुविधा है। केंद्र में महिला थेरेपिस्ट भानू और पुरुष थेरेपिस्ट जितेंद्र शर्मा व रमेश कुमार काम कर रहे हैं। वहीं केंद्र में कोई भी व्यक्ति नाममात्र चार्ज देकर गंभीर बीमारी का उपचार करवा सकता है।
क्या है पंचकर्म
पंचकर्म आयुर्वेद का एक प्रमुख शुद्धिकरण उपचार है। पंचकर्म का अर्थ पांच विभिन्न चिकित्सा का मिश्रण है। इसमें पांच चिकित्सा में वमन, विरेचन, नास्य, बस्ती व रक्त मोक्षण शामिल हैं। इस प्रक्रिया का प्रयोग शरीर को बीमारियों व कुपोषण से छोड़े गए विषैले पदार्थों से निर्मल करने के लिए होता है।
पंचकर्मा में हुई थेरेपी पर एक नजर
वर्ष थेरेपी
2018 5628
2019 7926
2020 1007 (जनवरी से मार्च तक)
2021 1271 (जुलाई से दिसंबर तक)
2022 4605
2023 1405 (जनवरी से अप्रैल तक)
कुल 21,842
पंचकर्मा केंद्र में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। जहां पर लोग एलोपैथ में लंबे समय से दवाएं खाकर और निराश होकर पहुंच रहे हैं। जिनका पंचकर्मा केंद्र में आयुर्वेदिक दवाओं और विशेष थेरेपी से इलाज किया जा रहा है।
डॉ. सतपाल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, करनाल