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Karnal News: एडेड कॉलेजों के स्टाफ को सरकारी संरक्षण देने की मांग
Fri, 22 Aug 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 22 Aug 2025 01:20 AM IST
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- 97 कॉलेजों के 1900 शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारी संघर्षरत
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रदेश के के 97 सरकारी अनुदान प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में कार्यरत करीब 1900 शिक्षक और अन्य कर्मचारी अपनी मांगों के लिए संघर्षरत हैं। यूनियन की सरकार से मांग है कि सभी एडेड कॉलेजों के स्टाफ को सरकार टेकओवर करे। इस दिशा में विभागीय स्तर पर फाइल चलाकर पॉलिसी भी तैयार की जाए।
यूनियन का कहना है कि जिस प्रकार पहले सरकार ने एडेड स्कूलों के कर्मचारियों को टेकओवर किया था, उसी तर्ज पर कॉलेजों के कर्मचारियों को भी सरकारी संरक्षण दिया जाए। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन, हरियाणा के महासचिव डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के माध्यम से उनकी जायज मांगों का प्रस्ताव कई बार भेजा जा चुका है लेकिन उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अध्यापकों का कहना है कि नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि मांगों के समाधान तो दूर, अब कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना भी बंद हो गया है। जुलाई 2025 का वेतन अभी तक जारी नहीं हुआ है। हालात यह हैं कि कोई कर्मचारी अपने घर के लोन की किश्त अदा करने को लेकर परेशान है, तो कोई गाड़ी का किश्त भरने में असमर्थ है। कई कर्मचारियों के लिए इलाज का खर्च भी मुश्किल हो गया है।
कर्मचारियों की मुख्य मांगे
- संशोधित मकान किराया भत्ता का लाभ दिया जाए।
- 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए।
- सेवा नियम 2006 व छुट्टी नियम 2002 में संशोधन किया जाए।
- मेडिकल भत्ता और आकस्मिक अवकाश के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। प्रदेश के के 97 सरकारी अनुदान प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में कार्यरत करीब 1900 शिक्षक और अन्य कर्मचारी अपनी मांगों के लिए संघर्षरत हैं। यूनियन की सरकार से मांग है कि सभी एडेड कॉलेजों के स्टाफ को सरकार टेकओवर करे। इस दिशा में विभागीय स्तर पर फाइल चलाकर पॉलिसी भी तैयार की जाए।
यूनियन का कहना है कि जिस प्रकार पहले सरकार ने एडेड स्कूलों के कर्मचारियों को टेकओवर किया था, उसी तर्ज पर कॉलेजों के कर्मचारियों को भी सरकारी संरक्षण दिया जाए। कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन, हरियाणा के महासचिव डॉ. संदीप कुमार का कहना है कि मुख्यमंत्री के माध्यम से उनकी जायज मांगों का प्रस्ताव कई बार भेजा जा चुका है लेकिन उनकी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। अध्यापकों का कहना है कि नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि मांगों के समाधान तो दूर, अब कर्मचारियों को समय पर वेतन मिलना भी बंद हो गया है। जुलाई 2025 का वेतन अभी तक जारी नहीं हुआ है। हालात यह हैं कि कोई कर्मचारी अपने घर के लोन की किश्त अदा करने को लेकर परेशान है, तो कोई गाड़ी का किश्त भरने में असमर्थ है। कई कर्मचारियों के लिए इलाज का खर्च भी मुश्किल हो गया है।
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कर्मचारियों की मुख्य मांगे
- संशोधित मकान किराया भत्ता का लाभ दिया जाए।
- 2006 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए।
- सेवा नियम 2006 व छुट्टी नियम 2002 में संशोधन किया जाए।
- मेडिकल भत्ता और आकस्मिक अवकाश के स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाए।