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Karnal News: बच्चे विदेश में बसे… पीछे बदहाली में जी रहे बुजुर्ग, मौत के बाद भी नहीं लगती भनक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:45 AM IST
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Children settled abroad Elders living in misery behind, no one seems to notice even after death
गगन तलवार
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करनाल। जिन्होंने संघर्ष करके बच्चों को बड़ा बनाया, अच्छी नौकरी व विदेश की धरती तक पहुंचाया, आज उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। विदेश में बसे कुछ लोगों के बुजुर्ग पीछे बदहाली की जिंदगी जी रहे हैं। न कोई पानी देने वाला और न किसी का सहारा, बीमार होकर पड़ गए तो अपने ही मल-मूत्र का खाट पर बिछौना हो गया। दानवीर राजा कर्ण की नगरी में वर्ल्ड क्लास ख्याति प्राप्त होम्योपैथिक डॉक्टर हरकृष्ण सिंह समेत ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।

गंदगी के कारण जिनके शरीर पर भी कीड़े पड़ जाते हैं। वहीं कुछ लोगों की ऐसी बदहाली में दर्दनाक मौत भी हो गई, बंद कमरों में इनके शव को चूहें और अन्य कीटों ने अपना निवाला बना लिया और किसी को भनक तक नहीं लगती। शव और बदहाली से उठने वाली बदबू जब दीवारें और दरवाजे चीरते हुए बाहर आई तो हालात उजागर हुए।
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हैरान करने वाली बात यह है कि इसके हालात के बाद भी जिला प्रशासन के पास ऐसे बुजुर्ग लोगों का रिकार्ड नहीं है, जो अकेले रहते हों। अमर उजाला ने पड़ताल की शहर में सुभद्रा वृद्धाश्रम और निर्मल धाम में अपनों के ठुकराए हुए 76 बुजुर्ग व अपना आशियाना आश्रम में 275 लोगों के रहने की पुष्टि हुई। इसके अलावा क्रीड के रिकार्ड के अनुसार, 558 लोग ऐसे भी हैं, जो अपने परिवार पहचानपत्र में अकेले ही घर के सदस्य हैं। इसके अलावा ऐसे लोगों की तो कोई संख्या ही नहीं है, जिनका पूरा परिवार विदेश में है और बुजुर्ग यहां गांवों में बनी कोठियों में अकेले जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ब्यूरो
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व्यवस्था : हरियाणा से ठीक यूपी, जहां रिकॉर्ड भी और हाल पूछने वाले भी...

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हरियाणा में अभी एकल बुजुर्गों का रिकॉर्ड नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में जिला प्रशासन द्वारा समाज कल्याण व जिला कल्याण विभाग के माध्यम से सर्वे कराकर ऐसे लोगों की पहचान की जाती है। विभागीय टीम और संबंधित थाना पुलिस उन लोगों पर निगाह रखती है। जरूरत पर सरकारी अनुदान से खाना व जीवन यापन के लिए मदद भी पहुंचाई जाती है। यानी रिकार्ड रखने के साथ-साथ बैगाने लोग ही अपना बनकर हाल पूछते हैं।



वर्जन

जिले में एकल रहने वाले लोगों का कोई रिकार्ड हमारे किसी विभाग के पास नहीं है। वृद्धाश्रम में रहने वालों की संख्या व जानकारी प्रशासन के पास है। एकल रहने वाले बुजुर्गों का रिकार्ड या निगरानी की व्यवस्था यदि अन्य राज्यों में है तो यहां भी व्यवस्था बनवाने का प्रयास करेंगे। बच्चों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। - प्रदीप कुमार, एसडीएम करनाल



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हालात : गुफा की तरह बन गया था डॉ. का मकान... छह लोगों ने बाहर निकाला

अपना अशियाना आश्रम की टीम ने मीरा घाटी क्षेत्र में रह रहे होम्योपैथिक डॉ. हरकृष्ण सिंह को उनके मकान से रेस्क्यू किया। सेवादार राजकुमार और अनु मदान ने बताया कि डॉ. हरकृष्ण सिंह दयनीय हालत में थे। लोगों के रोग हरने वाले मीरा घाटी क्षेत्र के रहने वाले डॉक्टर वर्षों से खाट पर थे, मल-मूत्र से लिपटे उनके बदन पर अब कीड़े भी चल रहे थे। जैसे ही उनके पुराने जर्जर मकान का दरवाजा खुला तो गली में भी बदबू होने लगी। इनका उपचार कराकर स्वस्थ करने का प्रयास किया जा रहा है। उनके घर पर किताबों और सामान के ढेर लगे हुए थे, जिससे कमरा भी गुफा की तरह बन गया था। छह लोगों की मदद से इन्हें बाहर निकाला गया। अब चार दिन से वे आश्रम में आने के बाद ठीक महसूस कर रहे हैं।



हॉकी चैंपियन के बेटे का हाल : पेशाब करने के दौरान गिरा था, फिर उठ नहीं पाया..

अमर उजाला से बातचीत में 75 वर्षीय डॉ. हरकृष्ण ने बताया कि वे करीब डेढ़ माह पहले पेशाब करने के लिए उठे थे, चक्कर आने के बाद वे मुंह के बल गिर गए। इससे उन्हें चोटें लग गई और वे दोबारा अपनी हिम्मत से उठ नहीं पाए। जैसे तैसे खाट पर गए और फिर उनसे उठा नहीं गया। इसी कारण उनका मल-मूत्र भी बिस्तर पर ही हुआ। उन्होंने बताया कि 50 साल तक उन्होंने मंदिर और गुरुद्वारों सहित अन्य डिस्पैंसरियों में निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं देकर लोगों की गंभीर बीमारियों का इलाज किया। उनके पिता राम मोहन सिंह हरियाणा में हॉकी चैंपियन भी रहे हैं। वे खुद एसडी हाई स्कूल मुलतान और करनाल के दयाल सिंह कॉलेज में पढ़ चुके हैं। स्वभाव न मिलने के कारण कई वर्ष पहले उनकी पत्नी और दो बेटियां उन्हें छोड़कर ऑस्ट्रेलिया चली गई। उन्होंने बताया कि कई वर्षों तक सेवा करते हुए वे गुरुद्वारा, निर्मल कुटिया और निर्मल धाम में ही खाना खाते रहे हैं।



करनाल में अकेले रहने वालों की मौत के यह मामले आ चुके

- चूहों ने कुतरा हुआ था बुजुर्ग का शव : 11 नवंबर 2025 को निर्मल कुटिया चौक के पास फुटपाथ पर बने बंद कमरे के अंदर 65

साल के बुजुर्ग का गला सड़ा शव मिला था। बुजुर्ग के शव को चूहों ने कुतरा हुआ था। बुजुर्ग की मौत का उस समय पता लगा जब आसपास से गुजर रहे लोगों को बदबू आई। अपना आशियाना की टीम ने दरवाजा तोड़ा कर शव को बाहर निकाला।

- कमरे में जानवर नौंच गए थे पूर्व प्रिंसिपल का शव : 13 फरवरी को सेक्टर-14 के हाउस नंबर-69 में झज्जर के स्कूल से सेवानिवृत्त प्रिंसिपल चंचल शर्मा का शव मिला। जिसे जानवरों ने नोचा हुआ था। जब बदबू पड़ोसियों तक पहुंची तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी थी। काफी साल पहले ही किसी कारणवश चंचल शर्मा और गोपाल शर्मा के बीच तलाक हो गया था। गोपाल शर्मा अंबाला में रहते थे और चंचल शर्मा अकेली करनाल में रहती थी।

- 10 साल तक अकेले मकान में रहे मनोहर लाल : रामनगर में 2023 में एक बुजुर्ग मनोहर लाल के शव को चूहों ने कुतर दिया। जब बुजुर्ग घर से बाहर नहीं निकला तो आसपास के लोगों को कुछ संदेह हुआ। उन्होंने मकान के अंदर जाकर देखा तो बुजुर्ग के शव के ऊपर से चूहे घूम रहे थे। मनोहर लाल 10 साल से अपने मकान में अकेले ही रहते थे।

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शिक्षाविद और समाजसेवी बोले, अपनों के प्रति संवेदनाएं मर रही तो खतरनाक है भविष्य

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जड़ों से अलग होते ही हालात होने लगे खराब : भारद्वाज

राजकीय पीजी कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रवीण भारद्वाज का कहना है कि कभी हम मातृ-पितृ और अतिथि देवो भव.. की राह पर थे। तब जड़ों से जुड़े थे। अब विदेश पहुंचकर अपनी जड़ें और संस्कृति भूल गए तो हालात भी खराब हुए हैं। केवल धन ही सब कुछ नहीं है। माता-पिता के कारण ही हम धरती पर हैं, उन्हें नहीं भूलना चाहिए। घर की रसोई तीर्थ और माता-पिता भगवान हैं, इनके बिना सब कर्म और पूजा भी व्यर्थ है।





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बुजुर्गों से दूर कर मोबाइल दे घोट रहे संस्कारों का गला : पन्नू

निफा के संस्थापक अध्यक्ष प्रीतपाल सिंह पन्नू का कहना है कि अब रिश्तों में संवेदनाओं की कमी है, यदि ऐसा न हो तो दूर रहते हुए दिन में कम से कम एक बार बुजुर्ग सदस्यों से बात कर सकते हैं। नहीं तो कुछ व्यवस्था कर सकते है कि मां-बाप की जरूरतें पूरी हो सकें। कई बच्चे ऐसा कर भी रहे हैं। रिश्तों में अपनत्व खत्म हो रहा है। नकली जिंदगी जी रहे हैं। बुजुर्गों से दूर करके मोबाइल हाथ में थमाकर कुछ अभिभावक खुद संस्कारों का गला घोट रहे हैं।



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बुजुर्गों को छोड़कर हम अपना भविष्य वैसा तय कर रहे : जगमेहर
सीएसएसआरआई से सेवानिवृत्त एवं अपना आशियाना के सेवादार जगमेहर पाल का कहना है कि माता-पिता भगवान का रूप होता है, उन्हें छोड़कर कोई सुखी नहीं रह सकता। मां-बाप के कारण ही हमें जीवन मिला है। लोगों का समझना चाहिए कि माता-पिता की सेवा जरूरी है, इसके बाद ही ईश्वर का पूजन है। यदि किसी बुजुर्ग को छोड़ते हैं तो हम अपना भविष्य ऐसा तय कर रहे हैं।




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संयुक्त परिवार आज की निहायत जरूरत, तभी बच पाएंगे : राजपाल

पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी राजपाल चौधरी का कहना है कि आज के ऐसे हालात का सबसे बड़ा कारण है कि संयुक्त परिवार खत्म हो गए। संयुक्त परिवार आज की निहायत जरूरत है, यह बात नई पीढ़ी को समझनी पड़ेगी। जब घर पर बच्चे से बुजुर्ग तक सभी होते हैं तो हमारे संस्कार और नैतिक मूल्य भी आगे बढ़ते हैं। पढ़े और तरक्की करें बाहर भी जाएं पर रिश्ते बरकरार रखें। यदि रिश्तों को बचा पाएं तो इस प्रकार की परेशानी नहीं होगी।
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