खेती: शरीर की राेग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है कंटोला का सेवन, औषधीय गुणों से है भरपूर
किसान औषधीय गुणों से भरपूर कंटोला की हरियाणा में भी खेती कर सकते हैं। यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
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उत्तर भारत में जंगली करेला के नाम से विख्यात कंटोला (मोमोर्डिका डायोड़का) मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है। हालांकि इस क्षेत्र में कंटोला का सेवन ज्यादा नहीं होता है लेकिन ये मानव शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। दक्षिण भारत में इसकी अधिक खेती होती है। वहीं भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के शोधकर्ताओं ने कंटोला को काफी महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि हरियाणा में भी किसान कृषि विशेषज्ञों से परामर्श लेकर इसकी फसल लगा सकते हैं।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनुज कुमार ने कहा कि कंटोला भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार, चीन, जापान, दक्षिण पूर्व एशिया, पोलिनेशिया, उष्ण कटिबंधीय अफ्रीका व दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है। भारतीय बागवानी शोध संस्थान बेंगलुरु ने इसकी मांग को देखते हुए रोग प्रतिरोधक उन्नत प्रजातियां इंदिरा कंकोड़-1, अंबिका-12-1, अंबिका-12-2 व अंबिका-12-3 आदि विकसित की हैं। जिनकी गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता अच्छी है।
कंटोला के 100 ग्राम ताजा फलों में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा
- कार्बोहाइड्रेट्स 7.7 ग्राम
- प्रोटीन 3.1 ग्राम
- वसा 3.1 ग्राम
- आहाररेशा 3.0 ग्राम
- जल 84.1 प्रतिशत
- राख (एश) 6.7 प्रतिशत
- लिपिइस 4.7 प्रतिशत
- ऊर्जा 302.6 किलो कैलोरी
सूक्ष्म पोषक तत्व प्रति सौ ग्राम
- लोहा 4.60 मिलीग्राम
- पोटाशियम 8.25 मिलीग्राम
- फासफोरस 42 मिलीग्राम
- कैल्शियम 33 मिलीग्राम
- सोडियम 1.51 मिलीग्राम
- केरोटीन 162 मिलीग्राम
- मैग्नीशियम 14000 मिलीग्राम
- जस्ता 8.5 मिलीग्राम
- तांबा 1.7 मिलीग्राम
विटामिन प्रति सौ ग्राम
- नियासिन 1.9
- राइबोफ्लेविन 3.5
- थाइमिन 1.8
- पेंटोथेनिकअम्ल 18
- विटामिन-ए 2.5
- विटामिन-बी 4.3
- विटामिन बी6- 4.3
- विटामिन बी-12 - 4.0
- विटामिन डी2, डी3 - 03
- विटामिन के 15
- विटामिन एच 6.5
- फॉलिक अम्ल 3.6
औषधीय गुणों से है भरपूर
कंटोला में एंटी एलर्जिक, एंटी ऑक्सीडेंट, एंटी बैक्टीरियल, दर्दनाशक व सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं जो प्रतिरक्षा प्रणाली के सभी कार्यों को मजबूती प्रदान करते हैं। एंटी एलर्जिक और एनाल्जेसिक (दर्द निवारक) गुणों के कारण बदलते मौसम में होने वाली खांसी, सर्दी, बुखार व अन्य एलर्जी को दूर रखने में सहायक है। यह अग्नाशयी कोशिकाओं की रक्षा और उनका पुनर्जनन भी करता है। इसका सेवन गर्भवती महिलाओं के लिए लाभकारी रहता है। यह गुर्दे में स्टोन की समस्या से निजात देता है। बीमार लोगों को विशेषज्ञ की सलाह से इसका सेवन करना चाहिए। - डॉ. मंगल सिंह, सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल।
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