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Haryana Politics: करनाल में दो सीटों पर विरोधी आए साथ, दो पर पहले की तरह फिर आमने-सामने; दल-बदल का खेल जारी

Fri, 04 Oct 2024 02:42 PM IST
नवीन दलाल गगन तलवार, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, करनाल (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Fri, 04 Oct 2024 02:42 PM IST
सार

करनाल के घरौंडा और नीलोखेड़ी में भाजपा और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर दांव खेला, यहां दोनों की साख दांव पर है। घरौंडा में 2014 में हरविंद्र कल्याण के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के विरेंद्र सिंह राठौर आमने-सामने हैं।

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Opponents came together on two seats in Karnal, on two seats they are face to face again like before
हरियाणा विधानसभा चुनाव - फोटो : संवाद

विस्तार

हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदान की तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे चुनावी रंग चढ़ रहा है और राजनीतिक समीकरण भी बदल रहे हैं। इस बार दो सीटों पर पिछली बार के विरोधी अब सहयोगी बने हैं। तो वहीं दो सीटों पर 2014 या 2019 की तरह फिर धुरंधरों में टक्कर देखने को मिलेगी। करनाल सीट पर दल-बदल का खेल जारी है।

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 पांचों सीटों पर नजर डालें तो इंद्री और असंध में पिछली बार के कट्टर विरोधियों ने हाथ मिलाया है। इंद्री में 2014 में राकेश कांबोज के विरोधी कर्णदेव अब कांग्रेस में आने पर उनके सहयोगी हैं। ऐसी ही स्थिति असंध में है, यहां 2019 में कांग्रेस के शमशेर गोगी के विरोधी रहे भाजपा के बख्शीश सिंह अब कांग्रेस में आने के बाद गोगी के साथ हैं। पूर्व विधायक जिलेराम इस जोड़ी और भाजपा को निर्दलीय टक्कर दे रहे हैं।
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वहीं घरौंडा और नीलोखेड़ी में भाजपा और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर दांव खेला, यहां दोनों की साख दांव पर है। घरौंडा में 2014 में हरविंद्र कल्याण के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले कांग्रेस के विरेंद्र सिंह राठौर आमने-सामने हैं। कल्याण जीते तो यह उनकी हैट्रिक होगी। वहीं राठौर जीते तो उनकी पिछले तीन चुनावों में हार की मेहनत का अच्छा फल होगा। नीलोखेड़ी में 2019 में आमने सामने रहे पूर्व विधायक भगवानदास कबीरपंथी और धर्मपाल गोंदर को भाजपा कांग्रेस ने मैदान में उतारा है। करनाल में सीएम के सीट छोड़ने के बाद से भाजपा, कांग्रेस के अलावा इनेलो, जजपा और आप के पदाधिकारी पार्टियां बदल रहे हैं। ऐसे में दल बदल का खेल ही अंत में नया खेल करेगा।

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असंध : गोगी और बख्शीश के थमे जुबानी तीर

2014 में भाजपा की टिकट पर जीते बख्शीश सिंह इस बार टिकट कटने पर कांग्रेस में शामिल हो गए। 2019 चुनाव में शमशेर गोगी और बख्शीश आमने-सामने थे। गोगी जीते थे, जबकि बख्शीश तीसरे नंबर पर रहे। अब दोनों एक ही पार्टी में हैं। बख्शीश जिससे पिछले चुनाव में हारे थे, उसे जिताने और अपनी पार्टी रही भाजपा को हराने के लिए मेहनत कर रहे हैं।

इंद्री : कर्णदेव बने पुराने विरोध राकेश के सहयोगी

2014 में राकेश कांबोज को हरा विधायक बने भाजपा के कर्णदेव इस बार राकेश के सहयोगी हैं। टिकट कटने पर उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा। ऐसे में 2014 चुनाव के दोनों विरोधी अब एक साथ हैं। राकेश 2005 में कांग्रेस की टिकट पर जीत चुके हैं, यह उनका छठा चुनाव है। 1977 में इनके पिता देसराज भी विधायक बनने के बाद मंत्री रहे।

करनाल : पार्षद-पदाधिकारी बदल रहे पाला

2014 और 19 में मनोहर लाल और उपचुनाव में नायब सैनी विधायक बने। दोनों ने पदाधिकारियों और पार्षदों को अपने साथ लगाए रखा। अब सीएम नायब सैनी लाडवा से चुनाव लड़ने गए तो यहां पर पार्षद और पदाधिकारी दल बदल रहे हैं। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष जगमोहन और कांग्रेस ने 10 साल विधायक रही सुमिता सिंह को मैदान में उतारा है। जो कांग्रेस से भाजपा में आए थे, वे वापस जा रहे हैं। वहीं भाजपा पुराने कांग्रेसियों को अपने पाले में कर रही हैं।

घरौंडा : कल्याण-राठौर फिर आमने-सामने, सांगवान सहयोगी

भाजपा और कांग्रेस ने पुराने चेहरों पर ही दांव खेला है। 2014 से विधायक रहे हरविंद्र कल्याण को भाजपा और तब कांग्रेस के प्रत्याशी रहे वीरेंद्र राठौर को दोबारा मैदान में उतार आमने सामने किया हैं। उस समय इनेलो के नरेंद्र सांगवान दूसरे नंबर पर रहे थे। 2019 से सांगवान कांग्रेस में हैं। 2009 में विजेता रहे सांगवान के खिलाफ भी राठौर ने चुनाव लड़ा था।

नीलाखेड़ी : 2019 की तरह फिर पूर्व विधायकों में टक्कर

2019 की तरह ही मुकाबला देखने को मिलेगा। तब भाजपा के कबीरपंथी और बागी निर्दलीय धर्मपाल गोंदर में टक्कर थी। अब भाजपा ने पूर्व विधायक कबीरपंथी और कांग्रेस ने धर्मपाल गोंदर पर दांव खेला है। हालांकि साढ़े चार साल तक धर्मपाल ने सरकार को ही समर्थन दिया था और भाजपा के मंच पर दिखाई देते थे। लेकिन अब छह माह पूर्व उन्होंने कांग्रेस का हाथ थामा, पिछली बार की तरह फिर आमने-सामने हैं।

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