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उच्च गुणवत्ता के बीजों से महकेगी बागवानी
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करनाल। प्रदेश के किसानों की समृद्धि के लिए इस वर्ष एक और महत्वाकांक्षी परियोजना की सौगात मिलेगी। महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल में जल्द ही सब्जियों व फूलों के बीजों की प्रसंस्करण प्रयोगशाला तैयार होगी। विश्वविद्यालय के अंजनथली गांव स्थित परिसर में प्रयोगशाला निर्माण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। वर्ष 2021 की शुरुआत में इसका निर्माण शुरू किया गया था और फरवरी तक इसके पूरा होने की उम्मीद है। उम्मीद है कि फरवरी तक यह प्रयोगशाला क्रियान्वयन में होगी। ये जानकारी महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. समर सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में प्रयोग किए जाने वाले ज्यादातर उपकरण लाए जा चुके हैं। जिन्हें स्थापित किया जा रहा है। शुरुआती चरण में किसानों को उत्तम गुणवत्ता का धनिया व मेथी का बीज दिया जाएगा। बीज का वितरण राज्य सरकार के हरियाणा बीज वितरण निगम के मार्फत होगा। पिछले साल की शुरुआत में प्रसंस्करण प्रयोगशाला का निर्माण शुरू हुआ था। प्रयोगशाला की स्थापना का उद्देश्य बीज अंकुरण की क्षमता की जांच करना तथा नमी की मात्रा जांचना ताकि सुरक्षित भंडारण किया जा सके। बीजों की ग्रेडिंग की जाएगी ताकि हल्के व कमजोर बीज की छंटनी की जा सके। निमभन श्रेणी के बीज की छंटनी की जाएगी क्योंकि उसमें अंकुरण क्षमता कम हो जाती है।
विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. रमेश गोयल ने बताया कि इस बार विश्वविद्यालय की ओर से बीज तैयार करने के लिए उन्नत किस्म के धनिया व मेथी की बिजाई की गई है। दोनों किस्मों का उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार किया जाएगा। यही नहीं पिछले महीने किसानों को 500 किलोग्राम धनिया बीज (आनंद किस्म का) भी वितरित किया है। समय के साथ बीज उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ाएंगे। इसके अलावा पालक, मेथी, धनिया, मूली व गाजर के अच्छी किस्मों के प्रदर्शनी प्लांट लगाए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत प्रजातियों की पहचान करवाना है।
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उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में प्रयोग किए जाने वाले ज्यादातर उपकरण लाए जा चुके हैं। जिन्हें स्थापित किया जा रहा है। शुरुआती चरण में किसानों को उत्तम गुणवत्ता का धनिया व मेथी का बीज दिया जाएगा। बीज का वितरण राज्य सरकार के हरियाणा बीज वितरण निगम के मार्फत होगा। पिछले साल की शुरुआत में प्रसंस्करण प्रयोगशाला का निर्माण शुरू हुआ था। प्रयोगशाला की स्थापना का उद्देश्य बीज अंकुरण की क्षमता की जांच करना तथा नमी की मात्रा जांचना ताकि सुरक्षित भंडारण किया जा सके। बीजों की ग्रेडिंग की जाएगी ताकि हल्के व कमजोर बीज की छंटनी की जा सके। निमभन श्रेणी के बीज की छंटनी की जाएगी क्योंकि उसमें अंकुरण क्षमता कम हो जाती है।
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विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. रमेश गोयल ने बताया कि इस बार विश्वविद्यालय की ओर से बीज तैयार करने के लिए उन्नत किस्म के धनिया व मेथी की बिजाई की गई है। दोनों किस्मों का उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार किया जाएगा। यही नहीं पिछले महीने किसानों को 500 किलोग्राम धनिया बीज (आनंद किस्म का) भी वितरित किया है। समय के साथ बीज उत्पादन का क्षेत्रफल बढ़ाएंगे। इसके अलावा पालक, मेथी, धनिया, मूली व गाजर के अच्छी किस्मों के प्रदर्शनी प्लांट लगाए हैं। इसका उद्देश्य किसानों को उन्नत प्रजातियों की पहचान करवाना है।
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