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Karnal News: भाईचारे की चिंता, सियासत में कम नहीं खाप की छाप

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2024 06:59 AM IST
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Concern about brotherhood, Khap's influence in politics is not less
- हरियाणा के सियासी दल चाैधरियों का आशीर्वाद लेने को बेताब, खापें खुलकर रख रहीं
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नेताओं के सामने मुद्दे

- 36 बिरादरियों के इस सूबे में बनी रहे सामाजिक एकता, सियासी दलों को खापें दे रहीं

कड़ा संदेश

- लंबे समय से चले रहे किसानों के मुद्दे और खिलाड़ियों से बदसलूकी पर नाराज हैं खाप प्रतिनिधि



मोहित धुपड़
करनाल। चुनाव के दौरान सूबे का भाईचारा किसी भी तरह खराब न हो और राजनीतिक

पार्टियां वोट बैंक की सियासत के चलते न तो बिरादरियों को बांटें और न ही जात-पात की

राजनीति करें। इस बात को लेकर हरियाणा की राजनीति में बड़ा दखल रखने वाली खापें अबकी
बार कुछ ज्यादा ही सजग और चिंतित दिख रही हैं। इन खापों का मानना है कि पिछले कुछ

समय से सूबे में चल रहे सियासी माहौल के दौरान प्रदेश में भाईचारे को नुकसान पहुंचा है।

खाप प्रधानों व प्रतिनिधियों का कहना है कि हरियाणा में 36 बिरादरियों के भाईचारे

की मिसाल देशभर में दी जाती है। इसलिए खापें सभी सियासी दलों को चुनावी दंगल के दौरान

इस भाईचारे की संस्कृति का कायम रखने का कड़ा संदेश दे रही हैं। बताते चलें कि उतर भारत में

करीब 3500 खाप पंचायतें हैं। जिनमें से लगभग 190 हरियाणा में हैं। हालांकि ये खापें
सामाजिक और अपनी बिरादरियों में एक न्यायिक संस्था के रूप में काम करती हैं मगर राजनीति

में इनका बड़ा दखल रहता है। इतना ही नहीं चुनावों में मतदाताओं पर असर डालने वाली इन

खापों की गहरी छाप भी रहती है।

विधानसभा चुनाव के चलते प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टियां खापों के संपर्क में हैं और उनका

समर्थन पाने की जुगत में जुटी हैं। उधर गांवों में विभिन्न खापों के प्रधानों व प्रतिनि
धियों से आशीर्वाद लेने का दौर भी चल रहा है।

सियासी दल जानते हैं कि खापें प्रदेश में करीबन 40 प्रतिशत सीटों पर अपना खासा प्रभाव

रखती हैं जबकि अन्य सीटों पर भी विभिन्न खापों से जुड़े वोटरों की संख्या ठीकठाक हैं।

इसका फायदा भी प्रत्याशियों को मिल सकता है। इसके अलावा अन्य कई मुद्दे ऐसे हैं जिन पर

खापें प्रत्याशियों और दलों से खुलकर बात कर रही हैं। इन मुद्दों में किसान, जवान,

खिलाड़ी, बेरोजगारी, आरक्षण मुख्य रूप से शामिल हैं।



खिलाड़ियों से बदसलूकी बरदाश्त नहीं
खिलाड़ियों ने प्रदेश का मान बढ़ाया है मगर पिछले कुछ महीनों में देखा गया कि प्रदेश के

खिलाड़ियों को हकों के लिए सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा। नेता भी लगातार खिलाड़ियों को

निशाना बना रहे हैं। यह उचित नहीं है। खिलाड़ियों से इस सूबे का मान है, इसलिए कोई भी

दल चुनाव जीते, खिलाड़ियों की समस्याओं और सुविधाओं का विशेष ध्यान रखे। खिलाड़ियों से

बदसलूकी पर खापें नाराज हैं और इसे बरदाश्त नहीं किया जाएगा।

- चाैधरी रामफूल, कार्यकारी प्रधान, हुड्डा खाप



बात रोजगार की हो जात-बिरादरी की नहीं
पिछले कुछ समय से जो सियासी दौर चल रहा है, उसमें सामाजिक ताना-बाना प्रभावित होता

दिखा है। चुनाव कोई भी हो, बिरादरियों को बांटने की बात नहीं होनी चाहिए। बात

रोजगार बढ़ाने की, एजुकेशन सिस्टम को सुधारने व उसे अपग्रेड करने की व भाईचारे की संस्कृति

को और मजबूत करने की होनी चाहिए। चुनाव के दौरान जातिगत समीकरणों को साधकर वोट

बटोरना, यह एक अजीब प्रचलन बन चुका है, जोकि समाज के लिए अच्छा नहीं है।

- जसपाल, प्रधान, दहिया खाप



सिद्धांतों से लड़े जाएं चुनाव
चुनाव सिद्धांतों के साथ लड़े जाने चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि किसी भी

सूरत में चुनाव के दौरान प्रदेश का भाईचारा खराब न हो। इस बात को लेकर खापों में बड़ी
चिंता है। चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने का होना चाहिए।

सरकारें सभी को रोजगार नहीं दे पातीं तो स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाए। युवाओं को खुद

ही उद्यमी बनाने पर जोर दिया जाए। नेता इस बारे में बात तो करते हैं मगर इसके प्रति

उनमें गंभीरता भी दिखनी चाहिए।

- देवव्रत ढांडा, अध्यक्ष, ढांडा खाप



किसानों की अनदेखी से खापें खफा
किसानों का मुद्दा भी सबसे प्रमुख मुद्दा है। अभी तक अपनी मांगें व समस्याएं लेकर किसान

सड़कों पर बैठे हैं। किसान मुख्य रूप से क्या मांग रहे हैं... केवल अपनी फसल की एमएसपी पर

खरीद की गांरटी, इसमें गलत क्या है, क्यों सरकार उनकी इस जायज मांग को स्वीकार नहीं

करती। पहलवानों के साथ भी दुर्व्यवहार से खापें बहुत खफा हैं। खिलाड़ियों की मांगों के

प्रति भी सरकारों को गंभीर रहना चाहिए। यह भी इस बार बड़ा चुनावी मुद्दा है।

- ओम प्रकाश, प्रधान, कंडेला खाप



महिला सुरक्षा के प्रति गंभीरता बढ़े
हरियाणा में भाईचारा पहले, बाकी सब बातें बाद में होती है। यह सूबा 36 बिरादरियों का

है, इसलिए चुनाव में सभी सियासी दलों के नेता इस बात का ध्यान रखें कि उनकी सियासत का

असर इस भाईचारे पर न पड़े। यही बात हमारे प्रतिनिधि सभी को समझा रहे हैं। इसके

साथ-साथ प्रदेश में महिला सुरक्षा भी एक बड़ा मुद्दा है। महिलाओं से जुड़े अपराधों को लेकर

चिंता बढ़ रही है, इसलिए प्रदेश में सरकार जिस भी दल की आए, महिला सुरक्षा के प्रति

गंभीरता बढ़नी चाहिए।

- ईश्वर सिंह, प्रतिनिधि, नैन खाप



राजनीति में खत्म हो परिवारवाद
राजनीति में परिवारवाद खत्म होना चाहिए। इसके लिए मतदाताओं को ही सजग होना

पड़ेगा। आजकल तो देखा जा रहा है कि राजनीति के चक्कर में आपसी भाईचारा ही भुला दिया

जाता है। यह उचित नहीं। रोजगार और विकास की बात पर ही चुनाव लड़ा जाना चाहिए।

रोजगार कम हैं, तो कौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए। जात और बिरादरी इन मुद्दों को

चुनाव से दूर ही रखना चाहिए।

- इंद्र सिंह मोर, प्रधान, सतरोल खाप



किसानों का दर्द तो समझना पड़ेगा
सबसे बड़ा मुद्दा है बेरोजगारी और उसके बाद किसानों के मसले। फसलों को एमएसपी पर

खरीदने की गारंटी सरकार क्यों नहीं दे पा रही है। किसानों का दर्द तो समझना ही पड़ेगा,

क्योंकि किसान ही हरियाणा में सबसे बड़े मतदाता हैं। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं और शिक्षा
का स्तर सुधारना पड़ेगा। सरकारों को ये सुनिश्चित करना होगा कि शहरों के साथ-साथ

ग्रामीण स्तर तक स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाएं भी पुख्ता हों। चुनाव में भाईचारे को खराब

करने की बात तो बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

- दादा बलजीत, प्रधान, मलिक खाप



पेपर लीक, अग्निवीर की हो रही बात
राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़े, इसके लिए सियासी दल गंभीर नहीं हैं। टिकट

वितरण में 50 प्रतिशत तो दूर 33 फीसदी का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। सूबे में सरकार

ने केवल पंचायती राज चुनाव में पहली बार 50 फीसदी टिकटें महिलाओं को दी थी और उनमें से

67 प्रतिशत महिलाएं जीतकर आईं थी। यानी महिलाओं में नेतृत्व क्षमता की कमी नहीं है, कमी

है तो सिर्फ उन्हें मौका देने में। इसके अलावा महिला सुरक्षा, पेपर लीक के मामले व अ
ग्निवीर की भर्तियां भी अबकी बार चुनावी मुद्दा बन रहे हैं।

- डॉ. संतोष दहिया, राष्ट्रीय अध्यक्ष, सर्वजातीय सर्व खाप



बेरोजगारी पर खापें चिंतित
महंगाई, बिगड़ी कानून व्यवस्था और बेरोजगारी को लेकर सभी खापें चिंतित हैं। इसके अतिरिक्त

किसानों का हाल किसी से छिपा नहीं है। आखिर किसानों के प्रति सरकार का एजेंडा क्या

है, इसे खुलकर स्पष्ट किया जाए। सरकार बताए, क्या फसलों की एमएसपी पर खरीद की

गारंटी दी जाएगी या नहीं? बढ़ता अपराध व्यापारियों समेत आमजन के लिए चिंता का विषय

बना हुआ है। ऐसे मुद्दे भी चुनाव में गाैण नहीं होने चाहिए।

- रणबीर भूरा, अध्यक्ष, भूरा खाप



ब्राह्मण खाप मांग रहे आरक्षण
पहले सामान्य श्रेणी में ईबीपीसी यानी इक्नाॅमिकली बैकवर्ड पर्सन कैटेगरी हुआ करती थी।

इसमें ब्राह्मण, बनिया, पंजाबी, सिख व राजपूत बिरादरी को 10 प्रतिशत आरक्षण मिलता

था। बाद में इस कैटेगरी को खत्म कर ईडब्ल्यूएस यानी इक्नाॅमिकली वीकर सेक्शन बना दिया

गया। जिनमें कई और बिरादरियों को भी शामिल कर लिया गया। ब्राह्मण खाप चाहती है कि

ईडब्यूएस कैटेगरी में भी बीसी-ए और बीसी-बी की तर्ज पर दो श्रेणियां ए और बी बनाईं

जाएं और ब्राह्मणों को ए श्रेणी में रखा जाए। इसके लिए उनकी खाप ने सभी प्रमुख दलों को

अपना-अपना मांगपत्र साैंप दिया है।

- अशोक शर्मा, अध्यक्ष, ब्राह्मण खाप हरियाणा।
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