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उपचाराधीन बच्चे की मौत पर परिजनों ने किया हंगामा
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child death in karnal hospital
एक निजी अस्पताल में उपचाराधीन बच्चे की मौत पर रविवार को हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों ने डाक्टर पर इलाज में लापरवाही की आरोप लगाया और खरी खोटी सुनाई। मामला बढ़ता देख डॉक्टर व स्टाफ मौके से खिसक गया। कुछ देर बाद फिर वह अस्पताल वापस आया और माफी मांगी। हालांकि, इस दौरान परिजनों ने काफी देर तक हंगामा काटा। बाद में पुलिस पहुंची और मामले को शांत किया। फिलहाल पुलिस का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई लिखित में शिकायत नहीं आई है। अगर शिकायत आएगी तो आगामी कार्रवाई की जाएगी।
रविवार को प्रीतम पुरा कॉलोनी मुकेश ने बताया कि वह अपने पांच महीने के बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा। बच्चे को निमोनिया था, तो अस्पताल स्टाफ ने उसे दाखिल कर लिया। मुकेश और गोवर्धन ने आरोप लगाया कि दाखिल करने के बाद बच्चे को भांप देने के बजाये ग्लूकोज लगा दी। करीब 15 मिनट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। जब डॉक्टर ने देखा तो उसने तुरंत ग्लूकोज हटा दी, लेकिन तब तक बच्चे ने सांस लेना बंद कर दिया था। उसके बाद डॉक्टर ने बच्चे को सरकारी अस्पताल में रेफर करने के लिए बोल दिया। परिजनों ने विरोध किया कि बच्चे के तो सांस ही नहीं चल रहे तो रेफर कैसे कर रहे हो।
परिजनों ने जब डॉक्टर से पूछा कि निमोनिया में बच्चे को ग्लूकोज क्यों लगाई गई तो डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने ग्लूकोज नहीं लगाई। बच्चे की मौत इत्तेफाक से हुई है। परिजनों ने विरोध किया तो डॉक्टर और स्टाफ ने उनके बाद बदसलूकी की। इसके बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू किया तो डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल से खिसक गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तब डॉक्टर अस्पताल में वापस आए। गोवर्धन ने बताया कि बाद में डॉक्टर नेे उनसे माफी मांगी और वह अपने बच्चे के शव को लेकर चले गए। थाना सिविल एसएचओ विजय ने बताया कि परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है।
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रविवार को प्रीतम पुरा कॉलोनी मुकेश ने बताया कि वह अपने पांच महीने के बच्चे को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंचा। बच्चे को निमोनिया था, तो अस्पताल स्टाफ ने उसे दाखिल कर लिया। मुकेश और गोवर्धन ने आरोप लगाया कि दाखिल करने के बाद बच्चे को भांप देने के बजाये ग्लूकोज लगा दी। करीब 15 मिनट बाद बच्चे ने दम तोड़ दिया। जब डॉक्टर ने देखा तो उसने तुरंत ग्लूकोज हटा दी, लेकिन तब तक बच्चे ने सांस लेना बंद कर दिया था। उसके बाद डॉक्टर ने बच्चे को सरकारी अस्पताल में रेफर करने के लिए बोल दिया। परिजनों ने विरोध किया कि बच्चे के तो सांस ही नहीं चल रहे तो रेफर कैसे कर रहे हो।
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परिजनों ने जब डॉक्टर से पूछा कि निमोनिया में बच्चे को ग्लूकोज क्यों लगाई गई तो डॉक्टर ने कहा कि उन्होंने ग्लूकोज नहीं लगाई। बच्चे की मौत इत्तेफाक से हुई है। परिजनों ने विरोध किया तो डॉक्टर और स्टाफ ने उनके बाद बदसलूकी की। इसके बाद परिजनों ने हंगामा करना शुरू किया तो डॉक्टर और स्टाफ अस्पताल से खिसक गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। तब डॉक्टर अस्पताल में वापस आए। गोवर्धन ने बताया कि बाद में डॉक्टर नेे उनसे माफी मांगी और वह अपने बच्चे के शव को लेकर चले गए। थाना सिविल एसएचओ विजय ने बताया कि परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है।
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