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Karnal News: विज्ञापन में नहीं कर सकते बच्चों का उपयोग
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। श्रम उन्मूलन डिवीजन की प्रमुख पायल शर्मा ने कहा है कि बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के अनुसार 14 से 18 साल के बच्चों से जोखिम भरा कार्य नहीं कराया जा सकता। अगर कोई अभिभावक पैसों के लिए इस उम्र के बच्चों से कार्य कराता है तो उस पर भी एक्ट के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। स्कूल की ओर से विज्ञापन में बच्चों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। स्कूल के प्रधानाचार्य भी इसकी अनुमति नहीं दे सकते हैं।
पायल शर्मा मंगलवार को कर्ण झील के बहुउद्देशीय हाल में बाल अधिकारियों पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीपीसीआर) और जिला प्रशासन ने मिलकर इस सम्मेलन का आयोजन किया था। इसमें पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को सशक्त करते हुए सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना जैसे विषयों पर विचार रखे गए। खुले सत्र में सवालों के जवाब दिए गए।
पायल शर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि बच्चों का उपयोग किसी भी कंपनी के विज्ञापन में न किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रिंसिपल को अनुमति देने का ही अधिकार नहीं है। उपायुक्त को ही इस बारे में निश्चित सीमा के लिए अनुमति देने का अधिकार है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से बाल श्रम मामले में केंद्रीय मंत्रालय की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की पालना सुनिश्चित करने के लिए कहा।
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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल लाठर ने कहा कि बच्चे पौधे की तरह होते हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि वे बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करें। उन्हें खेल-खेल में सिखाएं। माता-पिता बच्चों में अच्छे संस्कार डालें। घर का माहौल सकारात्मक हो। बच्चे के प्रति शिक्षक के आंकलन की अनदेखी न करें। बच्चों पर निगरानी रखें। बच्चों को केवल शिक्षा देना ही नहीं, उन्हें संस्कारवान बनाना भी शिक्षकों और अभिभावकों का नैतिक फर्ज है। बच्चों को आत्मविश्वास से परिपूर्ण माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है। बच्चों के अंदर से भय नाम की चीज को खत्म करना होगा। उन्हें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी देनी होगी। सेवानिवृत उप जिला न्यायवादी प्रदीप कुमार चीमा ने पॉक्सो और जेजे एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर एचएससीपीआरसी के सदस्य मांगे राम, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश, सदस्य रेखा, मीनाक्षी तंवर, सुमन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य उमेश चानना, बाल संरक्षण अधिकारी सुमन नैन, गुरमीत, पूनम श्योराण, निधि सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा, पंचायती राज विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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करनाल। श्रम उन्मूलन डिवीजन की प्रमुख पायल शर्मा ने कहा है कि बाल श्रम संशोधन अधिनियम 2016 के अनुसार 14 से 18 साल के बच्चों से जोखिम भरा कार्य नहीं कराया जा सकता। अगर कोई अभिभावक पैसों के लिए इस उम्र के बच्चों से कार्य कराता है तो उस पर भी एक्ट के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। स्कूल की ओर से विज्ञापन में बच्चों का उपयोग नहीं किया जा सकता है। स्कूल के प्रधानाचार्य भी इसकी अनुमति नहीं दे सकते हैं।
पायल शर्मा मंगलवार को कर्ण झील के बहुउद्देशीय हाल में बाल अधिकारियों पर आयोजित सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए राष्ट्रीय आयोग (एनसीपीसीआर) और जिला प्रशासन ने मिलकर इस सम्मेलन का आयोजन किया था। इसमें पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट, शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को सशक्त करते हुए सुरक्षित वातावरण का निर्माण करना जैसे विषयों पर विचार रखे गए। खुले सत्र में सवालों के जवाब दिए गए।
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पायल शर्मा ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि बच्चों का उपयोग किसी भी कंपनी के विज्ञापन में न किया जाए। उन्होंने कहा कि इसके लिए प्रिंसिपल को अनुमति देने का ही अधिकार नहीं है। उपायुक्त को ही इस बारे में निश्चित सीमा के लिए अनुमति देने का अधिकार है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से बाल श्रम मामले में केंद्रीय मंत्रालय की ओर से जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) की पालना सुनिश्चित करने के लिए कहा।
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हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य अनिल लाठर ने कहा कि बच्चे पौधे की तरह होते हैं। शिक्षकों का दायित्व है कि वे बच्चों में आत्मविश्वास पैदा करें। उन्हें खेल-खेल में सिखाएं। माता-पिता बच्चों में अच्छे संस्कार डालें। घर का माहौल सकारात्मक हो। बच्चे के प्रति शिक्षक के आंकलन की अनदेखी न करें। बच्चों पर निगरानी रखें। बच्चों को केवल शिक्षा देना ही नहीं, उन्हें संस्कारवान बनाना भी शिक्षकों और अभिभावकों का नैतिक फर्ज है। बच्चों को आत्मविश्वास से परिपूर्ण माहौल उपलब्ध कराना जरूरी है। बच्चों के अंदर से भय नाम की चीज को खत्म करना होगा। उन्हें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी देनी होगी। सेवानिवृत उप जिला न्यायवादी प्रदीप कुमार चीमा ने पॉक्सो और जेजे एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों के बारे में जानकारी दी।
इस मौके पर एचएससीपीआरसी के सदस्य मांगे राम, सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश, सदस्य रेखा, मीनाक्षी तंवर, सुमन, किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य उमेश चानना, बाल संरक्षण अधिकारी सुमन नैन, गुरमीत, पूनम श्योराण, निधि सहित महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा, पंचायती राज विभाग, श्रम विभाग, बाल संरक्षण संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।