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Karnal News: फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति बढ़ा किसानों का रुझान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2023 02:34 AM IST
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Farmers' inclination towards crop residue management increased
- जिले में 18924 किसानों ने किया अवशेष प्रबंधन के लिए आवेदन
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- दो वर्षों की अपेक्षा जिले में पराली जलाने की घटनाएं 59 प्रतिशत घटी

सुखदेव चौहान

करनाल। फसल अवशेष प्रबंधन के लिए जिले के किसानों ने सकारात्मक रुख अपनाया है। इस बार जिले में 18924 किसानों ने पराली न जलाकर फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आवेदन किया है। इस कार्य के लिए कृषि विभाग के उप-निदेशक वजीर सिंह को प्रदेश सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया है। इस बार जिले में पिछले दो सालों की अपेक्षा 59 प्रतिशत कम पराली जली। वहीं जिले में इस बार 126 आग लगने की घटनाएं सामने आईं जिसमें से 91 सही पाईं गईं। इस पर संज्ञान लेते हुए विभाग की ओर से 91 किसानों पर कार्रवाई करते हुए दो लाख 42 हजार 500 रुपये का जुर्माना वसूला गया। जबकि वर्ष 2022 में पराली में आग लगाने की 301 घटनाएं व 2021 में 956 घटनाएं दर्ज की गई थीं।

इस बार पराली प्रबंधन पर सरकार की ओर से किसान के लिए प्रति एकड़ एक हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि रखी गई है। विभाग की ओर से गांव स्तर पर 300, स्कूल स्तर पर 110, खंड स्तर पर 10 सीआरएम गतिविधियां आयोजित की गई। इसका परिणाम यह हुआ कि इस बार एक लाख 87 हजार 700 एकड़ भूमि के लिए 18924 किसानों ने पराली प्रबंधन के तहत विभाग की वेबसाइट agri.haryana.gov.in पर आवेदन किया है। संवाद
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जिले में धान का रकबा साढ़े चार लाख हेक्टेयर
धान के उत्पादन में करनाल प्रदेश में सबसे आगे है। इस बार भी जिले में धान का रकबा साढ़े चार लाख हेक्टेयर में बोया गया था। एक्यूआई के बढ़ने का मुख्य कारण हरियाणा में जलने वाली पराली को माना जाता था, लेकिन इस बार प्रदेश में कम पराली जलने की घटनाओं ने साबित कर दिया है कि बढ़ते प्रदूषण व एक्यूआई के लिए हरियाणा अकेले जिम्मेवार नहीं है।
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तहसील

पराली में लगी आग

घरौंडा 18

इंद्री

09

करनाल

23

बल्ला

10

निसिंग
16

असंध
43

नीलोखेड़ी
06

निगदू
01

इस बार विभाग के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों से फील्ड में जाकर शत-प्रतिशत सीआरएम गतिविधियां आयोजित करवाईं। इसके परिणामस्वरूप जिले में 18924 किसानों ने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आवेदन किया है। विभाग की ओर से सत्यापन के उपरांत सभी पंजीकृत लाभार्थियों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से राशि उपलब्ध करवाई जाएगी।

- डॉ. वजीर सिंह, उपनिदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
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