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पीने लायक नहीं करनाल का पानी, 20 सैंपल फेल
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जिले के कुछ क्षेत्रों में पानी पीने के लायक नहीं है। इसका खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार जून में लिए गए 20 सैंपल फेल पाए गए हैं। इनमे 9 सैंपल वे हैं जिनके पानी में कीटाणु पाये गए हैं। इंद्री सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के तहत आने वाले क्षेत्र की स्थित सबसे ज्यादा खराब है। जहां विभाग द्वारा लिए गए सभी पांच सैंपल फेल मिले हैं। जिले में लगभग 10.8 प्रतिशत पीने के पानी के सैंपल स्वास्थ्य विभाग के टेस्ट में पास नहीं हो पाए। विभाग की टीम द्वारा जून में जिले के विभिन्न हिस्सों से 120 पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 9 सैंपल मानव उपभोग के लिए अयोग्य पाए गए। इसके अलावा 11 सैंपल हाइपर क्लोरीन के सामने आए हैं।
इंद्री सीएचसी के तहत आने वाले क्षेत्र से पांच सैंपल लिए गए थे ये सभी फेल पाए गए हैं। घरौंडा सीएचसी के तहत आने वाले क्षेत्र से लिए गए पांच सैंपल में से दो और पोपड़ा पीएचसी के तहत चार सैंपलों में से एक फेल पाया गया है। यहां तक कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बल्ला का पानी भी पीने योग्य नहीं है। पब्लिक हेल्थ के अनुसार जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग के तहत 586 ट्यूबवेल और आठ बूस्टर स्टेशन हैं। डिप्टी सीएमओ और टेस्ट सेल प्रभारी डॉ. राजेश गोरिया ने बताया कि 120 सैंपलों में से 9 में ईकोली जैसे मल-संबंधी बैक्टीरिया पाया गया है- जो पानी को उपभोग के लिए अनुपयुक्त बनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के अनुपचारित पानी पीने से खासकर बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसे स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी सैंपल स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों, कॉलोनियों, ट्यूबवेल और बूस्टर स्टेशनों आदि से लिए गए थे।
हर महीने होते हैं सैंपल फेल, नहीं होती करवाई
स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर महीने पीने के पानी के सैंपल लिए जाते हैं और हर महीने कहीं न कहीं के सैंपल फेल पाए जाते हैं लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि हर महीने सैंपल फेल पाए जाते हैं। किसी में कीटाणु तो किसी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम हर महीने पीने के पानी के सैंपल लेती है और जिन क्षेत्रों में नमूने फेल होते हैं, वहां के अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
-डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश गोरिया
हम पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खुद भी टेस्ट करते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए टेस्ट में जो सैंपल फेल पाए गए हैं हम वहां से सैंपल लेकर दोबारा जांच करेंगे और रिपोर्ट के अनुसार सुधारात्मक उपाय करेंगे। विभाग की टीमें नियमित रूप से सभी ट्यूबवेल और बूस्टर पंपों में क्लोरीनीकरण के स्तर की निगरानी करती हैं।
-शिवराज, अधीक्षण अभियंता (एसई) पब्लिक हेल्थ, करनाल
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इंद्री सीएचसी के तहत आने वाले क्षेत्र से पांच सैंपल लिए गए थे ये सभी फेल पाए गए हैं। घरौंडा सीएचसी के तहत आने वाले क्षेत्र से लिए गए पांच सैंपल में से दो और पोपड़ा पीएचसी के तहत चार सैंपलों में से एक फेल पाया गया है। यहां तक कि सीनियर सेकेंडरी स्कूल बल्ला का पानी भी पीने योग्य नहीं है। पब्लिक हेल्थ के अनुसार जिले में सार्वजनिक स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग विभाग के तहत 586 ट्यूबवेल और आठ बूस्टर स्टेशन हैं। डिप्टी सीएमओ और टेस्ट सेल प्रभारी डॉ. राजेश गोरिया ने बताया कि 120 सैंपलों में से 9 में ईकोली जैसे मल-संबंधी बैक्टीरिया पाया गया है- जो पानी को उपभोग के लिए अनुपयुक्त बनाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह के अनुपचारित पानी पीने से खासकर बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग हैजा, टाइफाइड और पेचिश जैसे स्वास्थ्य विकार हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ये सभी सैंपल स्कूलों, सार्वजनिक स्थानों, कॉलोनियों, ट्यूबवेल और बूस्टर स्टेशनों आदि से लिए गए थे।
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हर महीने होते हैं सैंपल फेल, नहीं होती करवाई
स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर महीने पीने के पानी के सैंपल लिए जाते हैं और हर महीने कहीं न कहीं के सैंपल फेल पाए जाते हैं लेकिन आज तक कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण है कि हर महीने सैंपल फेल पाए जाते हैं। किसी में कीटाणु तो किसी में क्लोरीन की मात्रा ज्यादा पाई जाती है।
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स्वास्थ्य विभाग की टीम हर महीने पीने के पानी के सैंपल लेती है और जिन क्षेत्रों में नमूने फेल होते हैं, वहां के अधिकारियों को नोटिस भेजा है।
-डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश गोरिया
हम पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खुद भी टेस्ट करते हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए टेस्ट में जो सैंपल फेल पाए गए हैं हम वहां से सैंपल लेकर दोबारा जांच करेंगे और रिपोर्ट के अनुसार सुधारात्मक उपाय करेंगे। विभाग की टीमें नियमित रूप से सभी ट्यूबवेल और बूस्टर पंपों में क्लोरीनीकरण के स्तर की निगरानी करती हैं।
-शिवराज, अधीक्षण अभियंता (एसई) पब्लिक हेल्थ, करनाल