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Karnal News: तारीख पर तारीख से थे परेशान, लोक अदालत में मिला निदान
Sun, 14 Sep 2025 01:25 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:25 AM IST
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151.... नैशनल लोक अदालत में अपनी कोर्ट व अपने नंबर की जानकारी लेते लोग। संवाद
- फोटो : mathura
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मानसी माैर्य
करनाल। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को कई लोगों को समाधान के साथ सुकून भी मिला। तारीख पर तारीख से परेशान लोगों को निदान मिला। 5-5 साल से चल रहे मुकदमों का मौके पर ही निबटारा हुआ। वाहनों के चालान के मामले में जुर्माने की आधी रकम में ही समझौता हो गया। अधिकांश लोग संतुष्ट रहे। कुछ मामलों में समझौता नहीं हो सका।
पांच साल पहले सुरेश ने पत्नी से तलाक लेने का केस डाला था। अब तक लगभग दो लाख रुपये केस पर खर्च हो चुके थे। कोई निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा था। वकील की सलाह पर लोक अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया। अदालत में समय और पैसे, दोनों की बचत हुई। नि:शुल्क एक दिन में मुकदमे में फैसला हो गया। अदालत ने परस्पर सहमति के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया।
जिला न्याय परिसर में लगी लोक अदालत में छह जजों की बेंच ने मुकदमों का निर्णय लिया। लोक अदालत में कुल 19035 मुकदमों में से 15831 मामलों का समाधान हुआ। इनमें पारिवारिक मामले, चालान मामले और चैक बाउंस सहित कई मामले शामिल रहे।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डाॅ. इरम हसन ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को लंबी न्याय प्रक्रिया से राहत दिलाना ही है। लोगों को प्रेरित किया जाता है कि वे लोक अदालत में आकर समय और पैसों की बचत कर अपने आप को लंबी प्रक्रिया से बचाएं।
14 हजार के चालान का छह हजार में निपटारा
-घोघड़ीपुर निवासी रजन ने बताया कि उनकी कार का चालान पिछले डेढ़ साल से लटका हुआ था। चालान कई बार कटा, जिससे उसकी राशि 14 हजार रुपये तक पहुंच गई थी। लोक अदालत में चालान को कम राशि में ही निपटा दिया जाता है। यह जानकर दस दिन पहले ही कोर्ट में आवेदन किया था। लोक अदालत में 14 हजार का चालान केवल छह हजार रुपये निबट गया।
दुर्घटना की बीमा राशि का मिला पूरा मुआवजा
कोंड निवासी शंकर ने बताया कि उनके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। पिता ने अपना जीवन बीमा करवाया हुआ था। क्लेम किया लेकिन बीमा पाॅलिसी का दावा नहीं मिल पा रहा था। लोक अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया गया। परिवार को बीमे की पूरी राशि का मुआवजा दिलवाया गया। उन्होंने बताया कि बीमे की राशि न मिलने पर दो साल पहले बीमा कंपनी पर केस किया था। राशि कम देने के समझाैते के कारण मामले का निर्णय नहीं हो पा रहा था। लोक अदालत में पूरी राशि का भुगतान करवाया गया।
पांच साल से परेशान थे, निकला समाधानमटक माजरा निवासी सुरेश ने बताया कि उनका अदालत में पांच साल से तलाक का केस चल रहा था। अदालत की ओर से तारीख पर तारीख मिल रही थी। कोई समाधान नहीं मिल पा रहा था। अधिवक्ता के कहने पर अपना मुकदमा लोक अदालत में लगवाया। कोर्ट ने आपस में बातचीत करने का समय दिया। अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से पांच साल से चल रहे मामले पर कार्रवाई की गई और तलाक का ऑर्डर दे दिया गया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में मुकदमा रखने से कम समय में ही फैसला हो गया।
-ढाई साल से चल रहा था केस, ढाई घंटे में हुआ निबटारा
आनंद बिहार निवासी संजय ने बताया कि उनका चेक बाउंस का मामला ढाई साल से अदालत में लंबित था। तीन लाख का चेक बाउंस हो गया था। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षकारों के बीच बातचीत करवाई गई। ढाई लाख रुपये में समझाैता हो गया। उन्होंने बताया कि चेक बाउंस का केस करने पर अदालत में कोई फैसला पक्ष में नहीं आ रहा था, जिसमें मानसिक और आर्थिक रूप से थकान भी होने लगी थी। लोक अदालत में मामला ढाई घंटे के अंदर निबट गया।
-आबकारी के मामलों का भी समाधान
लोक अदालत में आबकारी के मामलों का भी समाधान हुआ। एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि वह पंजाब से हरियाणा आ रहे थे। उनके ट्रक में 10 शराब की बोतलें पुलिस की जांच के दौरान मिलीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर अदालत तक भेज दिया, जिसमें पिछले सात महीने से अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे थे। आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अदालत की ओर से एक साल की सजा का भी ऑर्डर दिया जाने वाला था। वह अपनी गलती मानना चाहते थे। मुकदमा लोक अदालत में दर्ज किया गया। अदालत ने 250 रुपये एक बोतल के हिसाब से 10 बोतल का जुर्माना 10 हजार लिया। अदालत को विश्वास दिलाया कि वह दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा, जिसके बाद उसके मुकदमा खत्म कर दिया गया।
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करनाल। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को कई लोगों को समाधान के साथ सुकून भी मिला। तारीख पर तारीख से परेशान लोगों को निदान मिला। 5-5 साल से चल रहे मुकदमों का मौके पर ही निबटारा हुआ। वाहनों के चालान के मामले में जुर्माने की आधी रकम में ही समझौता हो गया। अधिकांश लोग संतुष्ट रहे। कुछ मामलों में समझौता नहीं हो सका।
पांच साल पहले सुरेश ने पत्नी से तलाक लेने का केस डाला था। अब तक लगभग दो लाख रुपये केस पर खर्च हो चुके थे। कोई निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा था। वकील की सलाह पर लोक अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया। अदालत में समय और पैसे, दोनों की बचत हुई। नि:शुल्क एक दिन में मुकदमे में फैसला हो गया। अदालत ने परस्पर सहमति के आधार पर तलाक मंजूर कर लिया।
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जिला न्याय परिसर में लगी लोक अदालत में छह जजों की बेंच ने मुकदमों का निर्णय लिया। लोक अदालत में कुल 19035 मुकदमों में से 15831 मामलों का समाधान हुआ। इनमें पारिवारिक मामले, चालान मामले और चैक बाउंस सहित कई मामले शामिल रहे।
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मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी डाॅ. इरम हसन ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लोगों को लंबी न्याय प्रक्रिया से राहत दिलाना ही है। लोगों को प्रेरित किया जाता है कि वे लोक अदालत में आकर समय और पैसों की बचत कर अपने आप को लंबी प्रक्रिया से बचाएं।
14 हजार के चालान का छह हजार में निपटारा
-घोघड़ीपुर निवासी रजन ने बताया कि उनकी कार का चालान पिछले डेढ़ साल से लटका हुआ था। चालान कई बार कटा, जिससे उसकी राशि 14 हजार रुपये तक पहुंच गई थी। लोक अदालत में चालान को कम राशि में ही निपटा दिया जाता है। यह जानकर दस दिन पहले ही कोर्ट में आवेदन किया था। लोक अदालत में 14 हजार का चालान केवल छह हजार रुपये निबट गया।
दुर्घटना की बीमा राशि का मिला पूरा मुआवजा
कोंड निवासी शंकर ने बताया कि उनके पिता का सड़क दुर्घटना में निधन हो गया था। पिता ने अपना जीवन बीमा करवाया हुआ था। क्लेम किया लेकिन बीमा पाॅलिसी का दावा नहीं मिल पा रहा था। लोक अदालत में मुकदमा दर्ज करवाया गया। परिवार को बीमे की पूरी राशि का मुआवजा दिलवाया गया। उन्होंने बताया कि बीमे की राशि न मिलने पर दो साल पहले बीमा कंपनी पर केस किया था। राशि कम देने के समझाैते के कारण मामले का निर्णय नहीं हो पा रहा था। लोक अदालत में पूरी राशि का भुगतान करवाया गया।
पांच साल से परेशान थे, निकला समाधानमटक माजरा निवासी सुरेश ने बताया कि उनका अदालत में पांच साल से तलाक का केस चल रहा था। अदालत की ओर से तारीख पर तारीख मिल रही थी। कोई समाधान नहीं मिल पा रहा था। अधिवक्ता के कहने पर अपना मुकदमा लोक अदालत में लगवाया। कोर्ट ने आपस में बातचीत करने का समय दिया। अदालत में दोनों पक्षों की सहमति से पांच साल से चल रहे मामले पर कार्रवाई की गई और तलाक का ऑर्डर दे दिया गया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत में मुकदमा रखने से कम समय में ही फैसला हो गया।
-ढाई साल से चल रहा था केस, ढाई घंटे में हुआ निबटारा
आनंद बिहार निवासी संजय ने बताया कि उनका चेक बाउंस का मामला ढाई साल से अदालत में लंबित था। तीन लाख का चेक बाउंस हो गया था। राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षकारों के बीच बातचीत करवाई गई। ढाई लाख रुपये में समझाैता हो गया। उन्होंने बताया कि चेक बाउंस का केस करने पर अदालत में कोई फैसला पक्ष में नहीं आ रहा था, जिसमें मानसिक और आर्थिक रूप से थकान भी होने लगी थी। लोक अदालत में मामला ढाई घंटे के अंदर निबट गया।
-आबकारी के मामलों का भी समाधान
लोक अदालत में आबकारी के मामलों का भी समाधान हुआ। एक ट्रक ड्राइवर ने बताया कि वह पंजाब से हरियाणा आ रहे थे। उनके ट्रक में 10 शराब की बोतलें पुलिस की जांच के दौरान मिलीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर अदालत तक भेज दिया, जिसमें पिछले सात महीने से अदालत के चक्कर काटने पड़ रहे थे। आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अदालत की ओर से एक साल की सजा का भी ऑर्डर दिया जाने वाला था। वह अपनी गलती मानना चाहते थे। मुकदमा लोक अदालत में दर्ज किया गया। अदालत ने 250 रुपये एक बोतल के हिसाब से 10 बोतल का जुर्माना 10 हजार लिया। अदालत को विश्वास दिलाया कि वह दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगा, जिसके बाद उसके मुकदमा खत्म कर दिया गया।

151.... नैशनल लोक अदालत में अपनी कोर्ट व अपने नंबर की जानकारी लेते लोग। संवाद- फोटो : mathura