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Karnal News: वैट के लंबित मामले निपटाने को एकमुश्त भुगतान योजना लाएगी सरकार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2023 02:30 AM IST
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Government will bring one-time payment scheme to settle pending VAT cases
- छह साल से लंबित हैं वैट के मामले, 11 हजार करोड़ टैक्स पर लगा इतना ही जुर्माना-ब्याज
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- पहली जनवरी को मुख्यमंत्री करेंगे योजना की शुरुआत, 31 दिसंबर को गुरुग्राम में होगी बैठक
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। करीब छह साल से लंबित वैट के मामलों को निपटाने के लिए प्रदेश सरकार तैयार हो गई है। इसके लिए एकमुश्त भुगतान योजना लाई जा रही है। जिसे पहली जनवरी 2024 को मुख्यमंत्री मनोहर लाल लागू करेंगे। इससे पहले कराधान विभाग के अधिकारियों के साथ 31 दिसंबर को गुरुग्राम में बैठक होगी।

इसे लेकर आबकारी एवं कराधान आयुक्त हरियाणा की ओर से पत्र भी जारी किया गया है। विदित हो कि 10 दिसंबर के अंक में अमर उजाला ने भी इस मुद्दे को उठाया था। जीएसटी लाने के बाद केंद्र सरकार की ओर से वैट को खत्म कर दिया गया था, लेकिन वैट के समय का टैक्स अभी तक प्रदेश के व्यापारियों पर बकाया है। करीब 11 हजार करोड़ रुपये के वैट पर छह वर्षों में ब्याज और जुर्माना लगने के बाद 22 हजार करोड़ रुपये की देनदारी बन चुकी है। इनमें से करनाल के व्यापारियों पर कराधान विभाग का करीब सात हजार करोड़ रुपये बकाया है।
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इधर, जहां अब विभाग की ओर से व्यापारियों पर वैट की बकाया राशि जमा कराने की सख्ती की जा रही थी। वहीं व्यापारी भी सरकार से राहत की आस लगाए थे। हरियाणा कर बार एसोसिएशन के माध्यम से मुख्यमंत्री, कराधान मंत्री, एसीएस और आयुक्त को मांगपत्र भेजा गया था जिसमें व्यापारियों के कर पर ब्याज और जुर्माने की एकमुश्त योजना लाने की मांग उठाई गई है। ताकि एकमुश्त भुगतान में उन्हें ब्याज और जुर्माने में राहत मिले और वे कर का भुगतान करते हुए लंबित मामलों से निजात पा सकें। गौरतलब है कि जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने वैट को खत्म कर दिया था। व्यापारियों एवं अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016-17 तक के केसों में इनपुट मैच न होने के कारण और वैट के फॉर्म जमा न करवाने के कारण कर पर ब्याज और जुर्माना अभी तक भी बकाया है।
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अतिरिक्त कर को रिफंड करे सरकार
व्यापारियों का कहना है कि जहां कर पर ब्याज और जुर्माना की एकमुश्त स्कीम लाकर उन्हें निजात दे, साथ ही सरकार की तरफ उनके कर के रूप में जो पैसे अधिक गए हैं, उसको भी रिफंड किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि इसके लिए उच्च अधिकारियों के पास अपील की है, यह भी ज्यादा केस होने के कारण लंबित है। उनका कहना है कि इन अपीलों और दूसरे व्यापारियों से फार्म लेने के लिए उन्हें चक्कर काटने में परेशानी आ रही है।

देना पड़ता है ज्यादा टैक्स
व्यापारी को माल दो प्रतिशत टैक्स पर बेचने के लिए दूसरे व्यापारी से सी फॉर्म लेकर कराधान विभाग को जमा करना होता है। यह फार्म विभाग की तरफ से दो पार्टियों के लेन-देन के आधार पर जारी किया जाता है। इसके अनुसार ही व्यापारी कर जमा करवाता है। जो सी-फार्म देते हैं उस माल पर दो प्रतिशत कर लगता है और जो सी-फार्म नहीं देते उस माल पर 13.125 प्रतिशत टैक्स देना होता है।


सरकार लंबित मामलों को निपटा सकती है। इसके लिए एकमुश्त भुगतान की योजना लाई जा रही है। इसे लेकर 31 दिसंबर को गुरुग्राम में बैठक होगी। प्रदेश के करीब 22 हजार करोड़ रुपये के वैट के लंबित मामलों को निपटाने के लिए मुख्यमंत्री, कराधान मंत्री और एसीएस को एसोसिएशन ने भी पत्र लिखा था।
- एडवोकेट संजय मदान, प्रदेशाध्यक्ष, हरियाणा कर बार एसोसिएशन
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