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तुम्हें हमारी बाय-बाय, अब कहीं भी काम करने के लिए नहीं देंगे परमिशन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2020 02:42 AM IST
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dc stunned at digging roads
रोड सेफ्टी कमेटी की सोमवार को लघु सचिवालय में हुई बैठक में एक के बाद एक कई सड़कों की समस्याएं डीसी सुनते रहे, लेकिन जैसे ही कमेटी के एक सदस्य ने सीट से उठकर कहा कि सर, सेक्टर-13 की सड़कें शहर में सबसे बढ़िया थी, गैस पाइपलाइन डालने को लेकर इन्हें आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) ने खोद दिया। कंपनी ने सड़कों को ठीक नहीं किया। कई माह पुरानी समस्या फिर से सुन डीसी निशांत कुमार यादव तिलमिला गए। आईजीएल के प्रतिनिधि से सख्त लहजे में कहा कि तुम्हें हमारी बाय-बाय..। अब हमें तुमसे कोई काम नहीं करवाना। नगर निगम अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कंपनी को आगे से कहीं पर भी पाइपलाइन डालने की परमिशन ना दी जाए.., प्रदेश के सभी जिला प्रशासन से भी पत्र लिखकर उनकी कार्यशैली के बारे में बताएं कि इनका काम कितना स्लो है। ताकि उन्हें भी इनके कारण पैदा होने वाले हालात से परेशान ना होना पड़े। बता दें कि घरेलू गैस पाइपलाइन के द्वारा हर घर तक पहुंचाने के लिए कंपनी की ओर से करनाल में पायलट प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है।
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(मामला-1)
बैठक में डीसी ने सड़कों की खराब हालत पर कई अधिकारियों को लताड़ लगाई और ढंग से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कहा कि अब से कोई भी विभाग किसी दूसरे विभाग या प्राइवेट एजेंसी को काम करने के लिए एनओसी या परमिशन देगा तो उसमें यह शर्त जरूर लिखें कि तोड़-फोड़ को ठीक कराना उनकी जिम्मेदारी है। यदि फिर भी ऐसा ना करें, तो सरकारी संपत्ति के नुकसान का मुकदमा दर्ज कराएं। 58 में से कुल 43 एजेंडों का निपटान हुआ।
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(मामला-2)
बिना परमिशन पब्लिक हेल्थ ने खोद दी सड़क तो काबिलियत पर उठा सवाल...
एजेंडा नंबर-11 घरौंडा की डिंगर माजरा की सड़क का था, जिसके गड्ढों को सिर्फ मिट्टी डालकर भरा गया, लेकिन सड़क नहीं बनाई। डीसी ने जब सवाल किया तो एनएचएआई प्रतिनिधि विनोद ने बताया कि सड़क पब्लिक हेल्थ ने अपनी पाइपलाइन को लेकर खोदी थी, लेकिन इसके लिए उन्होंने हमसे परमिशन नहीं ली, इसलिए हमें गड्ढों का पता नहीं। जब डीसी ने संबंधित अधिकारियों से पूछा तो पता चला कि उन्होंने काम पूरा कर लिया है, लेकिन प्रोजेक्ट के एस्टिमेट में सड़क को ठीक करना शामिल नहीं था, इसलिए सड़क यूं ही छोड़ दी। इस पर गुस्साये डीसी बोले, ये तो लापरवाही है, आपकी काबिलियत पर ही सवाल उठ रहा है। ये तो कोई इंजीनियरिंग सेंस वाली बात नहीं है कि गड्ढ़ा खोद कर छोड़ दिया और काम भी बिना परमिशन किया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन गड्ढों के कारण हादसा होता है तो संबंधित एसडीओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं।
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बॉक्स
(मामला-3)
एनएचएआई के पीडी से फोन कर कहा क्या ठेकेदार से काम नहीं करवा सकते?
नेशनल हाईवे पर कर्णेश्वर मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज एनएचएआई ने लगा दिया है, लेकिन यहां से एक निकलने वाली बिजली की 11केवी की केबल को हटा दिया गया था। जिसे दोबारा अभी तक नहीं लगाया गया। बिजली निगम के एक्सईएन के इस सवाल पर जब डीसी ने एनएचएआई प्रतिनिधि से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि हमारा ठेकेदार पुराने एस्टिमेट के तहत काम कर रहा है, यह काम हम उनसे नहीं ले पा रहे। उससे संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो डीसी ने एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से फोन कर पूछा कि वे काम क्यों नहीं करवा पा रहे हैं? डीसी ने उन्हें एक हफ्ते में काम कराने के निर्देश दिए।
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