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टोल पर टैक्स की तकरार, अब पहुंचेगा सांसद दरबार
Updated Thu, 21 Jun 2018 12:40 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
घरौंडा (करनाल)। शहर की सामाजिक संस्थाएं लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री करवाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही हैं। टोल प्लाजा पर सामाजिक संस्थाओं के विरोध के बाद भी टोल कंपनी ने अपना फैसला नहीं बदला है। टोल कंपनी लोकल वाहन चालकों पर टोल पास बनवाने का दबाव बना रही है और लगभग 500 से ज्यादा लोकल टोल पास भी बना दिए हैं। टोल कंपनी के इस फरमान के खिलाफ सामाजिक संस्थाओं ने सांसद अश्विनी चोपड़ा से मिलने का मन बनाया है, लेकिन सांसद अश्विनी चोपड़ा के संसदीय क्षेत्र से बाहर होने के कारण अभी तक मुलाकात नहीं हो पाई है। सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि वे इस मामले में सांसद से गुहार लगाएंगे। इसके बाद ही आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
साढ़े तीन साल बाद एक बार फिर लोकल वाहन चालकों पर टोल की मार पड़ रही हैं। पहली बार टोल कंपनी ने जब लोकल वाहन चालकों पर टोल थोपना चाहा था तो सामाजिक संस्थाओं के धरने प्रदर्शन के सामने टोल कंपनी के अधिकारियों को झुकना पड़ गया था और लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री कर दिया था, लेकिन अब दूसरी बार फिर लोकल वाहन चालक उसी मोड़ पर खड़े हैं। पहले जहां सामाजिक संस्थाओं ने अकेले अपने दम पर टोल फ्री करवाया था। वहीं, अबकी बार राजनीतिक पार्टियों के कुछ नेताओं ने भी टोल को लेकर अपनी बयानबाजी शुरू की थी और अपने बयानों के माध्यम से चेताया भी था कि अगर कंपनी ने लोकल वाहन चालकों पर टोल थोपा तो वे आगामी रूपरेखा तैयार करेंगे और धरना प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
गत सोमवार को शहर की सामाजिक संस्थाओं ने टोल अधिकारियों से मिली थी। टोल फ्री को लेकर संस्था के पदाधिकारियों व टोल कंपनी के अधिकारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई थी। इसके बाद टोल अधिकारियों ने संस्थाओं को कुछ दिन के लिए टोल फ्री किए जाने का आश्वासन दिया था। टोल अधिकारी फिलहाल वाहन चालकों को लोकल आईडी देखकर निकाल रहे हैं, लेकिन साथ ही लोकल वाहन चालकों को टोल पास बनवाने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। टोल अधिकारियों के मुताबिक अभी तक लगभग 500 से ज्यादा लोकल वाहन चालकों ने टोल पास बनवा लिए हैं। वहीं, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ शहर व ग्रामीण क्षेत्र के वाहन चालकों में टोल कंपनी के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा हैं। सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों की माने तो बृहस्पतिवार को दर्जनभर संस्थाएं सांसद अश्विनी चोपड़ा से मुलाकात कर सकती हैं।
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डीसी ने भी बनवा टोल पास, तो और को क्या दिक्कत है : डीजीएम
टोल कंपनी के डीजीएम संजय माथुर के मुताबिक जिला उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने भी लोकल टोल पास बनवा लिया है। जब जिला उपायुक्त लोकल टोल पास बनवा सकते है, तो जनता को भी टोल कंपनी का सहयोग करना चाहिए। टोल कंपनी कुछ दिन तक ही लोकल वाहन चालकों को लोकल आईडी के आधार पर टोल की सुविधा दे रही हैं। लोकल वाहन चालक अपना टोल पास बनवा लें। इसके बाद कोई भी छूट लोकल वाहन चालकों के लिए नहीं होगी। टोल कंपनी ने अभी तक लगभग 500 से ज्यादा वाहन चालकों के लोकल टोल पास बना दिए हैं।
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घरौंडा (करनाल)। शहर की सामाजिक संस्थाएं लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री करवाने के लिए लगातार लड़ाई लड़ रही हैं। टोल प्लाजा पर सामाजिक संस्थाओं के विरोध के बाद भी टोल कंपनी ने अपना फैसला नहीं बदला है। टोल कंपनी लोकल वाहन चालकों पर टोल पास बनवाने का दबाव बना रही है और लगभग 500 से ज्यादा लोकल टोल पास भी बना दिए हैं। टोल कंपनी के इस फरमान के खिलाफ सामाजिक संस्थाओं ने सांसद अश्विनी चोपड़ा से मिलने का मन बनाया है, लेकिन सांसद अश्विनी चोपड़ा के संसदीय क्षेत्र से बाहर होने के कारण अभी तक मुलाकात नहीं हो पाई है। सामाजिक संस्थाओं का कहना है कि वे इस मामले में सांसद से गुहार लगाएंगे। इसके बाद ही आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
साढ़े तीन साल बाद एक बार फिर लोकल वाहन चालकों पर टोल की मार पड़ रही हैं। पहली बार टोल कंपनी ने जब लोकल वाहन चालकों पर टोल थोपना चाहा था तो सामाजिक संस्थाओं के धरने प्रदर्शन के सामने टोल कंपनी के अधिकारियों को झुकना पड़ गया था और लोकल वाहन चालकों के लिए टोल फ्री कर दिया था, लेकिन अब दूसरी बार फिर लोकल वाहन चालक उसी मोड़ पर खड़े हैं। पहले जहां सामाजिक संस्थाओं ने अकेले अपने दम पर टोल फ्री करवाया था। वहीं, अबकी बार राजनीतिक पार्टियों के कुछ नेताओं ने भी टोल को लेकर अपनी बयानबाजी शुरू की थी और अपने बयानों के माध्यम से चेताया भी था कि अगर कंपनी ने लोकल वाहन चालकों पर टोल थोपा तो वे आगामी रूपरेखा तैयार करेंगे और धरना प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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गत सोमवार को शहर की सामाजिक संस्थाओं ने टोल अधिकारियों से मिली थी। टोल फ्री को लेकर संस्था के पदाधिकारियों व टोल कंपनी के अधिकारियों के बीच नोंकझोंक भी हुई थी। इसके बाद टोल अधिकारियों ने संस्थाओं को कुछ दिन के लिए टोल फ्री किए जाने का आश्वासन दिया था। टोल अधिकारी फिलहाल वाहन चालकों को लोकल आईडी देखकर निकाल रहे हैं, लेकिन साथ ही लोकल वाहन चालकों को टोल पास बनवाने के लिए भी दबाव बना रहे हैं। टोल अधिकारियों के मुताबिक अभी तक लगभग 500 से ज्यादा लोकल वाहन चालकों ने टोल पास बनवा लिए हैं। वहीं, सामाजिक संस्थाओं के साथ-साथ शहर व ग्रामीण क्षेत्र के वाहन चालकों में टोल कंपनी के खिलाफ रोष बढ़ता जा रहा हैं। सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों की माने तो बृहस्पतिवार को दर्जनभर संस्थाएं सांसद अश्विनी चोपड़ा से मुलाकात कर सकती हैं।
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डीसी ने भी बनवा टोल पास, तो और को क्या दिक्कत है : डीजीएम
टोल कंपनी के डीजीएम संजय माथुर के मुताबिक जिला उपायुक्त डॉ. आदित्य दहिया ने भी लोकल टोल पास बनवा लिया है। जब जिला उपायुक्त लोकल टोल पास बनवा सकते है, तो जनता को भी टोल कंपनी का सहयोग करना चाहिए। टोल कंपनी कुछ दिन तक ही लोकल वाहन चालकों को लोकल आईडी के आधार पर टोल की सुविधा दे रही हैं। लोकल वाहन चालक अपना टोल पास बनवा लें। इसके बाद कोई भी छूट लोकल वाहन चालकों के लिए नहीं होगी। टोल कंपनी ने अभी तक लगभग 500 से ज्यादा वाहन चालकों के लोकल टोल पास बना दिए हैं।