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Karnal News: पंडित नेहरू के बाद अनाथ हो गई लाडली बेटी नीलोखेड़ी
Fri, 14 Nov 2025 12:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 14 Nov 2025 12:16 AM IST
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पंडित नेहरू के बाद अनाथ हो गई लाडली बेटी नीलोखेड़ी
गौतम जोशी
नीलोखेड़ी (करनाल)। जिले के नीलोखेड़ी नगर को आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बसाया था। उन्होंने यहीं आकर नीलोखेड़ी को अपनी बेटी की संज्ञा दी थी। इसकी नगर योजना और भौगोलिक स्थिति से प्रभावित होकर पूरे भारत में नीलोखेड़ी की तर्ज पर 10 हजार कस्बे बसाने का सपना संजोया था। नीलोखेड़ी को देश का पहला खंड विकास कार्यालय (बीडीओ) भी कहा जाता है। पं. नेहरू के निधन के बाद विकास की दृष्टि से नीलोखेड़ी पिछड़ता चला गया। आज यह अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को विवश है। नीलोखेड़ी का नाम भारत के मानचित्र पर केवल कस्बा बनकर ही रह गया।
देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों को स्वदेश में बसाना, पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने बड़ी चुनौती थी। कुरुक्षेत्र, करनाल सहित नीलोखेड़ी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में टेंट लगाए गए थे। तब पंडित नेहरू ने नीलोखेड़ी जैसे शहर को बसाने का सपना संजोया था। नीलोखेड़ी को बसाने के लिए पंडित नेहरू ने यहां की टाउन प्लानिंग व अन्य कार्यों की जिम्मेदारी पुनर्वास विभाग के मंत्री इंजीनियर एसके. डे को सौंपी थी।
नीलोखेड़ी के निर्माण के बाद यहां पाकिस्तान क्षेत्र से आए लोगों को अपनी आजीविका कमाने व परिवार की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए यहां पर कई रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण शिविर लगाकर उन्हें काम का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान कई बार पंडित नेहरू ने नीलोखेड़ी में चल रहे शिविरों का दो-तीन बार दौरा भी किया। पंडित नेहरू सिर्फ बच्चों से ही नहीं बल्कि हरियाणा की नीलोखेड़ी से भी खास स्नेह रखते थे।
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30 एकड़ में बना था मुद्रणालय व पाॅलिटेक्निक कॉलेज
नीलोखेड़ी के 85 वर्षीय भगवानदास मेहता ने बताया कि 1951 में नेहरू ने इस स्थान पर कस्बा स्थापित करने की योजना के तहत विस्थापित लोगों को यहां स्थित घने जंगल को काटकर रहने योग्य बनाने का निर्देश दिया। बाद में यह भूमि आवंटित की गई। यहां जंगल काटते समय कई जानवर और विषैले सांप निकले जिनसे मुक्ति पाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। आजादी से पूर्व रेलवे लाइन की पश्चिम दिशा में बसे नीलोखेड़ी गांव के साथ ही कस्बा बसाकर उसे नीलोखेड़ी टाउनशिप नाम दिया गया था। 30 एकड़ जगह पर मुद्रणालय व पाॅलिटेक्निक कॉलेज भी बना था।
अब निशानियां ही बचीं
वर्ष 1951 में जब पंडित जवाहर लाल नेहरू का अचानक नीलोखेड़ी आने का कार्यक्रम बना तो उनके आगमन से कुछ घंटे पूर्व यहां उनके ठहरने के लिए गोल मार्केट के निकट विश्राम गृह का निर्माण किया गया। वह यहां बेटी इंदिरा गांधी के साथ पहुंचे थे। यह विश्राम गृह अब जर्जर हो चुका है। प्रशिक्षण केंद्र बंद हो चुका है। सारी टाउनशिप भी ठंडे बस्ते में चली गई। मुद्रणालय बंद हो चुका है, अब सिर्फ निशानियां बची हैं।
रुके विकास कार्य करवाएंगे : विधायक
विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने बताया कि नीलोखेड़ी क्षेत्र में विकास की कमीं नहीं रहने दी जाएगी। सभी रुके हुए विकास कार्य जल्द शुरू करवा दिए जाएंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार पूरे प्रदेश को एक परिवार मानते हुए समुचित व एक समान विकास कार्यों में विश्वास रखती है।
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नीलोखेड़ी (करनाल)। जिले के नीलोखेड़ी नगर को आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बसाया था। उन्होंने यहीं आकर नीलोखेड़ी को अपनी बेटी की संज्ञा दी थी। इसकी नगर योजना और भौगोलिक स्थिति से प्रभावित होकर पूरे भारत में नीलोखेड़ी की तर्ज पर 10 हजार कस्बे बसाने का सपना संजोया था। नीलोखेड़ी को देश का पहला खंड विकास कार्यालय (बीडीओ) भी कहा जाता है। पं. नेहरू के निधन के बाद विकास की दृष्टि से नीलोखेड़ी पिछड़ता चला गया। आज यह अपनी दुर्दशा पर आंसू बहाने को विवश है। नीलोखेड़ी का नाम भारत के मानचित्र पर केवल कस्बा बनकर ही रह गया।
देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद पाकिस्तान से विस्थापित परिवारों को स्वदेश में बसाना, पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के सामने बड़ी चुनौती थी। कुरुक्षेत्र, करनाल सहित नीलोखेड़ी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में टेंट लगाए गए थे। तब पंडित नेहरू ने नीलोखेड़ी जैसे शहर को बसाने का सपना संजोया था। नीलोखेड़ी को बसाने के लिए पंडित नेहरू ने यहां की टाउन प्लानिंग व अन्य कार्यों की जिम्मेदारी पुनर्वास विभाग के मंत्री इंजीनियर एसके. डे को सौंपी थी।
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नीलोखेड़ी के निर्माण के बाद यहां पाकिस्तान क्षेत्र से आए लोगों को अपनी आजीविका कमाने व परिवार की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए यहां पर कई रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण शिविर लगाकर उन्हें काम का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान कई बार पंडित नेहरू ने नीलोखेड़ी में चल रहे शिविरों का दो-तीन बार दौरा भी किया। पंडित नेहरू सिर्फ बच्चों से ही नहीं बल्कि हरियाणा की नीलोखेड़ी से भी खास स्नेह रखते थे।
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30 एकड़ में बना था मुद्रणालय व पाॅलिटेक्निक कॉलेज
नीलोखेड़ी के 85 वर्षीय भगवानदास मेहता ने बताया कि 1951 में नेहरू ने इस स्थान पर कस्बा स्थापित करने की योजना के तहत विस्थापित लोगों को यहां स्थित घने जंगल को काटकर रहने योग्य बनाने का निर्देश दिया। बाद में यह भूमि आवंटित की गई। यहां जंगल काटते समय कई जानवर और विषैले सांप निकले जिनसे मुक्ति पाने के लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। आजादी से पूर्व रेलवे लाइन की पश्चिम दिशा में बसे नीलोखेड़ी गांव के साथ ही कस्बा बसाकर उसे नीलोखेड़ी टाउनशिप नाम दिया गया था। 30 एकड़ जगह पर मुद्रणालय व पाॅलिटेक्निक कॉलेज भी बना था।
अब निशानियां ही बचीं
वर्ष 1951 में जब पंडित जवाहर लाल नेहरू का अचानक नीलोखेड़ी आने का कार्यक्रम बना तो उनके आगमन से कुछ घंटे पूर्व यहां उनके ठहरने के लिए गोल मार्केट के निकट विश्राम गृह का निर्माण किया गया। वह यहां बेटी इंदिरा गांधी के साथ पहुंचे थे। यह विश्राम गृह अब जर्जर हो चुका है। प्रशिक्षण केंद्र बंद हो चुका है। सारी टाउनशिप भी ठंडे बस्ते में चली गई। मुद्रणालय बंद हो चुका है, अब सिर्फ निशानियां बची हैं।
रुके विकास कार्य करवाएंगे : विधायक
विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने बताया कि नीलोखेड़ी क्षेत्र में विकास की कमीं नहीं रहने दी जाएगी। सभी रुके हुए विकास कार्य जल्द शुरू करवा दिए जाएंगे। प्रदेश की भाजपा सरकार पूरे प्रदेश को एक परिवार मानते हुए समुचित व एक समान विकास कार्यों में विश्वास रखती है।

पंडित नेहरू के बाद अनाथ हो गई लाडली बेटी नीलोखेड़ी