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Karnal News: मैं सोलह साल की होगी मैंने भरतार चाहिए सै...
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करनाल। श्री सनातन धर्म शिव मंदिर सभा सराफा बाजार की ओर से महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में रामलीला मैदान में चल रहे सांग में कलाकार नीतू ने ओढ़ना और पहरना शृंगार चाहिए सै, मैं सोलह साल की होगी मैंने भरतार चाहिए सै गाने पर नृत्य कर खूब वाहवाही लूटी।
बुधवार को सांग में गांव चुहड़ा माजरा कैथल के सांगी मोहम्मद मीर और उनकी टीम ने चंद्रहास सांग का मंचन करते हुए बताया कि चंद्रहास नाम का एक राजकुमार था। एक युद्ध में उसके पिता राजा सुधार्मिक की मृत्यु को गई तो उसकी मां भी उसके पिता की ही चिता पर सती हो गई थी। ऐसे में चंद्रहास अनाथ हो गया। चंद्रहास के भी प्राणों पर संकट देख, एक दासी, चंद्रहास को अपने कपड़ों में छिपा कर अपने घर ले गई और उसे अपना पुत्र समझकर पाला। इधर चंद्रहास कुछ बड़ा हुआ तो मंत्री धृष्टबुद्धि ने ब्राह्मणों से अपनी एकमात्र कन्या विषया के भावी वर के बारे में पूछा। ब्राह्मणों ने वहां पास ही खेलते उसी दासी पुत्र, चंद्रहास की ओर इशारा कर दिया। धृष्टबुद्धि ने विचार किया कि मैं अपनी कन्या का विवाह दासी पुत्र के साथ कैसे होने दे सकता हूं।
धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास के वध की आज्ञा दे दी। वधिक चंद्रहास को मारने के लिए वन ले गए। पर दैवयोग से उन्हें बालक पर दया आ गई। चंद्रहास के एक हाथ में छह अंगुलियां थीं। उन्होंने उसकी वही छठी अंगुली काट कर उसे छोड़ दिया और वह अंगुली धृष्टबुद्धि को दिखा दी। यहां चंद्रहास पड़ोस के राज्य में रहने लगा। एक दिन वह वन के मार्ग में सोया हुआ था। कुछ पक्षी अपने पंखों को फैला कर उसके चेहरे पर छाया कर रहे थे। संयोग से यह दृश्य वहां के राजा कुलिंद ने देख लिया। कुलिंद का कोई पुत्र नहीं था। उसने चंद्रहास को विलक्षण बालक जानकर गोद ले लिया। किसी राज कार्यक्रम में, धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास को देखा तो पहचान लिया कि यह तो वही दासी पुत्र है। कुलिंद्र को बहला कर धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास को मित्रता करने के बहाने अपने पुत्र मदन के पास भेज दिया। साथ में एक पत्र भी भेजा जिसमें लिखा था कि प्रिय मदन इसे देखते ही, बिना कुछ पूछे, इसे विष दे दो। चंद्रहास महल पहुंचा तो मदन से पहले उसे वही धृष्टबुद्धि की पुत्री विषया मिल गई। विषया ने पत्र पढ़ा तो विष के स्थान पर विषया कर दिया। मदन ने पत्र पाया तो चंद्रहास और विषया का विवाह करा दिया।
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इस अवसर पर बीबी गुप्ता, जिले सिंह, बालकिशन शर्मा, गौरव गर्ग, विजय अग्रवाल, राजन गुप्ता, संजय गोयल, प्रभात गुप्ता, चंदन गर्ग, विनोद भाटिया, रविंद्र बंसल व नंद किशोर गोयल आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को सांग में गांव चुहड़ा माजरा कैथल के सांगी मोहम्मद मीर और उनकी टीम ने चंद्रहास सांग का मंचन करते हुए बताया कि चंद्रहास नाम का एक राजकुमार था। एक युद्ध में उसके पिता राजा सुधार्मिक की मृत्यु को गई तो उसकी मां भी उसके पिता की ही चिता पर सती हो गई थी। ऐसे में चंद्रहास अनाथ हो गया। चंद्रहास के भी प्राणों पर संकट देख, एक दासी, चंद्रहास को अपने कपड़ों में छिपा कर अपने घर ले गई और उसे अपना पुत्र समझकर पाला। इधर चंद्रहास कुछ बड़ा हुआ तो मंत्री धृष्टबुद्धि ने ब्राह्मणों से अपनी एकमात्र कन्या विषया के भावी वर के बारे में पूछा। ब्राह्मणों ने वहां पास ही खेलते उसी दासी पुत्र, चंद्रहास की ओर इशारा कर दिया। धृष्टबुद्धि ने विचार किया कि मैं अपनी कन्या का विवाह दासी पुत्र के साथ कैसे होने दे सकता हूं।
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धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास के वध की आज्ञा दे दी। वधिक चंद्रहास को मारने के लिए वन ले गए। पर दैवयोग से उन्हें बालक पर दया आ गई। चंद्रहास के एक हाथ में छह अंगुलियां थीं। उन्होंने उसकी वही छठी अंगुली काट कर उसे छोड़ दिया और वह अंगुली धृष्टबुद्धि को दिखा दी। यहां चंद्रहास पड़ोस के राज्य में रहने लगा। एक दिन वह वन के मार्ग में सोया हुआ था। कुछ पक्षी अपने पंखों को फैला कर उसके चेहरे पर छाया कर रहे थे। संयोग से यह दृश्य वहां के राजा कुलिंद ने देख लिया। कुलिंद का कोई पुत्र नहीं था। उसने चंद्रहास को विलक्षण बालक जानकर गोद ले लिया। किसी राज कार्यक्रम में, धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास को देखा तो पहचान लिया कि यह तो वही दासी पुत्र है। कुलिंद्र को बहला कर धृष्टबुद्धि ने चंद्रहास को मित्रता करने के बहाने अपने पुत्र मदन के पास भेज दिया। साथ में एक पत्र भी भेजा जिसमें लिखा था कि प्रिय मदन इसे देखते ही, बिना कुछ पूछे, इसे विष दे दो। चंद्रहास महल पहुंचा तो मदन से पहले उसे वही धृष्टबुद्धि की पुत्री विषया मिल गई। विषया ने पत्र पढ़ा तो विष के स्थान पर विषया कर दिया। मदन ने पत्र पाया तो चंद्रहास और विषया का विवाह करा दिया।
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इस अवसर पर बीबी गुप्ता, जिले सिंह, बालकिशन शर्मा, गौरव गर्ग, विजय अग्रवाल, राजन गुप्ता, संजय गोयल, प्रभात गुप्ता, चंदन गर्ग, विनोद भाटिया, रविंद्र बंसल व नंद किशोर गोयल आदि मौजूद रहे।