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Karnal News: अब चंद मिनटों में पता लगेगा दूध में मिलावट है या नहीं
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। दूध जहां हर घर की जरूरत है, वहीं बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसका उपयोग करते हैं। बड़ी खपत के कारण ही मुनाफा कमाने वालों ने इसमें मिलावट के कई तरीके निकाल लिए हैं। लेकिन अब कोई भी व्यक्ति चंद मिनटों में मिलावटी दूध की पहचान कर सकेगा, क्योंकि राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने दूध में मिलावट की त्वरित पहचान के लिए नौ नई तकनीकों का विकास कर लिया है।
इन तकनीकों का वीरवार को एक प्रमुख डेयरी उपकरण कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया है, जिससे नई तकनीकें पेपर-स्ट्रिप के रूप में हर व्यक्ति के लिए बाजार में उपलब्ध होगी।
ये परीक्षण पेपर-स्ट्रिप बड़ी डेयरी संचालकों, समूहों, पशु पालकों, दुकानदारों से लेकर हर घर में काम आ सकती है। एनडीआरआई के निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि नौ प्रकार के दूध टेस्ट करने की अलग-अलग नौ तकनीकें हैं। जिन्हें संस्थान के आविष्कारक डॉ. राजन शर्मा, डॉ. विवेक शर्मा और डॉ. रघु व उनकी टीम ने लंबे शोध के बाद विकसित किया है। ये तकनीकें पेटेंट से संरक्षित हैं और मौजूदा जांच विधियों से अधिक प्रभावी हैं।
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वीरवार को इन तकनीकों का हस्तांतरण गांधीनगर की प्रमुख डेयरी उपकरण निर्माता कंपनी एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को किया गया है। इस मौके पर कई वैज्ञानिक व कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे। निदेशक ने बताया कि इन तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग संभव होगा और दूध में मिलावट की जांच मिनटों में की जा सकेगी। उद्योग जगत से भी इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। एग्रीनोवेट इंडिया के सीईओ डॉ. प्रवीण मलिक ने कहा कि ये सफल प्रौद्योगिकियां भारतीय घरों तक उच्च गुणवत्ता वाले दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करके डेयरी क्षेत्र में क्रांति लाएंगी।
मिलावट के साथ थनेला रोग का भी पता लगेगा : एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि संस्थान की ओर से विकसित पेपर-स्ट्रिप आधारित टेस्ट से दूध में यूरिया, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, ग्लूकोज, सुक्रोज, न्यूट्रलाइजर, माल्टोडेक्सट्रिन, नमक और सोर्बिटोल जैसी मिलावटों की मिनटों में पहचान कर सकते हैं।
इसके अलावा, दूध देने वाले पशुओं में थनेला (मास्टाइटिस) रोग का पता लगाने के लिए भी एक खास टेस्ट तैयार किया गया है। जिससे कुछ टेस्ट तो तत्कालिक परिणाम देंगे, कुछ में 10 मिनट से कम समय में मिलावट व इस रोग का पता चल जाएगा। इससे लोगों को शुद्ध दूध की आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उसका स्वास्थ्य ठीक रहेगा।
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करनाल। दूध जहां हर घर की जरूरत है, वहीं बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसका उपयोग करते हैं। बड़ी खपत के कारण ही मुनाफा कमाने वालों ने इसमें मिलावट के कई तरीके निकाल लिए हैं। लेकिन अब कोई भी व्यक्ति चंद मिनटों में मिलावटी दूध की पहचान कर सकेगा, क्योंकि राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) ने दूध में मिलावट की त्वरित पहचान के लिए नौ नई तकनीकों का विकास कर लिया है।
इन तकनीकों का वीरवार को एक प्रमुख डेयरी उपकरण कंपनी को हस्तांतरित कर दिया गया है, जिससे नई तकनीकें पेपर-स्ट्रिप के रूप में हर व्यक्ति के लिए बाजार में उपलब्ध होगी।
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ये परीक्षण पेपर-स्ट्रिप बड़ी डेयरी संचालकों, समूहों, पशु पालकों, दुकानदारों से लेकर हर घर में काम आ सकती है। एनडीआरआई के निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि नौ प्रकार के दूध टेस्ट करने की अलग-अलग नौ तकनीकें हैं। जिन्हें संस्थान के आविष्कारक डॉ. राजन शर्मा, डॉ. विवेक शर्मा और डॉ. रघु व उनकी टीम ने लंबे शोध के बाद विकसित किया है। ये तकनीकें पेटेंट से संरक्षित हैं और मौजूदा जांच विधियों से अधिक प्रभावी हैं।
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वीरवार को इन तकनीकों का हस्तांतरण गांधीनगर की प्रमुख डेयरी उपकरण निर्माता कंपनी एवरेस्ट इंस्ट्रूमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को किया गया है। इस मौके पर कई वैज्ञानिक व कंपनी के अधिकारी मौजूद रहे। निदेशक ने बताया कि इन तकनीकों का बड़े पैमाने पर उपयोग संभव होगा और दूध में मिलावट की जांच मिनटों में की जा सकेगी। उद्योग जगत से भी इस पहल को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। एग्रीनोवेट इंडिया के सीईओ डॉ. प्रवीण मलिक ने कहा कि ये सफल प्रौद्योगिकियां भारतीय घरों तक उच्च गुणवत्ता वाले दूध की आपूर्ति सुनिश्चित करके डेयरी क्षेत्र में क्रांति लाएंगी।
मिलावट के साथ थनेला रोग का भी पता लगेगा : एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने बताया कि संस्थान की ओर से विकसित पेपर-स्ट्रिप आधारित टेस्ट से दूध में यूरिया, हाइड्रोजन पेरोक्साइड, ग्लूकोज, सुक्रोज, न्यूट्रलाइजर, माल्टोडेक्सट्रिन, नमक और सोर्बिटोल जैसी मिलावटों की मिनटों में पहचान कर सकते हैं।
इसके अलावा, दूध देने वाले पशुओं में थनेला (मास्टाइटिस) रोग का पता लगाने के लिए भी एक खास टेस्ट तैयार किया गया है। जिससे कुछ टेस्ट तो तत्कालिक परिणाम देंगे, कुछ में 10 मिनट से कम समय में मिलावट व इस रोग का पता चल जाएगा। इससे लोगों को शुद्ध दूध की आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उसका स्वास्थ्य ठीक रहेगा।