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भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है भागवत कथा : आचार्य मिथलेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 18 Nov 2024 03:34 AM IST
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Bhagwat Katha paves the way for devotion: Acharya Mithlesh
सेक्टर आठ की चांद एन्कलेव सोसाइटी की ओर से आयोजित हुए श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। सेक्टर आठ की चांद एन्कलेव सोसाइटी की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रवचन करते हुए आचार्य मिथलेश नंदन सहारनपुर वाले ने सुखदेव और परीक्षित के जन्म की कहानी सुनाते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत के ये दोनों मुख्य पात्र रहे हैं। अमरनाथ में वटवृक्ष के नीचे बैठकर भगवान शंकर ने माता पार्वती को भागवत कथा सुनाते हुए आखें बंद कर ली थी।
भोले शंकर ने पार्वती जी से यह कहा वह हां में उत्तर देती रहें, ताकि यह पता चलता रहे कि वह कथा सुन रही हैं, लेकिन तीसरे दिन ही पार्वती माता वहां से तपस्या में लीन हो गईं और यह कथा सुनकर तोते के अंडे से एक बच्चा निकला और उस बच्चे ने जब देखा कि भोलेनाथ कथा सुना रहे हैं और उनको उत्तर देने वाला कोई नहीं है तो वह हां-हां कहने लगा और सात दिन बाद भोलेनाथ ने अपनी आंख खोली तो पार्वती जी ने आकर कहा कि उन्होंने तो केवल तीन दिन की कथा सुनी थी। बाकी कथा तो तोते के बच्चे ने सुनी है।
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छुपकर कथा सुनने पर भोलेनाथ को क्रोध आ गया और उन्होंने तोते को त्रिशूल मारा। तोता बचने के लिए महर्षि व्यास के आश्रम में पहुंचा, जहां मां पिंगला के मुंह से पेट में चला गया और 12 वर्षों तक उनके पेट में छिपा रहा। बाद में भगवान विष्णु के कहने से बाहर आकर निर्गुण समाधि में चला गया। यही तोता सुखदेव जी हैं। बह्मचारी के रूप में केवल दो लोग ही हुए हैं जिनमें सुखदेव महाराज और हनुमान जी महाराज हैं।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा सुनने से अनेकानेक पापों का संहार होता है। भागवत कथा भक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। भक्ति को पाने का यदि इस धरा धाम पर कोई साधन है तो केवल भगवान की लीलाएं हैं। भगवान के कार्य करने पर मनुष्य जीवन में धीरे-धीरे स्वात्विकपन आता है और मनुष्य उस पथ का पथिक बन जाता है। वह समाज में एक आदर्श पुरुष के रूप में जीवन को व्यतीत करता है और उसके इस गुण की वजह से वह दूसरों को भी इस मार्ग पर ले आता है।

यही भागवत जीवन को सही तरीके से जीने का सरलतम उपाय है। इस मौके पर प्रधान रमेश जिंदल ने कहा कि कथा सेक्टर आठ पार्ट एक में नंबर चार पार्क में आयोजित की जा रही है। कथा का समय दोपहर तीन बजे से शाम 6.15 बजे तक रखा गया है। इस अवसर पर सचिव सत्यदेव शर्मा, सुरेंद्र पाल शर्मा व राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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