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Karnal News: एआरटी सेंटर बंद, बिना दवा लौट रहे एचआईवी मरीज
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- हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल से बढ़ी परेशानी
- जिले के एआरटी सेंटर पर 2087 एचआईवी पीड़ितों का हुआ है पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारी लंबित मांगों के समर्थन में एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिसका सीधा असर जिलेभर के इंटिग्रेटिड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटरों (आईसीटीसी) और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटरों पर पड़ रहा है, जो कि चार दिन से बंद हैं। इस कारण एचआईवी पीड़ितों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। जिले के एआरटी सेंटर पर फिलहाल 2087 मरीज पंजीकृत हैं। जो प्रतिमाह दवाई ले रहे हैं।
पहचान उजागर होने के डर से एचआईवी पीड़ित मरीज सामान्य मरीजों की तरह अपना दर्द किसी को नहीं बता सकते। उसके बावजूद शुक्रवार को दो एचआईवी पीड़ित सिविल सर्जन कार्यालय के परिसर में हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल के बीच पहुंचे और धरनास्थल के सामने काउंसलर को इशारा कर अपने पास बुलाया। इसके बाद काउंसलर ने उन मरीजों से बात की। इस दौरान दोनों मरीजों ने काउंसलर से दवा देने की गुहार लगाई लेकिन उसने धरने पर बैठे होने का हवाला देकर वापस भेज दिया। इसके बाद वे बेबस घर लौट गए।
रोजाना 50 मरीज लेने आते हैं दवाएं
जानकारी के अनुसार, हड़ताल से पूर्व सामान्य दिनों में जिले के एआरटी सेंटर पर रोजाना 40 से 50 के बीच में मरीज दवाएं लेने आते हैं। ऐसे में हड़ताल शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं और एआरटी सेंटर बंद पड़ा है। मरीज दवाइयों के लिए भटक रहे हैं। दवा न लेने पर एचआईवी का वायरस धीरे-धीरे मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट कर देता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचने से एचआईवी संक्रमित मरीज को संक्रमण यानी वायरल लोड का खतरा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। ऐसे में ज्यादा संक्रमण होने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
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एआरटी सेंटर में दवा लेने वाले मरीज
आयु वर्ग मरीज
2 से 14 49
15 से 30 686
31 से 45 868
45 से 80 484
(यह डाटा एआरटी सेंटर से लिया गया है)
हड़ताल का एआरटी पर कोई असर नहीं है। जिला नागरिक अस्पताल के एआरटी सेंटर में आने वाले प्रत्येक मरीज को दवाइयां मुहैया कराई जा रही है। कोई भी मरीज खाली हाथ नहीं जा रहा।
- डॉ. चाहत, एमओ, एआरटी, जिला नागरिक अस्पताल
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- जिले के एआरटी सेंटर पर 2087 एचआईवी पीड़ितों का हुआ है पंजीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारी लंबित मांगों के समर्थन में एक अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिसका सीधा असर जिलेभर के इंटिग्रेटिड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटरों (आईसीटीसी) और एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) सेंटरों पर पड़ रहा है, जो कि चार दिन से बंद हैं। इस कारण एचआईवी पीड़ितों को दवाएं नहीं मिल रही हैं। जिले के एआरटी सेंटर पर फिलहाल 2087 मरीज पंजीकृत हैं। जो प्रतिमाह दवाई ले रहे हैं।
पहचान उजागर होने के डर से एचआईवी पीड़ित मरीज सामान्य मरीजों की तरह अपना दर्द किसी को नहीं बता सकते। उसके बावजूद शुक्रवार को दो एचआईवी पीड़ित सिविल सर्जन कार्यालय के परिसर में हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारियों की हड़ताल के बीच पहुंचे और धरनास्थल के सामने काउंसलर को इशारा कर अपने पास बुलाया। इसके बाद काउंसलर ने उन मरीजों से बात की। इस दौरान दोनों मरीजों ने काउंसलर से दवा देने की गुहार लगाई लेकिन उसने धरने पर बैठे होने का हवाला देकर वापस भेज दिया। इसके बाद वे बेबस घर लौट गए।
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रोजाना 50 मरीज लेने आते हैं दवाएं
जानकारी के अनुसार, हड़ताल से पूर्व सामान्य दिनों में जिले के एआरटी सेंटर पर रोजाना 40 से 50 के बीच में मरीज दवाएं लेने आते हैं। ऐसे में हड़ताल शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं और एआरटी सेंटर बंद पड़ा है। मरीज दवाइयों के लिए भटक रहे हैं। दवा न लेने पर एचआईवी का वायरस धीरे-धीरे मरीज की प्रतिरक्षा प्रणाली को नष्ट कर देता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचने से एचआईवी संक्रमित मरीज को संक्रमण यानी वायरल लोड का खतरा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। ऐसे में ज्यादा संक्रमण होने पर मरीज की मौत भी हो सकती है।
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एआरटी सेंटर में दवा लेने वाले मरीज
आयु वर्ग मरीज
2 से 14 49
15 से 30 686
31 से 45 868
45 से 80 484
(यह डाटा एआरटी सेंटर से लिया गया है)
हड़ताल का एआरटी पर कोई असर नहीं है। जिला नागरिक अस्पताल के एआरटी सेंटर में आने वाले प्रत्येक मरीज को दवाइयां मुहैया कराई जा रही है। कोई भी मरीज खाली हाथ नहीं जा रहा।
- डॉ. चाहत, एमओ, एआरटी, जिला नागरिक अस्पताल