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अब चंद मिनटों में ही किसान को पता लग जाएगी उनकी फसल की गुणवत्ता
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देव शर्मा
करनाल। करनाल की चार अनाज मंडियों सहित प्रदेश की राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ी सभी अनाज मंडियों में अब किसानों व व्यापारियों को फसल की गुणवत्ता की जानकारी में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि अब इन मंडियों में गुणवत्ता मापक मशीने लगाई जा रही है। करनाल अनाज मंडी में यह मशीन पहुंच चुकी है। जबकि इसके संचालन के लिए कर्मचारियों की तैनाती सप्ताह होने की संभावना है। इससे किसान यदि अपनी फसल लाएंगे तो चंद मिनटों में ही फसल की गुणवत्ता पता लग जाएगी। वह भी पूरी तरह निशुल्क। इतना ही नहीं राष्ट्रीय कृषि बाजार में ई-नेम के तहत दूरस्थ मंडियों व प्रतिष्ठानों में बैठकर ऑनलाइन खरीद करने वाले व्यापारियों को भी मंडी में मौजूद ढेरी की गुणवत्ता की जानकारी हो सकेगी।
करनाल अनाज मंडी के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि जिले की करनाल, तरावड़ी, इंद्री व घरौंडा अनाज मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार के ई-नेम पोर्टल से जुड़ी है। इन मंडियों से देश के कई राज्यों के मंडियों न प्रतिष्ठानों में बैठे व्यापारी ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं। ई-नेम योजना के तहत ही अब करनाल सहित राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ी सभी अनाज मंडियों में गुणवत्ता मापक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। करनाल मंडी में मशीन तो पहुंच गई लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारी अभी तैनात नहीं हुए हैं। सचिव ने संभावना जताई कि इसी सप्ताह स्टाफ की तैनाती हो जाएगी, जिससे इसी धान के सीजन में किसानों व व्यापारियों को इस मशीन का लाभ मिल सकेगा। मशीन में थोड़े से धान के दाने डालते ही चंद मिनटों में ही इसमें नमी कितनी है, टुकड़ा, मिस्किंग कितनी है, कितने दाने बदरंग है और कितने दाने खराब है, पता चल जाएगा। उसी अनुपात में व्यापारी उसे खरीद सकेंगे। ई-नेम पोर्टल पर मंडी में लगी फसल की ढेरियां भी प्रदर्शित की जाती है, अब उनके साथ ही ढेरी के धान की गुणवत्ता क्या है, यह भी अपलोड होगा। जिससे देश में कहीं से भी कोई भी व्यापारी फसल की गुणवत्ता को देखते हुए खरीदारी करेगा।
किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
-अनाज मंडी में आढ़ती, राइस मिलर्स व अन्य व्यापारी सिर्फ धान या गेहूं को मुट्ठी में लेकर उसकी नमी व गुणवत्ता आंकते हैं और अपने हिसाह से गुणवत्ता बताकर मनमाने भाव में किसान की फसल को खरीद लेते हैं। किसान भी गुणवत्ता खराब समझकर औने पौने दामों पर बेच देते हैं। लेकिन अब किसान अपनी फसल को मुट्ठी में गुणवत्ता मापक मशीन के विशेषज्ञ के पास ले जाएंगे। निशुल्क फसल की जांच कराकर चंद मिनटों में ही पता कर लेंगे कि उनकी फसल की गुणवत्ता क्या है। उसी के अनुसार अपनी फसल बेंचेगे। जिससे अब व्यापारी उन्हें मनमानी गुणवत्ता नहीं बता पाएंगे। जिससे किसानों को लाभ पहुंचेगा।
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करनाल। करनाल की चार अनाज मंडियों सहित प्रदेश की राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ी सभी अनाज मंडियों में अब किसानों व व्यापारियों को फसल की गुणवत्ता की जानकारी में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि अब इन मंडियों में गुणवत्ता मापक मशीने लगाई जा रही है। करनाल अनाज मंडी में यह मशीन पहुंच चुकी है। जबकि इसके संचालन के लिए कर्मचारियों की तैनाती सप्ताह होने की संभावना है। इससे किसान यदि अपनी फसल लाएंगे तो चंद मिनटों में ही फसल की गुणवत्ता पता लग जाएगी। वह भी पूरी तरह निशुल्क। इतना ही नहीं राष्ट्रीय कृषि बाजार में ई-नेम के तहत दूरस्थ मंडियों व प्रतिष्ठानों में बैठकर ऑनलाइन खरीद करने वाले व्यापारियों को भी मंडी में मौजूद ढेरी की गुणवत्ता की जानकारी हो सकेगी।
करनाल अनाज मंडी के सचिव चंद्रप्रकाश ने बताया कि जिले की करनाल, तरावड़ी, इंद्री व घरौंडा अनाज मंडियां राष्ट्रीय कृषि बाजार के ई-नेम पोर्टल से जुड़ी है। इन मंडियों से देश के कई राज्यों के मंडियों न प्रतिष्ठानों में बैठे व्यापारी ऑनलाइन खरीदारी कर सकते हैं और बेच भी सकते हैं। ई-नेम योजना के तहत ही अब करनाल सहित राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ी सभी अनाज मंडियों में गुणवत्ता मापक मशीनें स्थापित की जा रही हैं। करनाल मंडी में मशीन तो पहुंच गई लेकिन प्रशिक्षित कर्मचारी अभी तैनात नहीं हुए हैं। सचिव ने संभावना जताई कि इसी सप्ताह स्टाफ की तैनाती हो जाएगी, जिससे इसी धान के सीजन में किसानों व व्यापारियों को इस मशीन का लाभ मिल सकेगा। मशीन में थोड़े से धान के दाने डालते ही चंद मिनटों में ही इसमें नमी कितनी है, टुकड़ा, मिस्किंग कितनी है, कितने दाने बदरंग है और कितने दाने खराब है, पता चल जाएगा। उसी अनुपात में व्यापारी उसे खरीद सकेंगे। ई-नेम पोर्टल पर मंडी में लगी फसल की ढेरियां भी प्रदर्शित की जाती है, अब उनके साथ ही ढेरी के धान की गुणवत्ता क्या है, यह भी अपलोड होगा। जिससे देश में कहीं से भी कोई भी व्यापारी फसल की गुणवत्ता को देखते हुए खरीदारी करेगा।
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किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
-अनाज मंडी में आढ़ती, राइस मिलर्स व अन्य व्यापारी सिर्फ धान या गेहूं को मुट्ठी में लेकर उसकी नमी व गुणवत्ता आंकते हैं और अपने हिसाह से गुणवत्ता बताकर मनमाने भाव में किसान की फसल को खरीद लेते हैं। किसान भी गुणवत्ता खराब समझकर औने पौने दामों पर बेच देते हैं। लेकिन अब किसान अपनी फसल को मुट्ठी में गुणवत्ता मापक मशीन के विशेषज्ञ के पास ले जाएंगे। निशुल्क फसल की जांच कराकर चंद मिनटों में ही पता कर लेंगे कि उनकी फसल की गुणवत्ता क्या है। उसी के अनुसार अपनी फसल बेंचेगे। जिससे अब व्यापारी उन्हें मनमानी गुणवत्ता नहीं बता पाएंगे। जिससे किसानों को लाभ पहुंचेगा।
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