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नशा मिटाने का संकल्प ले चुनावी दंगल में उतरे कई प्रत्याशी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Nov 2022 02:15 AM IST
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Many candidates entered the election riots taking a pledge to eradicate drug addiction
नशा गांवों में अपनी जड़ें मजबूत कर चुका है। युवा इसके मकड़जाल में फंसते जा रहे हैं। बेरोजगारी के साथ नशे की लत घर- परिवारों को बर्बादी की ओर ले जा रही है, दूसरी ओर आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही है। ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में इस बार नशा एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। कई ऐसे प्रत्याशी भी हैं, जिन्होंने नशा मुक्त चुनाव लड़ने का संकल्प लिया है। उनका मुख्य मुद्दा क्षेत्र का विकास है। महिलाओं को पचास फीसदी आरक्षण मिला तो महिला प्रत्याशियों की संख्या भी आधी है। महिलाएं पहले से ही नशे के खिलाफ हैं। ऐसे में नशा मुक्त होकर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को महिला मतदाताओं का भी समर्थन अधिक मिल रहा है।
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करनाल जिले में जिला परिषद के 25 वार्ड हैं, इनमें कुल 239 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें महिला प्रत्याशियों की संख्या 107 है, जबकि 132 पुरुष प्रत्याशी अपना भाग्य आजमा रहे हैं। यूं तो क्षेत्र में ग्रामीण अंचलों की सड़कें, शिक्षण संस्थान, रोजगार आदि कई चुनावी मुद्दे बने हैं, लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा इस बार के चुनाव में नशा मुक्ति ही है। पहले भी नशे का मुद्दा सामने आता था लेकिन चुनावी सरगर्मियां तेज होने के कारण खत्म हो जाता था। क्योंकि चुनाव में शराब वितरण आम हो जाता था, लेकिन ये पहला मौका है जब नशा मुक्त चुनाव मुद्दा बना है। प्रत्याशियों ने चुनाव में शराब का वितरण न करने का संकल्प लिया है। जिला परिषद सदस्य पदों के लिए मतदान नौ नवंबर को होना है। ढाक वाला गुजरान गांव में कई गणमान्य लोगों की पंचायत भी हुई, जिसमें ऐसे प्रत्याशी को ही वोट देने की बात कही गई, जो नशा मुक्त चुनाव प्रचार कर रहा हो।
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युवाओं को दिलाएंगे रोजगार
जिला परिषद के वार्ड-15 में कुंजपुरा मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन ईलम सिंह चुनाव मैदान में हैं, उन्हें भाजपा का समर्थन भी हासिल हो गया है। ईलम सिंह ने बताया कि वह नशा मुक्त चुनाव का संकल्प लेकर ही चुनाव में उतरे हैं। वह अपनी छवि और भाजपा सरकार के कार्यों को लेकर वोट मांग रहे हैं। नशा समाज को खोखला कर रहा है, इसका प्रयोग चुनाव में नहीं होने दूंगा, लोग इसके समर्थन में उनसे जुड़ रहे हैं। क्योंकि युवाओं के लिए खेल, रोजगार आदि के साधनों को उपलब्ध कराना ही मुख्य मुद्दा है।
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नशाखोरी खत्म हो
जिला परिषद के वार्ड 13 से आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार जगजीत सिंह साही बताते हैं कि वह पार्टी के उम्मीदवार हैं, वह दिल्ली विकास मॉडल पर चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन नशे के पूर्णत: खिलाफ हैं। इस बार चुनाव में नशा मुख्य मुद्दा बना है, इसका मतलब साफ है कि समाज चाहता है कि नशाखोरी खत्म होनी चाहिए। यही कारण है कि नशे से पूरी तरह दूर रहकर चुनाव प्रचार कर रहा हूं।
चुनाव के दौरान बढ़ जाता है नशा
जिला परिषद वार्ड-चार से प्रत्याशी सविता देवी का कहना है कि नशा पिछले लंबे समय से घरों और परिवारों को बर्बाद करता है। जब भी चुनाव होता है तो ये अत्यधिक बढ़ जाता है। प्रतिबंध के बाद भी नशा चुनावी फिजा में देखने को मिलता है, लेकिन वह नशे के शुरू से ही खिलाफ हैं। इसलिए उनका प्रण है कि चुनाव विकास के मुद्दे पर लड़ूगी, नशे का प्रयोग नहीं होने दूंगी।

युवाओं को दिलाएंगे खेल सुविधाएं
जिला परिषद वार्ड 12 से प्रत्याशी निकिता राणा का कहना है कि चुनाव में उतरने से पहले ही ये एलान कर दिया था कि नशा मुक्त समाज उनका चुनावी मुद्दा रहेगा। चुनाव में किसी भी तरह से शराब या किसी अन्य नशे का प्रयोग नहीं होने दूंगी। यही कारण है कि वह व उनके पिता दिलबाग राणा पहले सरपंच रह चुके हैं, उन्हें चुनाव लड़ने का अनुभव भी है, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा और युवाओं के लिए खेल सुविधाएं, रोजगार आदि मुद्दा हैं।
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