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'मै नेत्रहीन हूं, दुनिया के रंग नहीं देख सकता पर एचएसवीपी का भ्रष्टाचार छिपा नहीं सका'

Sun, 31 May 2020 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हिसार)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल (हिसार) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Sun, 31 May 2020 02:27 AM IST
सार

  • न्याय के लिए भटक रहा सहायक जिला न्यायवादी, बोला-भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई तो नौकरी पर बन आई
  • हरियाणा राज्य विकास प्राधिकरण और संपदा अधिकारी पर लगाए गंभीर आरोप, जांच और कार्रवाई की लगाई गुहार

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i am blind but could not hide corruption

विस्तार

मैं नेत्रहीन हूं, दुनिया के रंग नहीं देख सकता लेकिन एचएसवीपी विभाग का भ्रष्टाचार नहीं छिपा सकता। फाइलों को बिना पढ़े ही साइन करने के लिए मुझ पर दबाव बनाया गया लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। मैंने हर फाइल पढ़ी, गलत लगा तो उसे रोकने का प्रयास भी किया, जो विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और दलालों को खटकने लगा। 

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इसी का नतीजा है कि मैं आज तीन माह से न्याय के लिए भटक रहा हूं। यह कहना है दोनों आंखों से नेत्रहीन एचएसवीपी करनाल में सहायक जिला न्यायवादी के पद पर तैनात जसविंद्र सिंह की है। कहीं पर भी सुनवाई नहीं होने के कारण शनिवार को अमर उजाला कार्यालय में आस लिए आए जसविंद्र सिंह और उनके माता-पिता ने अपना दर्द बयां किया।
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जसविंद्र सिंह ने बताया कि वर्ष-2019 में उनका चयन एडीए के तौर पर हुआ। 28 जून, 2019 में अभियोजन विभाग की ओर से उसे हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण में तैनात कर दिया गया। कुछ दिन ठीक चला लेकिन जैसे ही विवादित फाइलें आई तो मेरी तरफ से उन पर आपत्ति लगाई गई। इसके लिए बार-बार संपदा अधिकारी ने मुझ पर दबाव बनाया कि इन फाइलों पर साइन करो लेकिन मैंने बिना पढ़े किसी फाइल पर साइन करने से मना कर दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया। 

इस पर 19 मार्च, 2020 को संपदा अधिकारी अनुपमा सांगवान ने उनके रीलिविंग आर्डर जारी कर दिए और वापस अभियोजन विभाग में ज्वाइन करने के लिए कहा। 20 मार्च को जब लिखित सूचना लेकर अभियोजन विभाग हरियाणा में पहुंचा तो वहां पर जवाब दिया गया कि आपको ज्वाइन नहीं कराया जा सकता और न ही वेतन दिया जा सकता है। जसविंद्र का आरोप है कि फाइलों को पास कराने के लिए दलाल ऑफिस में घूमते रहते हैं और पैसे लेकर फाइलें पास कराने का खेल चलता है। जब मैने इस पर अंकुश लगाने का प्रयास किया तो मुझे प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है। 

नियमों के खिलाफ की गई कार्यवाही 
एडीए जसविंद्र के मामले में रंजिश और जबरदस्ती साफ झलकती है। क्योंकि जो उसके साथ किया गया वह कानून के दायरे से बाहर जाकर किया गया। नियमों के अनुसार, जसविंद्र सिंह को एसएचवीपी विभाग में 28 जून, 2019 से 27 जून 2022 तक अपनी सेवाएं देनी थी। नियमानुसार सहायक जिला न्यायवादी के स्थानांतरण और नियुक्ति से वापस बुलाए जाने की शक्तियां न्याय प्रशासक विभाग के पास है। जबकि हुडा के मुख्य प्रशासक की ओर से 16 मार्च 2020 को वापस अभियोजन विभाग में भेजने के आदेश दिए गए। इसी आधार पर 19 मार्च 2020 को जसविंद्र सिंह को रिलीव कर दिया गया। 

लोगों को न्याय दिलाने के लिए की कानून की पढ़ाई, अब अपने लिए लड़नी है लड़ाई
जसविंद्र सिंह ने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि क्या ईमानदारी से कार्य करना गुनाह है, जिसकी सजा मुझे दी गई है। मैं न तो दलालों के सामने झुका और न ही मिलीभगत करके गलत काम करने वाले अधिकारियों के सामने। एडीए जसविंद्र ने कहा कि कानून की पढ़ाई इसलिए की थी वह लोगों को न्याय दिलाएगा लेकिन अब उसे अपने लिए न्याय की लड़ाई लड़नी है जिसे वह अंतिम सांस तक लड़ने के लिए तैयार है। 

रो पड़े माता-पिता

बच्चे का दर्द बयां करते हुए पिता त्रिलोक सिंह की आंखों में आंसू आ गये। वह रिटायर्ड फौजी है। उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत से बच्चे को पढ़ाया और ईमानदारी सिखाई है। उन्होंने मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और जसविंद्र सिंह को दुबारा से बहाल करने की गुहार लगाई है। इससे पहले उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी आपबीती सुनाई है। 

फाइलें रोकते थे और झगड़ा करते थे: संपदा अधिकारी
इस बारे में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण की संपदा अधिकारी अनुपमा सांगवान का कहना है कि एडीए जसविंद्र सिंह ने अपने नौ माह के कार्यकाल में मुश्किल से दो से चार फाइलें ही पास की होंगी। वे हर फाइल पर आब्जेक्शन लगाकर उसे रोक देते थे। इसको लेकर लोगों ने सीएम विंडो पर भी शिकायत की थी और मुख्य प्रशासक के पास भी शिकायतें पहुंची थी।

इतना ही नहीं एडीए ऑफिस में कई बार झगड़ा कर चुके हैं और उनके साथ उनके माता और पिता दोनों ही ऑफिस में ही बैठे रहते थे। मैंने सिर्फ सीए के आदेश को कंपलाइंस किया है। जहां तक भ्रष्टाचार के आरोप हैं, वे निराधार हैं, अगर उनके पास कोई सबूत है तो वे सामने रखें।

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