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Karnal News: बाल विवाह रोकने के लिए अबूझ मुहूर्त बना चुनौती
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अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने कसी कमर, जागरूकता पर दिया जोर
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए विभाग की ओर से सात अप्रैल से अभियान शुरू किया गया है, जो 30 अप्रैल तक यानी अक्षय तृतीया तक चलेगा।
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन विवाह के लिए किसी विशेष ज्योतिषीय गणना या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण कई परिवार इस अवसर पर गुपचुप बाल विवाह कर देते हैं। यही कारण है कि यह दिन प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ खड़े हों और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें। उन्होंने कहा कि बाल विवाह कानून के अंतर्गत यह दंडनीय अपराध है, जिसमें विवाह कराने वाले, माता-पिता और पंडित सभी को सजा हो सकती है।
महिला संरक्षण अधिकारी ने बनाई योजना
महिला संरक्षण अधिकारी के नेतृत्व में इस बार व्यापक योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों, पंचायतों, शहरी कॉलोनियों और विभागीय कार्यालयों, महाविद्यालयों आंगनबाड़ी केंद्रोें, आईटीआई संस्थानों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को बाल विवाह की कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना है।
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दो माह में 1571 जागरूकता कार्यक्रम
दो महीनों में विभाग ने 1571 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें नुक्कड़ नाटक, रैलियां, पंचायत स्तर पर बैठकें, स्कूलों में कार्यशालाएं, और पोस्टर-बैनर आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इन अभियानों में स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और समाजसेवी भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। वहीं, नवंबर से दिसंबर तक, जो 1571 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, अप्रैल महीने में इससे भी अधिक कार्यक्रम चलाने का लक्ष्य है।
अभियान का सबसे महत्वपूर्ण दिन 30 अप्रैल होगा, जब अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस दिन सभी संवेदनशील गांवों और क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात रहेंगे। किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं।
- डॉ. भानु गौर, संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। अक्षय तृतीया पर बाल विवाह रोकने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए विभाग की ओर से सात अप्रैल से अभियान शुरू किया गया है, जो 30 अप्रैल तक यानी अक्षय तृतीया तक चलेगा।
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना जाता है। यानी इस दिन विवाह के लिए किसी विशेष ज्योतिषीय गणना या पुजारी की आवश्यकता नहीं होती। इसी कारण कई परिवार इस अवसर पर गुपचुप बाल विवाह कर देते हैं। यही कारण है कि यह दिन प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ खड़े हों और किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत विभाग को दें। उन्होंने कहा कि बाल विवाह कानून के अंतर्गत यह दंडनीय अपराध है, जिसमें विवाह कराने वाले, माता-पिता और पंडित सभी को सजा हो सकती है।
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महिला संरक्षण अधिकारी ने बनाई योजना
महिला संरक्षण अधिकारी के नेतृत्व में इस बार व्यापक योजना तैयार की गई है। इसके अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों, पंचायतों, शहरी कॉलोनियों और विभागीय कार्यालयों, महाविद्यालयों आंगनबाड़ी केंद्रोें, आईटीआई संस्थानों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को बाल विवाह की कानूनी और सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में जागरूक करना है।
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दो माह में 1571 जागरूकता कार्यक्रम
दो महीनों में विभाग ने 1571 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिनमें नुक्कड़ नाटक, रैलियां, पंचायत स्तर पर बैठकें, स्कूलों में कार्यशालाएं, और पोस्टर-बैनर आदि के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। इन अभियानों में स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और समाजसेवी भी सक्रिय रूप से जुड़े हैं। वहीं, नवंबर से दिसंबर तक, जो 1571 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, अप्रैल महीने में इससे भी अधिक कार्यक्रम चलाने का लक्ष्य है।
अभियान का सबसे महत्वपूर्ण दिन 30 अप्रैल होगा, जब अक्षय तृतीया मनाई जाएगी। इस दिन सभी संवेदनशील गांवों और क्षेत्रों में विशेष निगरानी दल तैनात रहेंगे। किसी भी संदिग्ध विवाह की सूचना पर त्वरित कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन नंबर भी सक्रिय किए गए हैं।
- डॉ. भानु गौर, संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी