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Karnal News: बैंक, तहसीलदार और कंपनियां 31 तक जमा कराएं एसएफटी
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- एसएफटी की निगरानी कर रही इनकम टैक्स एंड क्रिमिनल इनवेस्टिगेशन विंग
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। आयकर अधिनियम की धारा 285 के तहत प्रत्येक तहसीलदार, बैंक व प्राइवेट कंपनियों को 31 मई तक आयकर विभाग में ऑनलाइन एसएफटी यानी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन फाइल करनी होगी। एसएफटी फाइल न करने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना के हिसाब से एसएफटी जमा होगी।
इनकम टैक्स एंड क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन विभाग के अधिकारी आरपी तंवर ने बताया कि स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) को वित्त वर्ष 2020-21 में लागू किया गया है। इसके तहत हर किसी के लिए एक लिमिट तय की गई है। लिमिट पार होने पर आयकर विभाग को बताना जरूरी है। अगर एक बैंक के बचत खाते में 10 लाख से ज्यादा जमा होता है या फिर किसी उपभोक्ता को पांच हजार रुपये ब्याज प्राप्त हुआ हो तो बैंक को एसएफटी फाइल करना होता है। ऐसे ही तहसीलदार को अपनी एरिया से 30 लाख रुपये या इससे ऊपर की चल व अचल संपत्ति की सेल व परचेज करने वाले व्यक्तियों की जानकारी के लिए एसएफटी फाइल करनी होती है।
वहीं, कोई भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जो अपने किसी वर्कर को 10 लाख रुपये सालाना रुपये देती है उसे भी एसएफटी फाइल करनी होती है। साथ ही कोई फॉरेन एक्सचेंज फर्म किसी व्यक्ति को 10 लाख रुपये तक की फॉरेन करेंसी एक्सचेंज करवाता है तो उसकी भी एसएफटी फाइल करनी होती है। उन्होंने बताया कि एसएफटी फाइल न करने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगेगा। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग की ओर से जल्द सीए, बैंक, तहसीलदार व प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। जिससे ज्यादा से ज्यादा एसएफटी फाइल हो सकें।
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करनाल। आयकर अधिनियम की धारा 285 के तहत प्रत्येक तहसीलदार, बैंक व प्राइवेट कंपनियों को 31 मई तक आयकर विभाग में ऑनलाइन एसएफटी यानी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन फाइल करनी होगी। एसएफटी फाइल न करने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना के हिसाब से एसएफटी जमा होगी।
इनकम टैक्स एंड क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन विभाग के अधिकारी आरपी तंवर ने बताया कि स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) को वित्त वर्ष 2020-21 में लागू किया गया है। इसके तहत हर किसी के लिए एक लिमिट तय की गई है। लिमिट पार होने पर आयकर विभाग को बताना जरूरी है। अगर एक बैंक के बचत खाते में 10 लाख से ज्यादा जमा होता है या फिर किसी उपभोक्ता को पांच हजार रुपये ब्याज प्राप्त हुआ हो तो बैंक को एसएफटी फाइल करना होता है। ऐसे ही तहसीलदार को अपनी एरिया से 30 लाख रुपये या इससे ऊपर की चल व अचल संपत्ति की सेल व परचेज करने वाले व्यक्तियों की जानकारी के लिए एसएफटी फाइल करनी होती है।
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वहीं, कोई भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी जो अपने किसी वर्कर को 10 लाख रुपये सालाना रुपये देती है उसे भी एसएफटी फाइल करनी होती है। साथ ही कोई फॉरेन एक्सचेंज फर्म किसी व्यक्ति को 10 लाख रुपये तक की फॉरेन करेंसी एक्सचेंज करवाता है तो उसकी भी एसएफटी फाइल करनी होती है। उन्होंने बताया कि एसएफटी फाइल न करने पर 500 रुपये प्रतिदिन जुर्माना लगेगा। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग की ओर से जल्द सीए, बैंक, तहसीलदार व प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारियों के साथ बैठक की जाएगी। जिससे ज्यादा से ज्यादा एसएफटी फाइल हो सकें।
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